क्या बिहार का संकट ख़त्म या …..

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Ali Aadil Khan , Editor’s Desk

पिछले दिनों बिहार का सियासी दरजये हरारत (Temprature) दुसरे states के मुक़ाबले काफी बुलंद था और है . हालांकि आसाम और पश्चिम बंगाल में congress की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में जुट रही भीड़ और राहुल को मिलता अपार समर्थन सत्तापक्ष के लिए चिंता का विषय तो रहेगा . आसाम और बंगाल के मुख्यमंत्री न्याय यात्रा से घबरा गए हैं .INDIA गठबंधन में रहने के बावजूद बिहार और बंगाल के CM न्याय के नाम पर निकाली जा रही यात्रा का ही विरोध करने लगे हैं . बिहार में न्याय यात्रा का समर्थन का वादा कर चुके नितीश अपने वादों से हमेशा की तरह पलट गए हैं .

हालिया बिहार संकट का आरम्भ

23 जनवरी को बीजेपी की केंद्र सरकार द्वारा बिहार के जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न के ऐलान के बाद बिहार राज्य की सियासत में अचानक उफान आगया है . 25 जनवरी से राज्ये का सियासी पारा इंतहाई गरम होगया . बता दें की सबसे पहले कांग्रेस कार्यकाल में नितीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर का नाम भारत रत्न के लिए पेश किया था .. ……

अहम् बात यह है कि बिहार के 3 मुख्य नेता लालू यादव , राम विलास पासवान और नितीश कुमार कर्पूरी ठाकुर के ही शिष्य रहे हैं . कर्पूरी ठाकुर की सादगी , सच्चाई , कर्तव्यनिष्ठा , गरीब परवरी , उनकी पहचान थी . JDU के सांसद और कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर ने अपने पिता को मरणोपरांत उनकी 100 वीं जयंती की पूर्व संध्या भारत रत्न से सम्मानित किये जाने की घोषणा पर मोदी सर्कार का आभार जताया है .

जदयू ने कर्पूरी ठाकुर के भारत रत्न पर खुशी जताई और अपने लम्बे संघर्ष का इसको हिस्सा बताया . जबकि कांग्रेस ने बिहार के वंचित , पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज के हितों के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन लगाने वाले नेता कर्पूरी ठाकुर को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भारत रत्न से सम्मानित किये जाने के ऐलान को सिर्फ सियासी घेराबंदी बताया . और कहा कि बीजेपी को कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों या समाज से कोई सरोकार नहीं बल्कि बीजेपी को सिर्फ वोट बटोरने और सत्ता पर क़ाबिज़ रहने का लालच है , वो चाहे जहाँ से हो .

इसी दौरान नितीश ने अचानक अपने रिश्ते INDIA गठबंधन से तोड़ लिए . और उनके वयवहार में ऐसी बड़ी तब्दीली किसी बड़े दबाव या भविष्य निकट में किसी लालच का नतीजा नज़र आती है . नितीश कुमार कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे का भी फोन तक नहीं उठा रहे हैं .. INDIA गठबंधन के एक और कद्दावर सहयोगी लालू यादव भी नितीश कुमार को कई बार फ़ोन खड़खड़ा चुके हैं मगर उसपर भी खामोशी है …

ऐसे में उनकी मंशा साफ़ नज़र आरही है की अब नितीश कुमार NDA में जाने का मन बना चुके हैं .३ दिन पहले जब हम यह लेख लिख रहे थे उस वक़्त तक नितीश कुमार ने इस्तीफ़ा नहीं दिया था . और आज पटना की सियासी हालत एकदम विपरीत है .

आज 30 जनवरी को जब में दुबारा अपने लेख को मुकम्मल करने लगा हूँ तब बिहार के पूर्व Deputy CM और RJD अध्यक्ष तेजस्वी यादव से ED के दफ्तर में Land For Job मामले में पूछताछ चल रही है .. जबकि कल यानी 29 जनवरी को लालू यादव से 10 घंटे तक ED ने 50 सवालों के जवाब तलब किये . इस बीच RJD कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय सरकार और बीजेपी के विरूद्ध जमकर नारे बाज़ी करके अपना घोर विरोध और गुस्सा प्रकट किया .

28 जनवरी को रात 11 : 30 बजे टाइम्स ऑफ़ पीडिया podcast के लिए बात चीत में JDU के पूर्व राष्ट्रीय सचिव Adv . इरशाद अहमद , नितीश के अगले दिन के प्लान के बारे में तफ्सील से हमारे श्रोताओं को बता चुके थे . और इरशाद अहमद का कहना था की मैं नितीश कुमार को बहुत अच्छे से जानता हूँ वो किस प्रवर्ति के इंसान हैं .

……. इरशाद अहमद ने बताया कि सियासी महत्वाकांक्षाओं की भी कोई सीमा होती है और नितीश कुमार उन सबसे परे हैं . हालांकि यह भी सच है कि बीजेपी के सभी बड़े नेता नितीश कुमार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त न करने की बातें कर रहे थे . परन्तु महत्वाकांक्षा इधर भी उतनी ही है . सत्ता की चाहत उतनी ही है मगर पल्टूराम नितीश ही कहलाये जा रहे हैं .

क्योंकि यह सत्ता की भीख का कटोरा दुसरे दरवाज़ों पर लिए घूम रहे हैं . देखना यह होगा कि कब तक बिहार और देश की जनता के विश्वास को घात पहुंचाएंगे ये बेज़मीर और महत्वाकांक्षी नेता . और बिहार की जनता कब इनको इसका सबक़ सिखाएगी . हाल तो यह होगया है कि पहले धर्म सत्ता के लिए बेचा जाता था अब कुछ धर्मों के निर्माताओं की ऊँगली पकड़कर राजनितिक मंडी में बेचा जा रहा है .इस अधर्म का क्या संकट झेलना पड़ेगा देश को रब ही जानें .फिलहाल बिहार की बात करें तो यहाँ का सियासी संकट ख़त्म होने जगह और गहरा गया है जिसके नतीजे अगले २ सप्ताह के भीतर देखने को मिल सकते हैं .

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