मुल्ज़िम भगवा था,मुजाविर क्यों बना मुजरिम ?

झूट कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है –सच बोलूं तो लोग खफ़ा होजाते हैं  ॥

भगवा रंग या केसरिया रंग शक्ति का प्रतीक है ,यह रंग अगर हिन्दू आस्था से जुड़ा है तो खुआजा मुईनुद्दीन चिश्ती के मज़ार से भी इसकी आस्था जुडी है , लेकिन  इस रंग को आतंक और जुर्म से जोड़ना शायद पत्रकारिता की  मजबूरी है,या  सच्चाई  का  तक़ाज़ा  भी । मालेगाओं ब्लास्ट से जुड़े आतंकी प्रज्ञा साध्वी और पुरोहित की गिरफ्तारी के बाद जब भगवा आतंक का शब्द समाज में आम हुआ तो अच्छा नहीं लगा हालांकि इससे पहले सिखः आतंकवाद और इस्लामिक आतंकवाद का शब्द आज भी प्रचलित है ,जिसको लिखना भी अधिकतर पत्रकार बंधुओं की मजबूरी रही है  या मिज़ाज भी,जबकि कई नामचीन साधू और हिन्दू स्कॉलर्स यह कह चुके हैं की इस्लाम और आतंक एक दुसरे के प्रतिद्वंदी हैं।

आज हम मालेगाओं आतंकी हमले के मुजरिम कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा साध्वी के जुर्म से जुडी कुछ बातें करेंगे. आपको याद होगा की मालेगाओं ब्लास्ट सबसे चर्चित आतंकी हमला रहा है जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह और कर्नल पुरोहित को मकोका के तहत सजा हुई थी ,और इस हमले की गुत्थी को सुलझाने में शहीद हेमंत करकरे और उनकी टीम को अपनी जान की क़ुरबानी देनी पड़ी थी , ऐसा विख्यात (मशहूर ) है की 26 /11 /2008  मुम्बई आतंकी हमला करकरे को साध्वी और पुरोहित को सजा दिलाने के जुर्म में क़त्ल करने के लिए योजना बद्ध था , इसकी सच्चाई में दर्जनों रिपोर्ट्स और कई किताबें लिखी जा चुकी हैं ।Detail के लिए “Who Killed Karkare” देखी जा सकती है ।दयानंद पांडेय के इक़बालिया ब्यान को भी ज़रा देख  लें “ISI funded RSS leaders: Pandey`s confession ” लिंक :http://zeenews.india.com/news/nation/isi-funded-rss-leaders-pandeys-confession_508735.हटमल.

आज मालेगाओं आतंकी हमले की  कड़ी  में   दो नाम क़ाबिले ज़िक्र हैं रामचंद्र कलसांगरा और संदीप डांगे ,ATS द्वारा ये दोनों अपराधी गिरफ्तार करलिए गए थे ,इसके बाद और कई बड़े राजनीतिगज्ञे,भगवा तंज़ीम के उच्च पदाधिकारी  तथा उच्च अधिकारियों के नाम सामने आने का खतरा था ,जिसका अंदाजा हमारे पाठकों को ऊपर दिए गए लिंक से होजायेगा। इसलिए इन दोनों को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने मार दिया था ,यह दावा खुद ATS अधिकारी ने ही किया है जिसका नाम मेहबूब मुजाविर है ,हालांकि ये दोनों आज भी ATS कि लिस्ट में वांटेड अपराधी दर्ज हैं जबकि  मुजाविर बीते 19 अगस्त 2016  को सोलापुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में इस बात के प्रमाण दे चुके हैं कि ये दोनों एटीएस द्वारा मारे जा चुके हैं। इसके बाद से ही मुजाविर को धमकियां मिलना शुरू होगी थीं और उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया है ,मुजाविर का जुर्म क्या है ?आपको मालूम होगया ?यह सही है कि इन्साफ और सच कि कीमत कई निडर और मुंसिफ अधिकारियों को अपनी जान से चुकानी पड़ी है ,जबकि अपराधियों को सत्ता में बैठे कई बड़े नेताओं और आला अधिकारियों का पूरा संरक्षण होता है इसके भी सैकड़ों प्रमाण मौजूद हैं  ।मुल्ज़िम भगवा था,मुजाविर क्यों बना मुजरिम ? इसका जवाब आप को देना है ।

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