गुजरातः बेटी की शादी के लिए नहीं मिले पैसे, नोटबंदी ने ली दलित की जान

राजकोट। नोटबंदी का असर लोगों में ऐसा दिख रहा है कि बैंकों के चक्कर काटते हुए और बैंकों के बाहर लगी लंबी लाइनों में जाने कितने लोगों कि जान चली गई है। नोटबंदी के फैसले को लेकर सरकार ने कई तरह के प्लान भी लोगों को बताए।

 

सरकार के नोटबंदी के फैसले को लेकर शादी वाले घरों में कई तरह कि दिक्कते देखने को मिल रही है। जहां सरकार ने बैंकों से शादी वाले घरों को ढ़ाई लाख रुपए निकालने का निर्देश दे दिया है। वहीं बैंको के पास समय से पहले ही कैश खत्म हो जा रहा है।

 

सरकार के इस फैसले से कई लोगों में रोष पैदा हो चुका है। वहीं 45 साल के दलित व्यक्ति ने नोटबंदी के चलते अपने घर में फांसी लगा ली। बता दें कि महेश सोलंकी की बेटी आरती की शादी 12 दिसंबर को होनी थी।

 

महेश शादी में खर्च होने वाले खर्चों के लिए पैसा न जुटा पाने के कारण अपनी तय तिथि के तीन हफ्ते पहले ही उन्होंने फांसी लगा ली। बता दें कि मंगलवार की सुबह सबसे पहले उनके बेटे अजय ने उन्हें पंखे से लटकता पाया। ऐंबुलेंस बुलाई गई लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

बता दें कि महेश एक लोकल फैक्ट्री में काम करता था। इस मामले पर महेश के बेटे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता शादी के खर्चों को लेकर तनाव में थे और इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली।

 

अजय ने बताया, ‘मेरे पिता ड्राइवर थे लेकिन दिल की बीमारी की वजह से उन्होंने 5 साल पहले ही काम छोड़ दिया। उन्होंने रिश्तेदारों से भी आर्थिक सहायता लेने की कोशिश की लेकिन सभी ने उन्हें पुराने 500 और 1000 के नोटों में रुपये देने की बात की। वह डिप्रेशन में चले गए थे।’

 

महेश की बेटी आरती की शादी सुरेंद्रनगर जिले के जतनपुर गांव के निवासी हेमंत वाघेला से तय हुई थी। अजय ने बताया कि सोमवार की रात पिताजी ने कहा कि वह शादी के लिए पैसा जुटाने जा रहे हैं। वह मंगलवार को जल्दी उठ गए लेकिन कमरे के अंदर गए और वहां खुद को फांसी लगा ली।’

 

इस मामले को लेकर थोरला पुलिस स्टेशन के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर हेमंत व्यास ने बताया कि हमारी प्राथमिक जांच भी यही बताती है कि महेश ने पैसे न जुटा पाने के कारण ही आत्महत्या की है। उसके कुछ रिश्तेदारों ने आर्थिक सहायता देने का वादा किया था लेकिन वह खुद 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद परेशान हैं।

curtesy National dastak

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