हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल शोएब का हिन्दू दोस्त

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नफ़रत के बीच मोहब्बत का उगता दिया , एक ख़ास रिपोर्ट

मुकेश यादव

देश में जिस नफरत के बीज को बोया जा रहा है उसपर तबाही और विनाश का फल लगेगा , देखते ही देखते नफरत का यह वृक्ष पनपता जा रहा है , मेरे अपने पुराने कई मित्र जो साथ खाने और रहने में विश्वास रखते थे आज उनका रवैया रूखा और द्वेषपूर्ण होगया है , सांप्रदायिक एकता और सद्भाव के लिए पूरे विश्व में पहचान रखने वाला भारत अब नफरत और लिंचिंग के लिए पहचाना जाने लगा है । जो भारत के बुद्धिजीवियों के लिए विचारणीय है ।हर तरफ खौफ , और डर तथा सांप्रदायिक द्वेष देखने को मिल रहा है , मानो नफरत का वायरस तेज़ी से फेल रह हो ।

नफरत पैदा करने वाले लोग और नेता या विचारधारा इंसानियत को बाँट कर कभी खुश नहीं रह सकते और उनकी नस्लों को इस नफरत के कड़वे फल को खाना ही होगा , मगर क्या इन नफरत के सौदागरों के भरोसे हम अपने प्यारे वतन को नफरत की आग में जलने दें या फिर कोई तदबीर करनी होगी हमको ।जी हाँ हमको मिलकर नफ़रत फैलाने वालों के खिलाफ सत्याग्रह और आंदोलन करने ही होंगे ।


देश में अभी भी कुछ ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाते हैं जिससे हिम्मत बनी रहती की अभी इंसानियत और सांप्रदायिक सद्भाव ज़िंदा है , ऐसा ही एक वाक़या उत्तर प्रदेश के कानपूर का सामने आया है ,      हालांकि उत्तर प्रदेश को अब एनकाउंटर प्रदेश कहा जाने लगा है , जहाँ पिछले 2 वर्षों में दर्जनों फ़र्ज़ी एनकाउंटर का समाचार आ रहा है

।इसी कानपूर में शोएब नाम के नौजवान को किसी पुलिस वाले के बेटे की गोली उस समय लग गयी जब शोएब अपने एक हिन्दू दोस्त के साथ कहीं जा रहा था ,और दरअसल शोएब अपने हिन्दू दोस्त को बचाना चाहता था और वो बच भी गया , मगर शोएब ने अपने सीने पर गोली खाए , इसके बाद का क़िस्सा बड़ा अजीब है ।

ये एक फ़ोटो ही काफ़ी है इंसानो के दिलो में नफ़रत पैदा करने वालों के मुँह पे तमाचा मारने के लिए
जहाँ एक हिंदू दोस्त के लिए मुस्लिम दोस्त ने सीने पे गोली खायी.

 

वही वो हिंदू दोस्त अपनी जान की परवाह किए बिना जबकि उस हिंदू दोस्त को पता था की दूसरी गोली उसे भी लग सकती है,
लेकिन फिर भी वो अपनी जान पे खेल के बॉर्डर के एक सिपाही की तरह अपने मुस्लिम दोस्त को होस्पितल ले के भागा,
सही मायने में आज इस फ़ोटो ने बता दिया की दिल से की गयी दोस्ती से बड़ा कुछ नही ।

 

आज भी जल सकते हैं दुनिया में मोहब्बत के चराग़
शर्त बस यह है ,नफ़रत की सियासत छोड़ दें !!!

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