क्या मोदी सरकार विपक्ष के हाथ से बेरोज़गारी का मुद्दा छीन लेगी?

अब नौकरियों के भी लगेंगे मेले , नैकरियाँ देना बनेगा चुनावी मुद्दा

कुछ वर्षों पूर्व देश में दीवाली मेला , ईद मेला , दशहरा मेला ही होता था लेकिन अब देश में नौकरी मेले भी लगाए जाने लगे हैं . आप जानते हैं मेलों में चीज़ें खरीदी और बेचीं जाती हैं , अब वहां देश का नौजवान भी बेचा और खरीदा जाएगा यह तो हम नहीं कहते लेकिन मेले में नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे . इसको आप चाहे सरकार की उपलब्धी कहें चुनावी स्टंट .

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अक्टूबर ठीक धनतेरस के दिन ‘रोज़गार मेला’ नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की .मोदी का कहना है कि भारत सरकार साल 2023 के अंत तक 10 लाख़ युवाओं को नौकरी देगी .प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को पहले चरण के तहत 75,000 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे.

ये भर्तियां यूपीएससी, एसएससी और रेलवे सहित केंद्र सरकार के 38 मंत्रालयों या विभागों में दी जाएगी. यानी इस मेगा प्लान में रेलवे, डिफ़ेंस, बैंकिंग, डाक और इनकम टैक्स जैसे विभाग शामिल हैं. इस योजना का एलान इसी साल जून में प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर किया था.

इस प्लान में बताया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विभागों और मंत्रालयों में मानव संसाधन की समीक्षा की और इस मिशन के तहत अगले साल के अंत तक 10 लाख़ लोगों को भर्ती करने का आदेश दिया है.और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि देश में आम चुनाव भी तब तक ज़ोरों पर होंगे .

22 अक्टूबर को जिन विभागों में नौकरियों के लिए चिट्ठी दी गईं उनमें रेलवे भी शामिल है. रेलवे भारत में सबसे ज़्यादा सरकारी नौकरी देने वाले विभागों में से एक है.अब ये नौकरियां भारत सर्कार देगी या अडानी ग्रुप यह देखना बाक़ी है ..

भारतीय रेल के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने मीडिया को बताया था कि इस दौरान क़रीब 8,000 युवाओं को रेलवे में नौकरी का ऑफ़र लेटर दिया जाएगा. आपको याद है न ,इससे पहले रोज़गार के मुद्दे पर विपक्ष ने लगातार केंद्र सरकार पर हमला किया है.

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव तक मोदी सरकार को बेरोज़गारी के मुद्दे पर घेरते रहे हैं.

यानी मौजूदा समय में बेरोज़गारी की समस्या विपक्ष के लिए केंद्र सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा रहा है.लेकिन अब वो भी विपक्ष के हाथ से निकलता दिख रहा है . मगर किसी का तो भला होगा .

बढ़ती बेरोज़गारी का मुद्दा उत्तर से लेकर दक्षिण भारत और पूर्व से लेकर पश्चिम भारत तक विपक्ष को सरकार पर हमले का हथियार देता रहा है.

विपक्ष के लिए रहा था रोज़गार का बड़ा मुद्दा

अक्सर सरकारी नौकरी की चाह रखने वालों में बड़ी तादाद बिहार के युवाओं की होती है. बीते कुछ साल में भारत में सरकारी नौकरी बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है , हालाँकि विपक्ष इसको Cash नहीं कर सका .हालाँकि बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान बिहार में सरकार बनने पर 10 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था.

बीते अगस्त महीने में जेडीयू और आरजेडी गठबंधन की सरकार बनने के बाद तेजस्वी यादव ने कम-से-कम चार-पाँच लाख़ लोगों को नौकरी देने की बात कही थी.

इस वादे को पूरा करने के लिए तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को इसकी शुरुआत भी कर दी .अपने फ़ेसबुक पेज पर उन्होंने भी मेले जैसा माहौल बनाने की कोशिश में कई तस्वीरें लगाई हैं. इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी की चिट्ठी सौंपते दिखे .

तेजस्वी यादव ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा, “आज बिहार ने इतिहास रचा. आप बिहार के नजवानों को हार्दिक बधाई. एक ही दिन में एक ही विभाग के नव चयनित 9,469 स्वास्थ्य कर्मियों को नियुक्ति पत्र सौंपा. बिहार ने जो राह दिखाई है, अब पूरे देश को हमारे नौकरी-रोज़गार के मुद्दे पर आना ही होगा.”

यानी इस पोस्ट से तेजस्वी यादव भी नौकरी और रोज़गार को बड़ा मुद्दा बनाते दिख रहे हैं.

देश में बेरोज़गारी चरम पर

सरकारी नौकरी को लेकर यूपी, बिहार, झारखंड समेत तमाम राज्यों के अपने वादे और दावे रहे हैं. जबकि विपक्षी दलों के शासन वाले हर राज्य सरकार ने बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर मोदी सरकार पर लगातार निशाना साधा है .

भारत में साल 2019 में 45 साल की सबसे बड़ी बेरोज़गारी के आंकड़े सामने आए थे. उस साल आम चुनावों से पहले इन आंकड़ों के लीक होने पर काफ़ी विवाद हुआ था.

जबकि बाद में सरकार ने बेरोज़गारी आंकड़े ख़ुद जारी किए और माना कि भारत में बेरोज़गारी दर पिछले चार दशक में सबसे ज़्यादा हो गई है.

सरकार ने पहले लीक हुई रिपोर्ट को यह कहते हुए ख़ारिज किया था कि बेरोज़गारी के आंकड़ों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है.

लेकिन विपक्ष इस ख़बर के सामने आने के बाद से ही रोज़गार के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाती रही है.

आपको बता दें , सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक़, भारत में 20 अक्टूबर, 2022 को बेरोज़गारी दर 7.8 फ़ीसदी है. इसमें शहरी बेरोज़गारी दर 7.5 फ़ीसदी, जबकि गांवों के लिए यह आंकड़ा 7.9 फ़ीसदी रहा है.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार की तरफ़ से अगले क़रीब डेढ़ साल में 10 लाख़ लोगों को नौकरी देने का वादा विपक्ष से बेरोज़गारी का मुद्दा भी छीन सकता है ? 

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