बीडीसी बैठक में गूंजा समस्याओं का मुद्दा, आश्वासन पर भड़के प्रधान

पौड़ी गढ़वाल, 24 सितंबर ।विकासखंड मुख्यालय में गुरुवार को क्षेत्र पंचायत पौड़ी की बीडीसी बैठक ब्लॉक प्रमुख अस्मिता नेगी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों ने अपने-अपने क्षेत्रों की सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठाईं।

बैठक के दौरान पिछली बीडीसी बैठकों में उठाई गई समस्याओं का अब तक समाधान नहीं होने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि बैठकों में समस्याएं रखने के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से समाधान का आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन धरातल पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

समस्याओं के समाधान में हो रही देरी से नाराज ग्राम प्रधानों ने अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जताई। प्रधानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से कई सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में पेयजल आपूर्ति की समस्या बनी हुई है, जबकि बिजली, सिंचाई और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़े मामलों का भी समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

प्रधानों का कहना था कि बीडीसी बैठक केवल समस्याएं दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पिछली बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर विभागवार कार्रवाई की जानकारी भी सदस्यों को दी जानी चाहिए।

ग्राम प्रधान कलम रावत, शंकर नौटियाल और शैलेंद्र नौटियाल आदि ने कहा कि उन्होंने पिछली बैठकों में अपने क्षेत्रों की क्षतिग्रस्त सड़कों समेत कई समस्याएं अधिकारियों के सामने रखी थीं। संबंधित विभागों की ओर से जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी बैठकों में आश्वासन देने के बजाय मौके पर जाकर समस्याओं का निरीक्षण करें और उनके समाधान के लिए समयसीमा तय करें।

प्रधानों ने कहा कि गांवों की समस्याओं का सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। खराब सड़कों के कारण आवागमन प्रभावित है, वहीं पेयजल और सिंचाई की समस्याओं से ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने अधिकारियों से पूर्व की बीडीसी बैठकों में पारित प्रस्तावों और उठाई गई समस्याओं की समीक्षा कर लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भविष्य की बैठकों में भी समस्याओं के समाधान के नाम पर केवल आश्वासन दिए गए और धरातल पर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्राम प्रधान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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