“तमिलनाडु में सत्ता पलट! CM बनते ही विजय का बड़ा वार”

तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के प्रमुख सी. जोसेफ़ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। करीब छह दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच घूमती सत्ता की राजनीति पर जनता ने इस बार बड़ा प्रहार किया और फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय को सत्ता की कमान सौंप दी।

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शपथ लेते ही विजय ने मंच से ही तीन बड़े फैसलों पर हस्ताक्षर कर साफ संदेश दे दिया कि नई सरकार खुद को “जनता की सरकार” के तौर पर पेश करना चाहती है। हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली, नशे के खिलाफ हर जिले में विशेष बल और महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाने जैसे फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब विपक्ष लंबे समय से राज्य में कानून-व्यवस्था और बढ़ती महंगाई को लेकर पिछली सरकारों को घेरता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता ने केवल सरकार नहीं बदली, बल्कि उन द्रविड़ दलों के लंबे वर्चस्व पर भी सवाल खड़ा किया है, जिन पर वर्षों से परिवारवाद, भ्रष्टाचार और जनता से दूरी के आरोप लगते रहे हैं। विजय ने अपने शुरुआती भाषणों में भी “द्रविड़ मॉडल के नाम पर धोखा” और “एक परिवार द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा” जैसे आरोप लगाकर सीधे सत्ता पक्ष की राजनीति पर निशाना साधा था।

चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित शपथ समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ टीवीके के नौ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई(एम), वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन के बाद विजय को विधानसभा में 120 विधायकों का समर्थन मिला, जिसके आधार पर उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि फरवरी 2024 में बनी टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल ला दिया। पार्टी के 107 विधायकों में से 93 पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इसे जनता के उस गुस्से का संकेत माना जा रहा है, जो पारंपरिक दलों की राजनीति से ऊब चुकी थी।

फिल्म अभिनेता से मुख्यमंत्री बने विजय ने अपनी राजनीति को धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय की विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी ने पेरियार, कामराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर और वेलु नच्चियार जैसी हस्तियों को अपने प्रतीकों के रूप में आगे रखकर सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि असली चुनौती अब शुरू होती है। चुनावी वादों को जमीन पर उतारना, सहयोगी दलों को साथ रखना और प्रशासनिक अनुभव की कमी से निपटना विजय सरकार के सामने बड़ी परीक्षा होगी। लेकिन फिलहाल तमिलनाडु की जनता ने यह जरूर दिखा दिया है कि सत्ता को स्थायी समझने वाली राजनीति को कभी भी जनता सबक सिखा सकती है।

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