राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े मंज़ूर, CEO नियुक्त करने की तैयारी

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए गए। यह फैसला मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित गबन और सुरक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच के बीच लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

पिछले दिनों राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रहा है। प्रारंभिक जांच में दान की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में कई गंभीर कमियां सामने आने की बात कही गई। इसी के बाद ट्रस्ट के भीतर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

ट्रस्ट की बैठक में क्या निर्णय हुए?

बैठक में ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए। साथ ही, सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा ट्रस्ट ने पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाएगी, जो उपयुक्त नामों की सिफारिश करेगी।

ट्रस्ट ने क्या कहा?

ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि है और जांच पूरी होने तक सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

दान को लेकर ट्रस्ट का दावा

विवाद के बीच ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थापना के बाद से उसे लगभग ₹3,264 करोड़ का दान प्राप्त हुआ है, जिसमें से ₹2,370 करोड़ मंदिर निर्माण और संबंधित धार्मिक कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। ट्रस्ट का कहना है कि सोना-चांदी सहित मूल्यवान चढ़ावे सुरक्षित हैं और उनका विधिवत रिकॉर्ड रखा गया है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई है कि जांच के बाद मंदिर प्रशासन और अधिक पारदर्शी बनेगा।

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