अटल मुरादाबादी
गर्मी से तपती धरा, जन जीवन बेहाल।
तापमान असहज हुआ, रवि की टेढी चाल।।
रवि की ढेढी चाल,करे तांडव अब दिनभर।
ज्यों-ज्यों बढता दिवस,बढ़ाते तेवर दिनकर।।
कहै...
अटल मुरादाबादी
प्यार झूठा दिखाना नहीं चाहिए।
आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए।।(1)
प्यार करते रहो निर्बलों से सदा
आंख उनको दिखाना नहीं चाहिए।(2)
तुम मदद खुद किसी की करो...