अधिवक्ता पर UP पुलिस का जान लेवा हमला , आम आदमी सकते में – रिहाई मंच

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अधिवक्ता पर UP पुलिस का जान लेवा हमला , आम आदमी सकते मेंरिहाई मंच

भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने की वजह से अधिवक्ता मसूद पर हुआ पुलिसिया हमला

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे ,यदि न हुआ इन्साफ तो देश सिविल वार की तरफ चल पड़ेगा

 

लखनऊ 21 मई 2018 : अन्याय आतंक और बदअमनी की जननी है , और जब इन्साफ दिलाने वाली एजेंसी में बैठे लोग ही साम्प्रदायिकता से ग्रस्त होजायें तो इस बात का सहज  ही अंदाज़ा लगाया जासकता है की देश अब किस ओर जारहा है , रिहाई मंच ने बताया कि भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों को उठाने वाले उतरौला बलरामपुर उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता मोहम्मद मसूद रजा पर पुलिसिया हमले के चार दिनों बाद भी एफआईआर दर्ज न होना साफ करता है कि योगी सरकार अपने अपराधी पुलिस वालों को बचाने की फिराक में है। बलरामपुर के उतरौला थाने में पिछले दिनों एडवोकेट मोहम्मद मसूद रजा पर हमले के बाद आज उनके भाई सेराजुल हक और अब्दुल हफीज खान ने रिहाई मंच से मुलाकात कर बताया कि चार दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज हुई है।

 

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव से एडवोकेट मसूद रजा ने जो गंभीर रुप से पुलिस के हमले में गंभीर रूप से घायल हैं, फोन पर बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत एसपी बलरामपुर, मुख्यमंत्री, बार काउंसिल, डीजीपी, मानवाधिकार आयोग और अन्य जगहों पर की है। उतरौला बार एसोशिऐसन ने कोतवाल सहित दोषी पुलिस कर्मियों के निलंबन की मांग की है।और उन्होंने कहा की ये पुलिस के भेस में आतंकी हैं .

 

इस पूरी घटना पर एसपी, बलरामपुर ने एफआईआर दर्ज करने का आष्वासन दिया है पर रिपोर्ट भेजे जाने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर यह भी सूचना है कि पुलिस फर्जी मामले में मसूद रजा समेत अन्य 2 को अभियुक्त बनाकर उनको फर्जी मुकदमें में फसाने की तैयारी कररही है , ताकि अपना बचाव करसके ।

 

राजीव यादव ने बताया कि मसूद रजा ने बलरामपुर चीनी मिल से हो रहे प्रदूषण जैसे अहम मुद्दों को हाई कोर्ट तक लाकर लड़ाई लड़ी ताकि आम जनता और जीव जन्तु का भी भला हो और वे सुरक्षित रह सकें।

 

आज मसूद रजा पर हुआ पुलिसिया हमला भ्रष्टाचारी कंपनी और पुलिस के गठजोड़ का पता देता है , पुलिस नहीं चाहती कि उनके मुनाफे के कारोबार को कोई अड़चन बने । उन्होंने कहा कि एक तरफ योगी कहते हैं कि आपराधियों से मुक्त यूपी होगा दूसरी तरफ उनकी पुलिस अपराध के खिलाफ शिकायत करने वालों पर जानलेवा हमला कर रही है जो बताता है कि सरकार अपराधियों के साथ है और आम आदमी हवालात में है।

हालांकि इस सम्बन्ध में पुलिस से बात करना बाक़ी है , जबकि पुलिस अपने पक्ष में ब्यान तैयार कररही है , इस पूरे मामले की CBI और मानवाधिकार टीम की जांच के बाद ही कुछ तय होपायेगा , वो भी जब जबकि वो निष्पक्ष हो . किन्तु रिपोर्ट लिखे जाने तक पीड़ित की FIR दर्ज न होना गंभीर चिंता और प्रदेश में लॉ एंड आर्डर की बिगड़ती स्तिथि को दर्शाता  है .

 

क्या है पूरा मामला

पीड़ित के भाइयों ने रिहाई मंच को  बताया कि 16 मई 2018 को मसूद रजा, शाकिर के साथ उतरौला पुलिस स्टेषन एक मामले को लेकर गए। जहां पीड़ित पक्ष ने एफआईआर करने के लिए उतरौला एसएचओ से बात की। लेकिन एसएचओ एफआईआर दर्ज करने के बजाए एडवोकेट मसूद रजा को गाली देने लगे।इसका विरोध किया गया तो SHO भड़क उठे और एनकाउंटर की धमकी देने लगे , वहीं मौजूद मसूद के छोटे भाई हसमत रजा ने पूरे घटना की विडिओ बनाना चाहि तो उनका मोबाइल पुलिस ने छीन लिया और कहा कि ये वीडियो बना रहा था, इसको भी पीटो जिससे वीडियो बनाना भूल जाए।

 

हसमत किसी तरह वहां से भाग निकले। इस सब पर जब मसूद ने आपत्ति दर्ज की तो पुलिस उन्हें बेरहमी से पीटने लगी। किसी तरह जान बचाकर अधिवक्ता मसूद भागने लगे तो पुलिस उन्हें फिर से चैराहे से घसीटते हुए लाकर थाने पर पीटने लगी और अपशब्द बकते हुए कहा कि बड़ा वकील बनता है, इलाहाबाद के वकील की तरह इसका भी इनकाउंटर कर दो।

 

कोतवाल संतोष कुमार सिंह के साथ दर्जन भर पुलिस वालों ने पीट-पीटकर मसूद को अधमरा कर दिया। जिससे उनके सीने, कान, सिर, हाथ-पैर समेत पूरे जिश्म में गंभीर चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मसूद को लाकअप में बंद कर दिया और ऊपर से केस भी लगा दिया। सब कुछ तो पुलिस के हाथ में है जो चाहे केस लगादे , मामले कि रिपोर्टिंग करने वाला शख्स भाग गया , कौन सच बताएगा ?

इसके बाद भी पुलिस कि आग ठंडी नहीं हुई , आखिर क्या जुर्म था इस अधिवक्ता का यह तो इन्साफ करने वाली वाली टीम ही बताएगी मगर इन्साफ होगा कि नहीं यह नहीं पता ,,,इसके बाद कोतवाल संतोष सिंह ने मसूद के भाई हसमत रजा को खोजवाने पुलिस को भेजा और कहा कि उसको जैसे भी हो पकड़ कर लाओ, तीनों भाइयों का एनकाउंटर कर देंगे।

 

रिहाई मंच कि रिपोर्ट के अनुसार मसूद गंभीर चोटों की वजह से अस्वस्थ हैं। मंच जल्द उतरौला, बलरामपुर जाकर उनसे मुलाकात करेगा और मामले कि जांच करके आगे कि कार्रवाई करेगा .अधिवक्ता पर हमला बताता है कि यहाँ आम आदमी पूरी तरह असुरक्षित है , और सच्चाई के लिए जो भी आगे आएगा उसके साथ एहि हाल होगा ।

 

यह मानवाधिकार का गंभीर मसला है। इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे , अन्यथा अवाम का बचा कुछा पुलिस और प्रशासन पर भरोसा भी उठ जाएगा और देश रफ्ता रफ्ता सिविल वार कि ओर बढ़ता रहेगा । जय मानवता जय इन्साफ

 

द्वारा जारी-

शाहनवाज आलम

प्रवक्ता, रिहाई मंच

9415254919

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