हिजाब के फ़ायदे साइंस की नज़र से एक अध्ययन

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Ali Aadil Khan

Editor’s Desk

दोस्तों आज पूरी दुनिया में मज़हबे इस्लाम , इस्लाम के मानने वाले मुसलमानों और इस्लामी शरिया पर Debates हो रही हैं | जिसके तहत 2 Topics जिहाद और हिजाब काफ़ी चर्चा में हैं |

आइये आज हिजाब को वैज्ञानिक दृष्टि से पहले समझने की कोशिश करते हैं , इसके बाद जिहाद को समझेंगे |

 

हेलेन फिशर Human Behavior Scientist का कहना है कि जब भी किसी पुरुष की दृष्टि स्त्री पर पड़ती है,तो हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय हो जाते हैं और फिर पुरुष स्त्री को देखकर आकर्षित होता है फिर चिढ़ जाता है या उत्तेजित होजाता है .

दरअसल, इस्लाम महिलाओं को परदे में रहने ,अपने शरीर और सुंदरता की हिफाज़त करने का आदेश देता है , लेकिन क्यों ?  क्योंकि औरत की हया ही उसकी इज़्ज़त है , ईमान है और उसका आभूषण है |मज़हबे इस्लाम महिलाओं को अपने अंदाज़ , हुस्न और जिस्म सिर्फ अपने शोहर के सामने दिखाने की इजाज़त देता है |जिसके बहुत से सामाजिक और शारीरिक फ़ायदे हैं |

विज्ञानं की नज़र में महिलाओं के घूंघट या परदे में रहने के क्या फायदे हैं? आइये इसको समझने की कोशिश करते हैं | क्योंकि कुछ लोग इस्लाम के तर्क को स्वीकार नहीं करते , हालांकि Fact यह है कि आज जो कुछ भी विज्ञान की तहक़ीक़ है , वो क़ुदरत के ज़रिये बना दी गयी चीज़ों में ही है ।

यह पूरी दुनिया मानती है कि पहले Nature है फिर साइंस या साइंसी तहक़ीक़ हैं . मिसाल के तौर पर अल्लाह ने पहले दिल बना दिया है अब इसमें तहक़ीक़ है कि यह दिन में कितनी बार धड़कता है . कितना ब्लड दिन में पंप करता है , वग़ैरा . और मज़े की बात यह है कि जिस दिमाग़ को साइंसी तहक़ीक़ में इस्तेमाल किया जाता है उसको भी अल्लाह ही ने अपनी क़ुदरत से बनाया है |

यहाँ आपको यह बताना भी ज़रूरी है कि मज़हबे इस्लाम के क़ानूनों को सच साबित करने के लिए किसी साइंसी तस्दीक़ या Research की ज़रुरत नहीं है . हाँ अगर कोई इस्लामिक Belief को अपनाने के लिए साइंस का सहारा लेना चाहे तो ले सकता है .

और दूसरी बात यह कि अगर कोई मज़हब , साइंस के सत्यापन का मोहताज है तो यह फ़ितरी मज़हब नहीं बल्कि इंसानों के ज़रिये गढ़ा गया एक Mith ही हो सकता है .

अल्लाह ने 1420 साल पहले क़ुरआन के ज़रिये बहुत सी तहक़ीक़ ब्यान कर दी हैं – जिनमें ग़ौर करके कई साइंसदाँ अपनी तहक़ीक़ में कामयाब हो सके हैं |

एक मशहूर अमेरिकी Anthro Pologist हैं …..प्रोफेसर हेलेन फिशर जो पिछले 30 बरसों से अमेरिका के रटगर्स यूनिवर्सिटी में मानव विज्ञान पढ़ा रहे हैं . और वो खुद मानव व्यवहारवादी यानि Human Behaviorist हैं। उन्होंने लम्बे समय तक Reaserch किया है और इस विषय पर कई किताबें लिखी हैं।

उन्होंने बताया कि मानव शरीर में कुछ हार्मोन ऐसे होते हैं जो महिलाओं के मुक़ाबले मर्दों में ……ज़्यादा पाए जाते हैं जैसे टेस्टो स्टेरोन और एस्ट्रोजेन न्यूरोट्रांसमीटर। इसी तरह डोपामाइन और सेरोटोनिन मर्दों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो सीधे इंसान के व्यवहार को Effect करते हैं।

Scientist हेलेन फिशर (human behaviorist) का कहना है कि जब भी किसी पुरुष की दृष्टि स्त्री पर पड़ती है, तो टेस्टो स्टेरोन , एस्ट्रोजेन हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय हो जाते हैं और फिर पुरुष स्त्री को देखकर चिढ़ जाता है या आकर्षित होकर उत्तेजित हो जाता है |

किसी मर्द के उत्तेजित होजाने या स्त्री की ओर आकर्षित होने का इमकान तब ज़्यादा बढ़ जाता है जब या तो स्त्री बेपर्दा हो या उसका शरीर के उभार झलक रहे हो ।हेलेन फिशर ने यह भी बताया कि यह Chemical Reactions दूसरे जीव जंतुओं में भी पाए जाते हैं ।

यहाँ हमने आपको विज्ञान की तहक़ीक़ के मुताबिक़ स्त्री के शरीर और सौंदर्य को देखकर पुरुष के उत्तेजित होने के बारे में बताया | उम्मीद है समझ में भी आया होगा |

पार्ट 2

लेकिन एक क़ुदरत का कमाल यह है कि यह उत्तेजना बहिन भाई , माँ बाप और बेटा बेटी के रिश्तों के सम्बन्ध में तक़रीबन ज़ीरो होती है |यानी जिनको हम मेहरम वाले रिश्ते कहते हैं …. क्योंकि उनके हॉर्मोन्स एक दूसरे के प्रति नेगेटिव – पॉजिटिव नहीं होते जिसकी वजह से आपस में रिश्तों की मोहब्बत तो होती है मगर बदनज़री या बदफ़ैली की रुचि नहीं होती |

आप मज़हबे इस्लाम की दूरदर्शिता और उसके फ़ितरी मज़हब होने का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं |फ़रमाया रसूले खुदा ने , जब तुम्हारी औलादें बालिग़ हो जाएँ तो उनकी चादर और बिस्तर अलग कर दिया करो |

आप जानते हैं ?????? मज़हबे इस्लाम में बच्चियों को बचपन ही से चादर , अबाये और सर ढंकने की प्रैक्टिस कराई जाती है ताकि बालिग़ होते होते जिस्म को ढांकने की आदत पड़ जाए . ये अलग बात है की मुस्लमान भी शैतानी चालों में फसकर रूहानी अमल से खाली हैं . जिसकी सज़ा यहाँ भी भुगत रहे हैं .

अब जो लोग जान बूझकर अपनी औलादों को बेहया लिबासों में घर से बाहर भेजने की इजाज़त देते हैं इसका मतलब वो खुद अपनी औलाद की तरफ बुरी नज़र के लिए लोगों को Invite करते हैं |

ऐसे में यदि पुरुषों को महिलाओं की ओर आकर्षित होने से रोकना है तो महिलाओं को अपने सौन्दर्य और शरीर को ढक लेना चाहिए और पुरुषों को स्त्रियों की ओर नहीं देखना चाहिए। अन्यथा उसका नतीजा बुरा ही होना है |

कुरान में, अल्लाह ने आदेश दिया है कि महिलाओं को अपना पर्दा रखना चाहिए और मुस्लिम पुरुषों को अपनी आंखें नीचे रखनी चाहिए। आँख नीची रखने का मतलब है कि उन्हें ग़ैर मेहरम महिलाओं को नहीं देखना चाहिए। भारत की संस्कृति में भी घूंघट से चेहरों को ढंकने और साडी का पल्लू सर पर रखने का चलन है .और यही अच्छा है इंसानों की भलाई के लिए।

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पक्षियों के व्यवहार का अध्ययन किया …….और बताया कि पक्षी गीत गाते हैं , और अलग-अलग आवाजें निकालते हैं जिसका अर्थ है कि वे Female पक्षियों को आकर्षित करने के लिए ऐसा करते हैं ।

क़ुदरत ने इस सबके पीछे Biological Reason रखे है , ताकि इस आकर्षण और उत्तेजना के माध्यम से Reproduction का सिलसिला जारी रह सके |और धरती को हर क़िस्म के जीव जंतुओं की चहचहाहट से पुर कशिश और आकर्षण का जरिया बनाया जा सके |

आपने सुना और देखा होगा कि जब कोई हाथी पागल हो जाता है तो कहर बरपाने लगता है, लेकिन Research कहती है कि हाथी पागल नहीं होता , ऐसा इसलिए करता है क्योंकि इसमें टेस्टोस्टेरोन यानी (सेक्स करने की शक्ति को पैदा करने वाला हॉर्मोन ) बहुत अधिक मात्रा में होता है।और जब वो अपनी ख्याहिश को पूरा नहीं कर पाता है तभी वो केहर बपा करता है जिसमें उसकी हालत पागल जैसी हो जाती है …

उसी तरह एक शेर दूसरे शेरों के बच्चों को मार डालता है ताकि शेरनी उसकी ओर आकर्षित हो सके – और मादा को पाने के लिए सभी प्रकार के नर जानवर आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। Proffesor हेलेन फिशर कहते हैं यह सब टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजेन न्यूरोट्रांसमीटर की वजह से ही होता है |

इस सबके बावजूद कुदरती तौर पर हर एक जीव में क़ुदरत ने हया और शर्म का माद्दा भी रखा है , ख़ास तौर से मादा यानी Female जन जीवों में , जिसके कारण वो अक्सर नर जीवों के साथ खुले में Comfortable नहीं होते | यह कुदरती निज़ाम है .

क़ुरआन में औरतों के लिए पर्दा व् हिजाब के अलावा और दुसरे अहकामात भी इसी लिए है कि समाज से बेहयाई और जुर्म को ख़त्म किया जा सके | शरीअते इस्लाम का हर क़ानून मानवता और सृष्टि की सुरक्षा के मद्दे नज़र ही बना है .जो चाहे इसको समझ सकता है .

क़ुरआन मालिके कायनात का कलाम और इस्लाम एक फ़ितरी मज़हब है यानी वो Man Made नहीं है | जिस रब ने इंसान को बनाया उसी ने इस मज़हब यानि मज़हब ए इस्लाम को पसंद किया और जिससे,,,रब खुश हुआ उसको ये दौलत अता की |

अब जो लोग आज़ादी के नाम पर हिजाब को दमनकारी और दकयानूसी अमल कहते हैं वो इसको न अपनाये , और अपनी औरतों को दूसरे मर्दों की ज़ेहनी और जिस्मानी अय्याशी के लिए छुट्टा छोड़ दे | मगर ऐसी आज़ादी को सभ्य ,हयादार और सम्मानित इंसान पसंद नहीं करते | जय हिन्द शुक्रिया

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