नई दिल्ली, 13 अक्टूबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पाइसजेट की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें कलानिधि मारन और काल एयरवेज के साथ लंबे समय से चल रहे मध्यस्थता विवाद के सिलसिले में भुगतान करने के आदेश वाली रकम जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की गई थी। जस्टिस विनोद कुमार ने मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह की गुड़गांव वाली संपत्ति को सिक्योरिटी के तौर पर स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया क्योंकि स्पाइसजेट न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले के आदेश के मुताबिक 50 करोड़ जमा करने में नाकाम रही थी। मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
न्यायालय ने कहा कि अगर स्पाइसजेट ने 50 करोड़ जमा किए होते तो ये न्यायालय 94 करोड़ की राशि की अनुमति देने के लिए सिक्योरिटी के तौर पर गुड़गांव में प्रॉपर्टी के दस्तावेज जमा करने की याचिका पर विचार कर सकता था। न्यायालय ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता ने अपने वादे के मुताबिक 50 करोड़ जमा नहीं किए हैं इसलिए प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर स्वीकार करने की अर्जी खारिज की जाती है।
न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि 13 जुलाई, 2026 को स्पाइसजेट ने रजिस्ट्री में 45 दिनों के भीतर 50 करोड़ और बाकी बचे 94 करोड़ 90 दिनों के भीतर चुकाने का वादा किया था। न्यायालय ने कहा कि अगर स्पाइसजेट ने 50 करोड़ जमा कर दिए होते तो न्यायालय दूसरी किस्त के लिए नरमी बरतता।
मामला साल 2015 के एक विवाद से जुड़ा है, जब स्पाइसजेट गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही थी और उसके कामकाज बंद होने का खतरा था। कलानिधि मारन और काल एयरवेज एयरलाइन के प्रमोटर और सबसे बड़े शेयरधारक थे, जिनके पास 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। उन्होंने जनवरी, 2015 में स्पाइसजेट के साथ शेयर बिक्री और खरीद समझौता (एसएसपीए) किया था।