سارا عالم تھا ! میری میت ، پر

 غزل تم نہ آۓ ! تو ، کیا سحر نہ ہوئی ؟۔ ہاں ! مگر چین…

غزل : دونوں کے قبیلوں میں عداوت ہے ازل سے

              اک سمت نہیں پیار ادھر بھی ہے ادھر بھی…

हरकत नहीं है खून में………

ग़ज़ल इस बेबसी को क्या कहूँ। जीना कहूँ मरना कहूँ।। ये ज़िंदगी का आइना। उजला कहूँ…

ISTD Organises 2023 Convocation at PHD House New Delhi

PRESS RELEASE The Annual Convocation of Indian Society for Training & Development (ISTD) was held at…

जब भी गिरता हूँ थाम लेता है

हैरत फ़र्रुख़ाबादी जब भी गिरता हूँ थाम लेता है यूँ भी वो इंतिक़ाम लेता है क्या…

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़

अल्लामा इक़बाल नज़्म लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद ये हिन्दियों…

‘बात को हसरत ए नाकाम ने समझा ही नहीं’ : हकीम सुलेमान ख़ान “तूर”

हकीम सुलेमान ख़ान “तूर”   ग़ज़ल मुझको साक़ी ने कभी जाम ने समझा ही नहीं |…

रहबर बनाया जिस को वही लूटने लगा

सलाम हैरत ग़ज़ल हालात क्या बताऊँ मैं उजड़े दयार के। नामो निशां भी मिटने लगे अब…

रुख से पर्दा ज़रा हटा तो सही

ग़ज़ल रूबरू आइने के आ तो सही। अब हक़ीक़त भी आजमा तो सही।। जैसा मैं हूँ…

आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए

आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए ********** प्यार झूठा दिखाना नहीं चाहिए। आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए।।(1)…