होर्मुज़ पर घमासान: अमेरिका का हमला, ईरान की चुनौती

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अमेरिका-ईरान टकराव खतरनाक मोड़ पर: अमेरिकी हमले पूरे, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद करने का किया दावा

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ उसकी ताज़ा सैन्य कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि जवाबी कदम उठाते हुए ईरान ने दावा किया है कि उसने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी जहाज़ों के लिए बंद कर दिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, 10 जून को शुरू किए गए सैन्य अभियान के तहत ईरान के कई सैन्य और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि ये हमले “आत्मरक्षा” में और ईरान की लगातार जारी आक्रामक गतिविधियों के जवाब में किए गए।

सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी मरीन कोर, वायु सेना और नौसेना ने सटीक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए ईरान की सैन्य निगरानी प्रणालियों, संचार नेटवर्क और वायु रक्षा ठिकानों पर हमला किया। अमेरिका का दावा है कि ये ठिकाने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज़ों के लिए संभावित खतरा बन चुके थे।

दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो जहाज़ों को निशाना बनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी कहा कि जलडमरूमध्य को “हर प्रकार के समुद्री यातायात के लिए पूरी तरह बंद” कर दिया गया है।

हालांकि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस दावे को चुनौती देते हुए कहा है कि व्यावसायिक जहाज़ अब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सामान्य रूप से आ-जा रहे हैं।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ “कड़े और निर्णायक हमलों” की चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि तेहरान ने समझौते की संभावनाओं को बहुत देर तक टालकर एक बड़ी रणनीतिक भूल की है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरानी नेतृत्व ने बातचीत और समझौते के अवसरों को गंवा दिया है। इसके जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि उनका देश किसी भी दबाव, धमकी या सैन्य कार्रवाई के सामने झुकने वाला नहीं है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसथ ने भी संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी नीति नहीं बदलता तो उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने आगे भी अमेरिकी हमलों के निशाने पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान को समझौते का पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन उसने उसका लाभ नहीं उठाया।

इस बीच फ़ारस की खाड़ी में स्थित ईरान के क़ेशम द्वीप, बंदर अब्बास और सीरिक समेत कई शहरों से विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं और बढ़ गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अप्रैल में हुए नाज़ुक युद्धविराम को लगभग निष्प्रभावी बना सकता है। हाल के दिनों में दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के सैन्य और निगरानी ठिकानों पर हमले किए गए हैं, जिससे संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

तनाव की ताज़ा लहर की शुरुआत उस घटना के बाद हुई जब एक अमेरिकी हेलिकॉप्टर को मार गिराया गया। अमेरिका ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और जवाबी कार्रवाई में कई ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान समर्थित बलों और आईआरजीसी ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

उधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व एक और बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में युद्धविराम अब वास्तविक युद्धविराम कम और सीमित संघर्ष अधिक दिखाई दे रहा है।

गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा, “सीमित संघर्ष कभी भी पूर्ण युद्ध में बदल सकता है। अब और हमले नहीं, अब और बहाने नहीं।”

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