सरकार कोई भी बनाये किन्तु विचार धारा के मायने ख़त्म: Maharashtr chapter

Date:

 

महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए बैठकों का दौर ख़त्म , एनसीपी-कांग्रेस की तरफ से बड़ा ऐलान- ‘शिवसेना के साथ मिलकर बनेगी सरकार’

नई दिल्ली: आजकी सियासत को अनिश्चितताओं और अनियमितताओं का दौर कहा जाता है , ऐसी सियासत जिसमें सिर्फ स्वार्थ देखा जाता हो , सरकारी घोषणाओं को जुमले बाज़ी कहा जाता हो , बयानों के बदलने और बयान से मुकर जाने को सियासी परिपक्वता (महारत) कहा जाता हो , ऐसे में देश का भविष्य और जनता का कया मुस्तक़बिल होगा सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है , ख़ैर अब महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर जारी तनातनी के बीच एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) की बैठक खत्म हो गई है। इस बैठक के बाद ऐलान किया गया है कि महाराष्ट्र में ‘शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने चर्चा को सकारात्मक बताया और महाराष्ट्र में स्थिर सरकार देने का दावा किया है ।’ वहीं कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया है कि अभी कुछ चर्चा बाकी है, वो एक-दो दिन में पूरी हो जाएगी। इस दौरान एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, ‘हमने सभी बिंदुओं पर चर्चा करली है ।’ मगर टाइम्स ऑफ़ पीडिया का मानना है कि इन दो दिनों में कुछ और भी हो सकता है

बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और NCP प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के बीच हुई मुलाकात के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन अब महाराष्ट्र में स्थिति साफ होती दिख रही है। इससे पहले कांग्रेस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना के साथ अलग-अलग बैठक की थी।

प्रत्यक्ष रूप से यदि देखा जाए तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी वैचारिक तौर पर हिंदुत्व समर्थक शिवसेना से हाथ मिलाने के पक्ष में नहीं थीं, शिवसेना ने महाराष्ट्र चुनाव के बाद सरकार में साझेदारी के मुद्दे पर सहयोगी दल बीजेपी से अपना रिश्ता तोड़ लिया था, लेकिन वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की शिवसेना सांसद संजय राउत के साथ शरद पवार के घर पर कांग्रेस-NCP की बैठक के बाद यह संकेत मिल रहे थे कि यह गठबंधन सकारात्मक रूप ले रहा है।

लेकिन यह सही है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर जो भी सियासी नूरा कुश्ती रही उसके बाद राज्य में सब कुछ फिलहाल अच्छा नहीं रहेगा,भले किसी भी संगठन के साथ मिलकर सरकार बनाने का दौर ख़त्म हो गया हो , किन्तु सत्ता के लिए नज़र्या और विचार धरा कोई माने नहीं रखती यह कम से कम तय: होगया है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

हिन्दुराष्ट्र वाला हिंदुस्तान ऐसा होगा?

.......अब अगर इसको हिंदु राष्ट्र बनाये जाने की बात...

भारत बना दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार

edited by maroof raza, senior journalist भारत रूस से तेल...

Religion, Wisdom, Demographics and the Misuse of Faith

“The wisdom that comes from God teaches love, justice,...

कमज़ोर होता लोकतांत्रिक दायरा और पीएम की उपलब्धियां

राम पुनियानी इस साल 10 जून को मोदी निरंतर भारत पर शासन...