दुनिया के ग़रीब मुल्क के बासी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार ,कौन है वो

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अभिजीत को 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार (Nobel prize) की घोषणा

भारतीय मूल के अमेरिकी अभिजीत बनर्जी को 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। इस पर जावेद अख्तर ने भी कुछ ऐसा कहा है,सोशल मीडिया में काफी है इसकी चर्चा और होनी भी चाहिए 

नई दिल्ली: TOP News bureau//अमेरिका में रह रहे भारतीयर मूल के भिजीत बनर्जी को 2019 के लिए अर्थशास्त्र का दुनिया का सबसे सुप्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। अभिजीत बनर्जी को यह इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार फ्रांस की एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया गया है।

अभिजीत बनर्जी को नोबेल पुरस्कार “वैश्विक गरीबी” को कम करने के लिए उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए दिया गया है. अभिजीत बनर्जी मूल रूप से भारत के पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं. उनका जन्म 21 फरवरी 1961 को कोलकाता शहर में हुआ. उनके पिताजी और माता जी दोनों ही अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे. अभिजीत बनर्जी ने अपनी पढ़ाई कोलकाता के साउथ प्वाइंट स्कूल से की.

और प्रेसिडेंसी कॉलेज से उन्होंने इकोनॉमिक्स की डिग्री ली. अभिजीत बनर्जी ने 1981 में कोलकाता यूनिवर्सिटी  से अर्थशास्त्र किया की पढ़ाई की. और 1983 में दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)से एमए(MA)किया. यहाँ भी JNU और कलकत्ता ने ही बाज़ी मार ली , जो लोग JNU के बारे नकारात्मक विचार रखते हैं शायद वो भी इस JNU के विद्यार्थी पर फख्र करने बात ज़रूर करेंगे ।

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इसके बादअभिजीत बनर्जी ने 1988 में  हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से  पीएचडी(P.hd) किया. अभिजीत वर्तमान में एमआईटी  मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं .

आपको बता दें अभिजीत को यह पुरस्कार ‘वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के लिए किए उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए दिया गया है । अभिजीत बनर्जी को मिले इस नोबेल पुरस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड के मशहूर लिरिक्स और स्टोरी राइटर जावेद अख्तर ने भी ट्वीट कर इस पर अपना रिएक्शन दिया है।

जावेद अख्तर ने अभिजीत बनर्जी को 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार (Nobel prize) मिलने पर ट्वीट में लिखा हैः ‘भारतीय अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को दो अन्य अर्थशास्त्रियों के साथ नोबेल प्राइज मिला है। पूरे राष्ट्र को बधाई।

बंगाल! गुरु देव, अमर्त्य सेन के बाद एक बार फिर आपने हमें गर्व करने के लिए एक और नोबेल पुरस्कार विजेता दिया।’ इस तरह जावेद अख्तर का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब पढ़ा जा रहा है।

नोबेल समिति ने सोमवार को जारी एक बयान में तीनों को 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई। बयान के मुताबिक,‘‘इस साल के पुरस्कार विजेताओं का शोध वैश्विक स्तर पर गरीबी से लड़ने में हमारी क्षमता को बेहतर बनाता है। मात्र दो दशक में उनके नये प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण ने विकास अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। विकास अर्थशास्त्र वर्तमान में शोध का एक प्रमुख क्षेत्र है।”

इस पूरी स्टोरी पर मुझे अरशद कमल का यह शेर याद आता है , की :

दरिया उबालके चर्ख़ (आसमान ) को चूमे तो है मगर
साहिल (कनारा )ही तिश्नाकाम (प्यासा )है , यह क्या मज़ाक़ है

जब सुना की भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को वैश्विक स्तर पर गरीबी दूर करने के लिए किए गए कार्यों के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है तो ज़ेहन में तुरंत यह बात आई कि दुनिया से ग़रीबी दूर करने कि योजना बनाकर देने वाले भारतीय मूल के बनर्जी के देश में ग़रीबी का स्तर दुनिया के ग़रीब मुल्कों के टॉप १० में आता है ।

हालाँकि UN कि रिपोर्ट कहती है कि :”दुनिया के निर्धनतम लोगों में सर्वाधिक हिस्सेदारी के साथ भारत गरीबी से संबंधित एक सूची में सबसे ऊपर आया है। हालांकि 1990 से 2010 के बीच दक्षिणपूर्वी एशिया में गरीबी दर में गिरावट आई है। यह बात संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कही गई है।” आजतक के पोर्टल में छपी थी यह खबर

ऐसे में क्या हमारे प्रधान मंत्री जी को कलकत्ता बासी अभिजीत बनर्जी से संपर्क नहीं साधना चाहिए ? आपकी क्या है राय , comment box में ज़रूर दें ।

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