अल्लामा इक़बाल
नज़्म
लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद
ये हिन्दियों की फ़िक्र-ए-फ़लक-रस का है असर
रिफ़अत में आसमाँ से भी ऊँचा है बाम-ए-हिंद
इस...
आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए
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प्यार झूठा दिखाना नहीं चाहिए।
आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए।।(1)
प्यार करते रहो निर्बलों से सदा
आंख उनको दिखाना नहीं चाहिए।(2)
तुम मदद खुद...