बिसाहड़ा प्रकरण सपा और भाजपा की मिलीभगत व सांप्रदायिक धु्रवीकरण की राजनिति की एसडीपीआई ने की निंदा

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नई दिल्ली/ सोशल डेमोक्रटिक पार्टी आॅफ इंडिया (SDPI) , सितंबर 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में कथित गौमांस रखने के मामले में मौहम्मद अखलाक़ की निर्मम हत्या तथा उनके बेटे को बुरी तरह घायल करने तथा महिलाओं को पीटने केे मामले में साज़िश को सांप्रदायिक तत्वों द्वारा एक नया रूख देकर जनता को भड़काने के प्रकरण को गंभीरता से लेती है।

गौरतलब है कि राज्य की समाजवादी सरकार ने पूर्वनियोजित दंगा कराने, सम्पत्ति को आग लगाने और साजिश करने वाले दोषियों के खि़लाफ़ तुरंत कारवाही करने के बजाय सारा ध्यान इस तरफ मोड़ दिया कि अख़लाक़ के घर से पाया जाने वाला मांस, गाय का था या किसी अन्य जानवर का? यह पूरा मामला एक बेहद खतरनाक साज़िश के तहत अंजाम दिया गया था। क्योंकि सपष्ट कि यदि गौमांस किसी के घर में खाने के लिए रखा मिलता भी है तो क़ानून का कोई प्रावधान मुकदमा चलाने के लिए लागू नहीं होता। लेकिन राज्य सरकार उस वक्त दंगाईयों के खिलाफ कार्रवाही करने और हालात को क़ाबू करने में नाकाम साबित हुई।
28 सितंबर 2015 की वो घटना जिसमें एक पूर्व नियोजित भीड़ ने मौहम्मद अखलाक़ की निर्मम हत्या कर दी थी और बाद में भाजपा नेता संजय राणा के बैटे सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की जांच को भ्रमित करने के लिए मथुरा फोरेंसिक लैब की अक्तूबर 2015 में दी गई रिपोर्ट को राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक घुव्रीकरण कर फायदा हासिल करने के मद्देनज़र मुद्दा बनाया जा रहा है।

जिसमें यह बात नज़र आती है कि राज्य की सपा व केंद्र की भाजपा सरकार दानों मिलिभगत कर समाज के बटवारे की राजनीति कर रही हैं। यह बात भी गौरतलब है कि जिस कथित मांस को लेकर दौबारा यह हंगामा खड़ा किया जा रहा है वह अखलाक़ घर से नहीं बल्कि घर के बाहर से प्राप्त किया गया था। इस मामले में प्रशासन संशय बनाए हुए है लेकिन सरकार ने इस मामले में अपना कोई पक्ष साफ नहीं किया है।
यह बात भी काफी गंभीर है कि इस मामले से भाजपा तथा इसके नेता आंतक का माहोल पैदा करके बेतुके ढंग से तूल देकर सांप्रदायिकता को बढ़ावा देना चाहते हैं। यह बेहद चिंता की बात है कि क्षेत्र में धारा 144 लागू होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन मंदिर परिसर में महापंचायत को रोकने में और ज्ञापन सौंपे जाने के कार्यक्रम को रोकने में नाकाम रहा। मुज़फ़्फ़रनगर और शामली की भयानक घटनाओं से कोई सबक न लेते हुए महापंचायत को रोकने में प्रशासन की नाकामी और इस संबध में भड़काउ भाषण देने वालों के खिलाफ़ अभी तक कोई कार्रवाही नहीं की गई है और ना ही सांप्रदायिक हिंसा, बेगुनाह लोगों को मारना-पीटना और आतंक का माहौल पैदा करने के लिए वीएचपी, बजरंग दल, राष्ट्रवादी प्रताप सेना, समाधान सेना आदि द्वारा मुस्लिम व दलित विरोधी गतिविधियों में संलिप्ता और संगठित हिंसा को बढ़ाने के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया है।
SDPI इस मामले में राज्य सरकार से पुरज़ोर मांग करती है कि दादरी के बिसाहड़ा और आसपास के क्षेत्रों में अशांति के फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कारवाही करे। साथ ही राज्य सरकार के सुस्त भ्रमित रवैये को छोड़कर इस मामले में साफ तौर पर अपना पक्ष रखना चाहिए। ैक्च्प् चेतावनी देती है कि यदि असमाजिक तत्वों को समय रहते क़ाबू नहीं किया गया तो भाजपा और समाजवादी पार्टी की मिलीभगत को जनआंदोलन के ज़रिए उजागर करने से भी पार्टी पीछे नहीं रहेगी।

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