Poetry/Literature

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़

अल्लामा इक़बाल नज़्म लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद ये हिन्दियों की फ़िक्र-ए-फ़लक-रस का है असर रिफ़अत में आसमाँ से भी ऊँचा है बाम-ए-हिंद इस...

‘बात को हसरत ए नाकाम ने समझा ही नहीं’ : हकीम सुलेमान ख़ान “तूर”

हकीम सुलेमान ख़ान "तूर"   ग़ज़ल मुझको साक़ी ने कभी जाम ने समझा ही नहीं | आज तक गर्दिश ए अय्याम ने समझा ही नहीं || उस...

रहबर बनाया जिस को वही लूटने लगा

सलाम हैरत ग़ज़ल हालात क्या बताऊँ मैं उजड़े दयार के। नामो निशां भी मिटने लगे अब मज़ार के।। मौक़े तो ज़िन्दगी में कई यादगार हैं। लम्हे न भूल पाया...

रुख से पर्दा ज़रा हटा तो सही

ग़ज़ल रूबरू आइने के आ तो सही। अब हक़ीक़त भी आजमा तो सही।। जैसा मैं हूँ नसीब हूँ तेरा। मैं न अच्छा सही बुरा तो सही।। दर्द ही बस...

आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए

आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए ********** प्यार झूठा दिखाना नहीं चाहिए। आंख अपनी चुराना नहीं चाहिए।।(1) प्यार करते रहो निर्बलों से सदा आंख उनको दिखाना नहीं चाहिए।(2) तुम मदद खुद...

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