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किन लोगों ने उठाया Lock down का फ़ायदा , जाने इसका राज़

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गरीबों की सेवा में लगे लोग


काम आ ख़ल्क़े खुदा के,खुदा के नज़दीक
इससे बेहतर हुई है न इबादत होगी

दुनिया में जहाँ एक ओर इंसानो की मजबूरी से फायदा उठाने का चलन रहा है , और कुछ लोग इंसानों पर पड़ने वाली मुसीबत का इंतज़ार करते हैं जैसे भूका गिद्ध , जो इंतज़ार करता है रब की मख्लूक़ के प्राण पखेरू होजाने का ताकि वो अपना शिकार उसको बना सके .

लेकिन इसी दुनिया में बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो किसी पर मुसीबत पड़ने का इंतज़ार तो नहीं करते लेकिन अगर रब की तरफ से इंसानो पर कोई मुसीबत जैसे महामारी इत्यादि आजाये तो वो फ़ौरन अपने को इंसानियत की सेवा के लिए पेश करदेते हैं .

लेकिन सेवा का मैदान हर एक का अलग होता है , होना भी चाहिए , जैसे कुछ लोग खाना बनाने के लिए पैसा देने वाले हैं , तो कुछ खाना बनाए वाले हैं वहीँ कुछ लोग खाना ज़रूरत मंदों तक पहुँचाने वाले हैं , तो कोई इसमें अपनी ट्रांसपोर्ट की सेवा दे रहा है . ऐसे ही किस इलाक़े में कौन लोग और कितने लोग ज़रूरतमंद हैं , और उनकी क्या क्या परेशानियां हैं इसकी मालूमात इकठ्ठा करना और उस मालूमात को उन लोगों तक पहुँचाना जो Needy या मुसीबत ज़दा लोगों की मदद करना चाहते , यह बहुत बड़ा काम है .

Indore Ki Report

‘इंदौर के नॉर्थ तोड़ा क्षेत्र में एक बुजुर्ग हिन्दू महिला द्रोपदी बाई की मृत्यु होने पर क्षेत्र के मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने मज़हब के मसलों से ऊपर जाकर सिर्फ इंसानियत और सद्भाव को बढ़ावा देने की खातिर द्रोपदी के दो बेटों का साथ देकर उनकी शवयात्रा में कंधा दिया और उनके अंतिम संस्कार में मदद की जो आपसी सदभाव व मानवता की मिसाल है .

ऐसा ही एक वाक़या पिछले दिनी बुलंद शहर में भी पेश आया जब मृतक के घर वालों ने किर्या में आने से मन कर दिया तो मोहल्ले के ही मुसलमानो ने उनका आखरी रसूमात अदा करके इंसानियत का सुबूत दिया था .

इस प्रकार सेवा के लिए उनको प्रोत्साहित करना और उनकी होंसला अफ़ज़ाई करना यह मीडिया का काम होना चाहिए जो नहीं हो पा रहा है .यदि ऐसी ही कुछ संस्थाओं या कुछ लोगों की रिपोर्ट्स आपके पास हैं तो आप भी भेज सकते हैं हमारे whatsapp no 8586906885 या timesofpedia @ gmail .com पर , अगर आप अपना नाम गुप्त रखना चाहते हैं तो उसका ख्याल रखा जायेगा और आपके भेजे visuals हम Times Of Pedia (TOP) चैनल पर चला सकते हैं .

तो ऐसे ही तमाम ज़िंदा लोगों की स्टोरीज हम रख रहे हैं आपके सामने पेश हैं ये रिपोर्ट्स .

पूरे देश में कोरोना से जंग को जीतने की कवायद शुरू हो गयी है , कोई खाना बनाकर ज़रूरतमंदों तक पहुंचा रहा है तो कोई दवा , इसी तरह कुछ लोगों ने अपने हुनर को इस्तेमाल करते हुए कॉटन के मास्क बनाकर ही लोगों में फ्री Distribute करने का काम किया है , इसी कड़ी में हमारे सहयोगी झारखण्ड के टाटा जमशेदपुर से भेजी है यह रिपोर्ट .

दूसरी रिपोर्ट्स भी देखें :
टाटा जमशेदपुर से ख़ास रिपोर्ट

आज दिनांक 7/04 /202 0 को पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से झारखंड प्रदेश प्रतिनिधि सह जिला उपाध्यक्ष एवं मांगो क्षेत्र के निगरानी कमेटी के पदस्थापित मौलाना अंसार खान को हयातनगर से खुर्शीद अहमद और रेशमा हक ने मौलाना अंसार खान को जानकारी दी .

इस महामारी में जो एक बात सब जगह यानी पूरे देश में जो Common है वो यह की समाज के मध्यवर्ती तथा निम्नवर्ती वर्ग में लोखड़ौन के बाद काम मिलेगा या नहीं , २ वक़्त की रोटी मिलेगी या नहीं . ज़िंदगी कैसे गुज़रेगी इसका खतरा और खूफ देखा जा रहा . और अभी सरकारें भी इस स्तिथि में नहीं हैं की वर्तमान में भविष्य का कोई वादा करलें .

सच्चाई यह है की वादों का तो पिछले ही जनता का क़र्ज़ा सरकारों पर छडा हुआ है . किन्तु फिर भी जनता को इस बात का आश्वासन तो होसकता है जब तक भी जनता के रोज़गार की गाडी पटरी पर नहीं आ जाती है तब तक सभी सरकारें रोटी , मकान , स्वास्थ्य , शिक्षा , बिजली , पानी तथा EMI में ढील की सुविधा प्रदान करेगी .


दरअसल सरकारों को आज़माने का वक़्त भी एहि होता है जनता तो हमेशा ही आज़माइश में ही रहती ख़ास तौर से मज़दूर और कामगार वर्ग तो कमाता ही बिल चुकाने के लिए है बचत का सवाल ही नहीं होता .

अब यहाँ एक सवाल तमाम देश वासियों से बनता है कि उन्होंने इस lock down से क्या लाभ उठाया , या सिर्फ दिन ो रात मोबाइल चैटिंग messages recieving और forwarding में ही गुज़ारे 21 दिन .और कुछ लोगों का तो profession ही यह है उनके लिए शायद कुछ लाभ का मामला रहा ही किन्तु जो लोग 1 KG चावल में कितने दाने होते हैं या फिर घर के सारे कंघों में कितने कांटे हैं जैसे फ़ुज़ूल कामों में लगे रहे , उन्होंने तो वाक़ई ये दिन गाला दिए .

तो आपने किस तरह गुज़ारे अपने lock down के दिन नीचे दिए comment box में अपना 4 लाइन का टेक्स्ट भेज सकते हैं .

अगर आप मुझसे पूछना चाहते हैं तो में आपको बताऊँ कि din व् रात के २४ घंटे कहाँ निकल गए पता ही नहीं क्योंकि Web Portal और Youtube Channel तथा न्यूज़ पेपर के लिए इतना मटर था कि उसको सलेक्शन रिसर्च में लगभग 18 घंटे गुज़र जा रहे हैं ,उसकी वजह यह कि जो लोग हमारे associates हैं उनके पास घरों पर PC नहीं है , मोबाइल से वो काम नहीं होपाता . इसके बाद 5 वक़्त कि नमाज़ों के साथ अल्हम्दुलिल्लाह इस बार तहज्जुद का भी मौक़ा मिल गया , और क़ुरान भी पढ़ने के लिए इसी में से वक़्त निकला .

क़ुरआन को मायनों से पढ़ने इस बार इसलिए और भी ज़रूरी होगया था कि लोग अलग अलग तरह के सवालात कर रहे थे , कुछ हदीसों के REffrences देखने होते थे ETC . और इन सब से भी ज़्यादा बड़ा काम जो पहली ही बार करना पड़ा वो यह कि Lock डाउन कि वजह से सभी Maids कि छुट्टी थी बेगम बच्चे नानी के घर जाकर फँस गए थे , फँस गए थे या छुप गए थे , चलें मीडिया हाउस से पूछकर बताऊंगा .

Maids और बेगम वाले काम भी खुद को ही करना पड़ रहे थे क्यों कि किये बिना कोई चारा ही न था होटल्स बंद सब बंद अब आप खुद सोचिये इस सब में वक़्त कहाँ बचना था बल्कि सच कहूं तो वक़्त कम पद गया है .

लेकिन जिन लोगों ने इस फुर्सत को ग़नीमत समझा और अपने मां बाप के साथ रहे उनकी खिदमत की , अगर बच्चों के साथ थे तो उनको morals और नैतिकता की बातें कीं , ज्ञान की बातें कीं , अपने इंसान होने कि ज़िम्मेदारियों को फैमिली के साथ शेयर किया ,अपने बनाने वाले , पालने वाले , खिलाने वाले , हिफाज़त करने वाले के आदेशों और उनपर अमल करने की फ़िक्रों को लिया ,

एक अच्छे इंसान और अच्छे नागरिक बनने कि ठानी .एक इंसान के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास जगाने कि कोशिश की , और फिर सबसे बड़ी बात यह कि इस पर भी ग़ौर किया कि आज जो पूरी दुनिया घरों में क़ैद है वो रब कि सबसे छोटी creation मख्लूक़ का केहर है , अगर आसमानो से पत्थर बरसने लगते या आग बरसने लगती या बादल फटकर गिरने लगते तो तो क्या होता , जैसा की पहली क़ौमों की ना फ़रमानी पर रब की तरफ से अज़ाब आये .

जिन लोगों ने अपने ईमान को बनाने की कोशिश की रब की क़ुरात पर सुकून से बैठकर सोचा , रब की मख्लूक़ की खिदमत में रहे . भूकों को खाने खिलाये बीमारों को दवा का इंतज़ाम किया etc . ये सब लोग हैं जिन्होंने इस lock down का लाभ उठा लिया . अब जिन लोगों ने ग़फ़लत में वक़्त गुज़ार दिया वो और हम सब तौबा करे अपने रब को राज़ी करलें और जो दिन भी ज़िंदगी के आगे मिल रहे हैं उनको अपने रब के हुक्मों और उनके रसूल या दूत मुहम्मद स० अ ० व० के तरीकों के मुताबिक़ गुज़ारने का संकल्प लें .

मुल्क की तरक़्क़ी , अम्न और शांति बनाए रखने में अपनी भागीदारी बढ़ाएं , नफरत और द्वेष से बचें और बचाएं , और सरकार के सहयोगी बने तथा सर्कार से उसकी ग़लतियों पर सवाल भी करें . यह सब अगर हम करेंगे तो वास्तव हमारी यह दुनिया भी स्वर्ग बन जायेगी . अच्छा बन जायेगी की नहीं भाइयो बहनो ?@timesofpedia

कौन लोग आये हैं इंसानियत की खिदमत के लिए मैदान में

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