राहुल की जनेऊ नीति और कांग्रेस की नई रणनीति का अंतर देखें

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CAA और NRC पर कांग्रेस सहयोगी दलों को करेगी लामबंद , जनता के बीच चलाएगी बड़ा अभियान

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन क़ानून और नागरिकता रजिस्टर पर विपक्ष लगातार सत्ताधारी NDA को घेरने में लगी है और साथ ही वामदल तथा दूसरी क्षेत्रीय विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर एक साथ नज़र आ रहे हैं , और इस बात की आशंकाएं जताई जाने लगी है की 2024 लोकसभा में BJP की वापसी मुश्किल होगी .

ऐसे में कांग्रेस के कांग्रेस के नेता अखिलेश प्रताप सिंह से पूछा गया कि क्या सत्ता में आने पर कांग्रेस , नागरिकता कानूनको हटा देगी तो इस सवाल पर एक झटके में जवाब दिया है, ‘हां बिलकुल खत्म कर देगी’. हालांकि इसके लिए सबसे बड़ी हकीकत यह है कि कांग्रेस को संसद में बीजेपी की तरह ही बहुमत जुटाना पड़ेगा और कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि सीएए और एनआरसी का विरोध किसी भी हद तक जाकर करना है.

एक बात यह भी है कि नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध के लिए कांग्रेस ने एक बड़ा रिस्क भी उठाया है. साल 2014 में हुई हार की पड़ताल के लिए गठित एके एंटोनी समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि पार्टी की हार के पीछे उसकी अल्पसंख्यकों की तुष्टिकरण वाली छवि भी रही है. इस रिपोर्ट को ही ध्यान में रखते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुजरात, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान जनेऊ तक धारण कर लिया था. राहुल का यह नरम हिंदुत्व कार्ड कोई ख़ास फायदा न दे पाया .

कांग्रेस को अपनी नीति विकास , सांप्रदायिक सद्भाव और विकास पर ही केंद्रित रखनी होगी , क्योंकि जितना कट्टर हिंदुत्व का कार्ड BJP चल सकती है उतना कांग्रेस नहीं चल सकती तो आधा तीतर आधा बटेर से पार्टी का कोई नफा होने वाला नहीं है .और देश का १२% हिंदुत्व वादी ज़ेहन BJP के मुक़ाबले congress को पसंद नहीं करता .

हमने देखा लोकसभा 2019 के चुनाव में पीएम मोदी की उज्जवला, गैस कनेक्शन, शौचालय और आवास योजनाओं ने भी बीजेपी को को फायदा पहुँचाया जबकि दूसरी ओर कांग्रेस बालाकोट, राष्ट्रवाद के मुद्दे पर उलझ कर रह गई थी.

आज कांग्रेस की रणनीति है कि एक ओर नागरिकता कानून, एनआरसी को लेकर अल्पसंख्यकों तथा दीगर विरोधी वर्ग और समुदाय में उपजे गुस्से और मोदी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को जितना वसूल किया जासके उसके लिए फायदेमंद साबित होगा. इस रणनीति की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव होंगे जहां पर प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाला हुआ है .

सूत्रों की माने तो कांग्रेस ,संशोधित नागरिकता कानून (CAA ), राष्ट्रीय नागरिक पंजी(NRC ) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर-2020(NPR ) जैसे मुद्दों के साथ विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों पर हमले, आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, कृषि संकट और महिला सुरक्षा जैसे जनहित के मुद्दों को लेकर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलने वाली है .

यदि CONGRESS उपरोक्त मुद्दों को जनता के सामने रखने और जनता को मुत्मइन करने में कामयाब हुई तो 2024 भी CONGRESS का ही होगा , लेकिन यह आग के दरिया से कम भी न होगा जिसमें खुद कांग्रेस और सच्चे देश भक्तों की कोशिश और क़ुरबानी भी शामिल होगी .

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक शनिवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह कहा गया कि मोदी सरकार के खिलाफ पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं और इन मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों को बेनकाब करें.

कांग्रेस (CONGRESS ) के सभी संगठन, विभाग और प्रदेश कांग्रेस कमेटियां अलग अलग कार्यक्रमों के आधार पर जनता से संपर्क करेंगी और इन मुद्दों को उठाएंगी. सूत्रों का यह भी कहना है कि 13 जनवरी को समान विचारधारा वाली पार्टियों की बैठक में भी इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी और मोदी सरकार को संसद से सड़क तक घेरने के लिए इन दलों को साथ लेने की हर संभव कोशिश होगी. TOP BUREAU

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