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100  जूते खाओगे या 5 किलो प्याज़ ?

100 जूते खाओगे या 5 किलो प्याज़ ?

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थाली 2 बार बजी मगर 1 बार सुनाई गयी ऐसा क्यों ?

उपवास रख कर और थाली बजा कर लॉकडाउन में भूख से आज़ादी की आवाज उठी

नई दिल्ली/पटना/ लखनऊ. आपको मालूम है की अधिकतर मीडिया Houses खबर , खबर के लिए नहीं बल्कि पैसों के लिए चलाते हैं , इसकी एक ताज़ा मिसाल 12 April को बजी थाली का कोई Coverage नहीं हुआ क्यों ? क्योंकि इस खबर से पैसा नहीं , TRP नहीं ,क्योंकि यह थाली देश की ग़रीब , मज़दूर जनता ने बजाई थी और वो थाली देश के समृद्ध लोगों ने बजाई .

***बात दरअसल यह है कि लॉकडाउन में गरीबों को राशन समेत जरूरी वस्तुएं निःशुल्क मुहैया कराने के लिए भाकपा (माले) के देशव्यापी आह्वान पर रविवार को देश के कई राज्यों में आज दिन के दो बजे दस मिनट तक घरों के दरवाजों पर थाली बजाकर और उपवास रख कर सभी को सम्मान के साथ भोजन देने की मांग उठाई गयी. ‘भूख के विरुद्ध और भात के लिए’ नाम से हुए इस कार्यक्रम में गरीबों की मांग के समर्थन में पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने एक दिन का उपवास रखा. इस दौरान शारीरिक दूरी का भी अनुपालन किया गया.यह देश व्यापी आह्वान यानी भूक से आज़ादी के लिए था किन्तु इसको मैनेज करने और प्रमोट करने के लिए कोई CORPORATE घराना साथ नहीं था इस लिए ग़रीब ने थाली बजाई आवाज़ उठाई किन्तु मीडिया ने नहीं दिखाई .

इस कार्यक्रम के माध्‍यम से सरकार से सबको भोजन और राशन की गारंटी करने, कोई वेतन कटौती नहीं करने , सबकी नौकरी और आश्रय का नुकसान नहीं होने देने , सबके लिए सामाजिक सुरक्षा की पक्की व्यवस्था करने और कोरोना महामारी को सांप्रदायिक एजेंडे के रूप में इस्तेमाल को बंद करने की मांग उठाई गयी.

***कई राज्यों की सरकारों को आम लोगों का इस तरह आवाज उठाना रास नहीं आया. तमिलनाडु के डिंडिगुल जिला के वसन्त कादिर पालयम गांव में गरीब थाली लेकर घरों के बाहर आये तो तसहीलदार और पुलिस गांव में ही पहुंच गये. लेकिन पूरा गांव ही बाहर आ गया और सभी ने थालियां बजा कर उन्हें अपनी जरूरतें सुनने पर मजबूर कर दिया.यह ग़रीब की एकता की आवाज़ थी , जिसको सुन्ना मजबूरी बना , वर्ण 10 -20 को तो ऐसे ही डंडे मारकर भगा दिया होता , लेकिन जब गॉंव ही पूरा बाहर निकल आया तो सरकारी तंत्र की मजबूरी बन गयी की बात सुनी जाए .

यूपी और पंजाब में माले नेताओं को हिरासत में लिया

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पुलिस ने भाकपा-माले नेता अर्जुन लाल को रात में ही घर से हिरासत में लिया. देर रात उन्हें छोड़ा गया लेकिन आज उन्हें घर में ही नजरबन्द रखा गया.

पंजाब के बटाला में पुलिस ने सुबह ही स्‍थानीय समाचार पत्रों में इस कार्यक्रम की खबर पढ़ कर वहां के पार्टी कार्यालय पर धावा बोल दिया और माले नेताओं को दिन भर थाने में बिठाये रखा. ऑफिस में पुलिस द्वारा तोड़-फोड़ करने की जानकारी भी आई है.

***यह सब किस जुर्म में हुआ क्योंकि ये लोग ग़रीबों की आवाज़ को उठाने मजबूरी में बाहर आये , और यह सच है की अब CORONA से ज़्यादा खतरा भुकमरी का बना जा रहा है , जिसकी रोज़ ही REPORTS सामने आ रही हैं , परिवार के परिवार खुद कृषि कर रहे हैं , अब मसला यह है की आपकी खबर को क़ानून का उल्लंघन और जनता को सरकार के खिलाफ भड़काने का इलज़ाम लगा दिया जाता है जबकि , इस बात के प्रमाण मौजूद हैं की कई दुनिया के बड़े PROGRAMME धनि लोगों के आदेश पर चल रहे हैं हैं जिनमें HIV AIDS पर हर साल 2000 करोड़ भारत की सरकार पिछले ३० वर्षों से खर्च करती आ रही है , मज़े की बात यह है की HIV यानी HUMAN IMEONODEFICIENCY VIRUS इंसान के अंदर प्रवेश ही नहीं करता बस एक खौफ का पुतला बनाकर करोड़ों डॉलर ग़रीब जनता का लूटा जा रहा ह ै , और सरकारें इसमें एजेंट के तौर से काम कर रही हैं . यह विडंबना है .

दुनिया की बहु संख्यक आबादी यह चाहती है कि हर व्यक्ति इज़्ज़त , शान्ति से अपने परिवार के साथ २ रोटी चैन कि खाये , किन्तु अगर दुनिया में शान्ति होगी चैन होगा और सबको इज़्ज़त कि रोटी मिलने लगेगी तो शैतान या उसके परिवार को कौन घास डालेगा इसलिए शैतानी शक्तियां इस बात कि पूरी कोशिश करती हैं दुनिया में अफरा तफरी , अशांति , ग़रीबी और भुकमरी बानी रहे इसके लिए वो हमेशा से इंसान को अमीर और और ग़रीब में बांटे रखना चाहती है शैतानी शक्ति , ताकि दुनिया कि लज़्ज़तों के मज़े बस वही उठाते रहें और ग़रीब उनके लिए गधा बनकर काम करता रहे .

और इसके लिए वो दुनिया के राजाओं को लालच देकर रखते हैं कि तुम ऐश करो अपनी सत्ता सम्भालो और हम जैसे कहें वैसे करते रहो , आप क्या समझते हो WORLD HEALTH ORGANISATION (WHO) क्या दुनिया के इंसानो कि सेहत को बेहतर बनाने का काम करता है या इंसानो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराता है , हरगिज़ नहीं यह एक धोखा , धोखा इसके प्रमाण मौजूद हैं . और ये दुनिया फिरौनि ताक़तों कि संस्थाएं हैं जिनको वो अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करती रहती हैं , जबसे ये संस्थाएं बानी हैं तभी से दुनिया सैंकड़ों क़िस्म कि बीमारियों में और मुसीबतों में मुब्तला है , तरक़्क़ी और विकास के नाम पर यह सब धोखा है , इस लिए इसको समझो .

मगर इस बात को आप ऐसे ही समझिए जिस तरह आपके इलाक़े में एक मंत्री अपने लाहो लश्कर के साथ आकर किसी बड़ी योजना का ऐलान करे तो आप तुरंत यक़ीन कर लेते हों , क्यों ? क्योंकि उसके पास लाहो लश्कर है वो मंत्री है , बड़ा आदमी है इत्यादि , यदि आपके पास कोई भला नेक आदमी , झब्बू या लल्लू आकर आपको आपके फायदे कि बात बताये आप कहोगे चल बे २ कोड़ी के आदमी अपना मश्वरा और तालीम अपने पास रख .

उस वक़्त आपको यह हरगिज़ याद नहीं आता कि जो नेता जी आपके पास जिस शानो शौकत के साथ साथ आया है ,आप ने ही इसको इस मक़ाम तक पहुँचाया है , वरना कल तक तो आपके ही दर पर हाथ जोड़े खड़ा था न भिकारी कि तरह बस इस बार अवसर दे दो सेवा का , अब वो तो बन गया राजा और आप वही प्रजा के प्रजा , अब ऐसे ही राजा बदलते रहते हैं और आप ऐसे ही सजा नापते रहते हो , आपके सामने बस 2 ही विकल्प होते हैं या तो 100 जूते खालो या 5 किलो प्याज़ खालो बस इसके आगे आपको कुछ नहीं .

100 जूते खालो या 5 किलो प्याज़ की तफसील के लिए ARTICLE के इस लिंक पर जाए और पढ़ें पूरा लेख , LINK : https://timesofpedia.com/category/editorial-articles/

कर्नाटक व आन्ध्र प्रदेश के भी कई इलाकों में अपनी मांगों को थाली बजा कर सुनाया गया.पश्चिम बंगाल में हुगली, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, बर्धवान, नदिया, बांकुरा, सिलीगुड़ी, कोलकाता समेत कई जिलों में यह कार्यक्रम हुआ. असम के कुछ जिलों से यह कार्यक्रम हुआ .

राजस्‍थान के उदयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा, चित्‍तौड़गढ़ आदि जिलों में हजारों गरीबों व आदिवासियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया आउट थाली बजाकर भूक से आज़ादी और ग़रीबी से आज़ादी की बात को रखा , क्या है इसमें बुराई .

**राजधानी दिल्‍ली के कई इलाकों में मजदूरों ने अपनी मांग उठाई. उन्‍होंने पोस्‍टरों पर अपनी मांगे लिख कर अपने घरों के सामने खड़े होगये कई जगह जहाँ घर नहीं थे लोग अपनी फूस की झोपड़ियों के ही बाहर ाँ खड़े हुए और थाली बजाई और इसी लिए नहीं सुनी गए उनकी थाली की आवाज़ क्योंकि वो ग़रीब की थाली थी और वो बालकोनी से या पक्के मकानों की छतों से नहीं बजाए गयी थी बल्कि वो बे घर लोगों की थाली थी .इसी लिए आते हैं धरती पर प्रलय और महा मारियाँ और जिनको लाने वाले होते हैं वो अमीर लोग जो दुनिया के देशों के प्रधान मंत्रियों और राष्ट्रपतियों को खरीद लेते हैं .

उड़ीसा के कोरापुट और रायगढ़ा जिलों से करीब तीन दर्जन ग्रामीण आदिवासी इलाकों से थाली प्रदर्शन की सूचना आई है, भुवनेश्‍वर व अन्‍य स्‍थानों पर कार्यकर्ता अनशन में बैठे.

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, वाराणसी, मिर्जापुर, पीलीभीत, रायबरेली, खीरी, चंदौली, आजमगढ़, देवरिया, गोरखपुर, बलिया और लखनऊ समेत कई जिलों में गरीबों ने घर के आगे आ कर अपनी मांगों को थाली बजा कर सुनाया. पार्टी आह्वान पर माले के उत्तर प्रदेश कार्यालय समेत जिला कार्यालयों में भी उपवास रखा गया.

***ग्रामीण इलाकों में घरों के दरवाजे तक आकर महिलाओं-पुरुषों व बच्चों ने थालियां बजाईं और नारे भी लगाए। इन नारों में भोजन और राशन की मांग की गयी.आखिर इन मज़दूरों और ग़रीबों को LOCDOWN के चलते घरों से बाहर क्यों आना पड़ा जबकि उनको पता है की सरकारी आदेश के अवहेलना पर सजा है किन्तु बाहर निकलना उनकी मजबूरी थी , पेट की भूक तो बाहर लाएगी जेल लेजाओ वहां खिलाओ पेट को तो चाहिए , और दरअसल ग़रीब का पेट ही उसको बाहर लाता है और अमीरों का पेट ही बाहर आता है , जिसको अंदर करने के लिए वो घंटों JIM में पैसे देकर अमीरों की म्हणत कराता है . क्या अजीब निज़ाम है क़ुदरत का ग़रीब मेहनत के पैसे लेकर पेट को भरता है जबकि अमीर पैसे देकर JIM में मेहनत करके पेट को अंदर लेजाता है वाह रे क़ुदरत तेरी शान निराली है . ग़रीब खाना को हासिल करने के लिए दौड़ता है जबकि अमीर खाने को पछाडने लिए दौड़ लगाता है .

राजधानी लखनऊ के मुंशीखेड़ा, मड़ियांव, स्कूटर्स इंडिया के निकट रानीपुर गांव, राजाजीपुरम व गोमती नगर की कुछ मजदूर बस्तियों में थालियां पीटी गयीं. लखनऊ के अलावा, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, भदोही, बलिया, देवरिया, महराजगंज, गोरखपुर, बस्ती, इलाहाबाद, लखीमपुर खीरी, जालौन, अमरोहा, मुरादाबाद, पीलीभीत, रायबरेली आदि जिलों में भी कार्यक्रम हुए.

उत्‍तराखण्‍ड

उत्‍तराखण्‍ड में पार्टी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने ‘भूख के विरुद्ध भोजन के लिए’ आज 12 अप्रैल को अपनी अपनी जगह पर रहते हुए 12 घंटे का “एकदिवसीय अनशन” (सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक) किया . अपने-अपने स्थानों पर लॉकडाउन का पालन करते हुए भाकपा (माले) राज्य सचिव कामरेड राजा बहुगुणा, बहादुर सिंह जंगी, अम्बेडकर मिशन के अध्यक्ष जी आर टम्टा, पीपुल्स फोरम के संयोजक जयकृत कंडवाल, भार्गव चंदोला, विजय शंकर शुक्ला, दीपेंद्र कोहली, इन्द्रेश मैखुरी, के के बोरा, आनन्द सिंह नेगी, के पी चंदोला, गोविंद कफलिया, राजेन्द्र जोशी, ललित मटियाली, मदन मोहन चमोली, डॉ कैलाश पाण्डेय, गणेश दत्त पाठक, बचन सिंह, उमरदीन, आलमगीर, मोहम्मद यामीन, गुलाम रसूल, कमल जोशी, राधा देवी, हरीश धामी, चार्वाक, उत्तम दास, रामकरण पासवान, राजेन्द्र सिंह बिष्ट, नमिता सरकार आदि के साथ ही तिलपुरी, पीपलपड़ाव, ढिमरी, भूड़ा, चोया, चोरगलिया, रैला, रैखाल, हँसपुर, जौलासाल, बगुआताल, बिन्दुखत्ता, हल्दूजद्दा, नहर, हथगाड, कलेगा, तपसानाला, नब्बे फिट आदि खत्तों के किसानों,अन्य लोगों व छात्र युवाओं ने बड़ी संख्या में अपनी भागीदारी करते हुए अनशन किया.

बिहार में काफी बड़ी संख्या में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ जुटे लोग भुकमरी के खिलाफ

बिहार में राशन की मांग पर माले के आह्वान पर हजारों गांवों में थाली बजी. सभी जिलों में गांव व शहर के गरीब घरों के बाहर आये और थाली बजाने के साथ पोस्टरों आदि के माध्यम से अपनी बात कही. दलित – गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों व कामकाजी हिस्से ने इसके कार्यक्रम के माध्यम से अपनी बात कही. राजधानी पटना के कई इलाकों में यह प्रभावी रूप में दिखा. इसके जरिए केंद्र व पटना की सरकारों से महज भाषण देने की बजाए तत्काल राशन उपलब्ध कराने की मांग की. थाली पीटने के साथ-साथ माले नेताओं ने एकदिवसीय उपवास का भी कार्यक्रम आयोजित किया.

सुबह से ही भाकपा-माले राज्य कार्यालय में राज्य सचिव कुणाल, ऐपवा की बिहार अध्यक्ष सरोज चौबे और अन्य नेतागण एकदिवसीय अनशन पर बैठे. खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के कार्यालय में भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा और ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव ने अनशन किया.

वरिष्ठ माले नेता व अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, केडी यादव, मीना तिवारी, आर एन ठाकुर, पटना जिला कार्यालय में अमर, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार आदि नेताओं ने भी अपनी-अपनी जगहों पर एकदिवसीय उपवास के जरिए केंद्र सरकार से गरीबों के लिए राशन उपलब्ध करवाने की मांग की.

अन्य जिलों में भी पार्टी के नेताओं ने उपवास पर रह जनता के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया. भोजपुर, अरवल, सिवान, जहानबाद, गया, मुजफ्फरपुर, नवादा, नालंदा, दरभंगा, गोपालगंज, रोहतास, मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया, भागलपुर, समस्तीपुर, खगडि़या आदि तमाम जिला मुख्यालयों पर अपने कार्यालयों में माले नेताओं ने एकदिवसीय अनशन किया.

भोजपुर में विधायक सुदामा प्रसाद, इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज मंजिल, जिला माले सचिव जवाहर लाल सिंह, राजू यादव; सिवान में विधायक सत्यदेव राम, नईमुद्दीन अंसारी, अमरनाथ यादव; अरवल में महानंद; गया में निरंजन कुमार, दरभंगा में वैद्यनाथ यादव, मुजफ्फरपुर में कृष्णमोहन, मसौढ़ी में गोपाल रविदास, रोहतास में पूर्व विधायक अरूण सिंह, कटिहार में महबूब आलम आदि नेताओं ने उपवास कार्यक्रम का नेतृत्व किया.

दोपहर 2 बजे एक साथ पूरे राज्य में माले के थाली बजाओ आह्वान को लागू करते हुए गरीबों व दिहाड़ी मजदूरों ने थाली पीटना आरंभ किया. राजधानी पटना के कई इलाकों में गरीबों ने थाली बजाकर केंद्र व राज्य सरकार को आगाह किया कि वे बिना किसी भेदभाव के सब के लिए राशन का प्रबंध करें.

पटना के दीघा के हरिपुर कॉलोनी, ऐक्टू से संबद्ध बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन कार्यालय अशोक नगर, कंकड़बाग, आशियाना के भोला पासवान शास्त्री नगर, कंकड़बाग के आरएमएस कॉलनी, कंकड़बाग के हरिजन टोली – चांगर हरिजन टोली, अशोक नगर रोड नंबर 11 मजदूर अड्डा, कंकड़बाग रेनबो फील्ड झुग्गी झोपड़ी, रामकृष्णनगर के भूपतिपुर मांझी टोला व इंडियन गैस गोदाम के पास निर्माण मजदूरों के बीच, पूरबी लोहानीपुर खाद पर, पटना नगर के रूकनपुरा, चितकोहरा आदि स्थानों पर सैंकड़ों की संख्या में शहरी गरीबों ने थाली पीटने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

इन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से रणविजय कुमार, पन्नालाल, श्याम प्रसाद साव, रविन्द्र प्रसाद चंद्रवंशी, अशोक कुमार, अंबिका प्रसाद, योगेन्द्र प्रसाद, उमेश शर्मा, अरविंद प्रसाद चंद्रवंशी, संतोष पासवान, जगेसर मांझी व नगेसर मांझी, बबीता देवी आदि शामिल हुए व कार्यक्रम आयोजित किए. चितकोहरा में आयोजित कार्यक्रत का नेतृत्व मुर्तजा अली, आबिदा खातून, आइसा नेता आकाश कश्यप आदि नेताओं ने किया.

भोजपुर के तरारी में सारा मुसहर टोली, कुसूमी, जेठवार, सेंदहा मसोढ़ी, पनवारी, बरही आदि गांवों में सैंकड़ों की संख्या में गरीबों ने थाली बजाने का काम किया. इस जिले के भोजपुर आरा बहिरो झोपड़पट्टी, अगिआंव व पीरो बाजार, कोइलवर, पीरो के लहठान, बालबांध, बचरी आदि सैंकड़ों गांवों में गरीबों ने थाली पीटने का कार्यक्रम आयोजित किया.

पटना ग्रामीण के धनरूआ, मसोढ़ी, फुलवारी, फतुहा आदि प्रखंडों के सैंकड़ों गांव इस ऐतिहासिक आंदोलन के गवाह बने. दरभंगा में भाकपा-माले के आह्वान के समर्थन में इंसाफ मंच के कार्यकर्ता भी उतरे. इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष नेयाज अहमद के नेतृत्व में कई इलाकों मे थाली पीटने के कार्यक्रम को लागू किया गया.

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