और अधूरी ज़िंदगी ही जी पाते हैं

  यह रही हम फूलों की तक़दीर* किसी के प्यार के इज़हार के तौर पर किताबों…

उस के नज़दीक ग़म-ए-तर्क-ए-वफ़ा कुछ भी नहीं

उस के नज़दीक ग़म-ए-तर्क-ए-वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी नहीं…