मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव संसद से खारिज

मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव संसद से खारिज, 193 सांसदों ने किए थे साइन

संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए जो महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था वो भी खारिज हो गया है. यह प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किया गया था. कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे जिसमें 63 राज्यसभा सदस्य भी शामिल थे. इस प्रस्ताव का उद्देश्य CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना था.

राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए 63 राज्यसभा सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. यह फैसला Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत लिया गया है.

महाभियोग प्रस्ताव पर यह नोटिस 12 मार्च 2026 को राज्यसभा सभापति को सौंपा गया था. यह देश की आजादी के बाद किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में पहला ऐसा प्रयास था.

नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ Chief Election Commissioner और दुसरे Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 व Judges (Inquiry) Act, 1968 के प्रावधानों के तहत दिया गया था. विपक्षी सांसदों ने इसमें ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण रवैय्ये , मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (SIR) में अनियमितताएं और अन्य आरोप लगाए थे.

सभापति ने नोटिस और इससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के बाद इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है. इससे महाभियोग की प्रक्रिया रुक गई है.

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सात आरोप लगाए हैं. इनमें ‘पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण’, ‘सिद्ध कदाचार’, ‘चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना’ और ‘बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करना’ जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.

विपक्ष ने विशेष रूप से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तरीके पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण कई मतदाता अपने अधिकार से वंचित रह गए.

आरोपों में यह भी कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में काम करते हुए पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया. सूत्रों के अनुसार, इन दावों के समर्थन में विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया है.

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