
बीजेपी को अपनी बड़ी fellowship बनाने में 100 साल पुरानी RSS के सहयोग से 80 साल लगे.
कॉक्रोच का इतनी तीव्र गति से उदय किसी बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है. सिर्फ 5 दिन में लगभग 2 करोड़ युवा जुड़ गए CJP से , इसी बीच खबर आ रही है, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) का आधिकारिक एक्स (X/Twitter) अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। अकाउंट बंद होने के बाद पार्टी ने एक नया अकाउंट (‘Cockroach is Back’) बना लिया है। हालांकि, उनका इंस्टाग्राम हैंडल अभी भी सक्रिय है और उस पर करोड़ों में फॉलोअर्स हैं। और ये संख्या लगातार बढ़ रही …
असल में भारत की राजनीति में यह नया phenomenon या घटना है , जहाँ memes, satire और viral culture इतनी तेजी से political discourse को प्रभावित कर रहे हैं कि लोग हर चीज़ में hidden strategy खोजने लगते हैं।
लेकिन बहुत तेज़ आंधी है भाई………. किस किसको लेकर उड़ेगी और किसको ऊंचा उड़ाएगी रब ही जाने ……. लेकिन सच्चाई को परखने के लिए ज़रा ध्यान और एकाग्रता से इस वीडियो को ज़रूर देखें …..
दरअसल “CJP” यानी Cock $$ roach Janta Party अभी एक पारंपरिक राजनीतिक दल कम….. और एक वायरल युवा-आक्रोश आंदोलन ज्यादा दिखाई दे रहा है। इस पार्टी के बनने का पसमंज़र है CJI का एक बयान , 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के कथित ‘कॉकरोच’ वाले बयान के विरोध में इस पार्टी का अभियान शुरू हुआ , इसके बाद सोशल मीडिया पर व्यंग्य मीम्स और अब बेरोज़गारी, महँगाई तथा पूरे सरकारी सिस्टम से नाराज़गी जैसे मुद्दों को इसमें शामिल कर लिया गया है।
Cockroach Janta Party का भविष्य हमको तीन Points पर निर्भर दिखाई देता है :
1 ) क्या यह मीम से मूवमेंट में तब्दील हो पायेगा ? याद रहे किसी भी देश और ख़ास तौर से भारत की राजनीति सिर्फ़ सोशल मीडिया से नहीं चलती। बूथ, संगठन, ज़मीनी कार्यकर्ता और उसका नेतृत्व असली परीक्षा होते हैं।
2) क्या कॉ ## क्रोच जनता पार्टी के पास सिर्फ़ गुस्सा है या ठोस रणनीति भी? CJP से जुड़े युवा बेरोज़गारी, शिक्षा, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक सिस्टम से जुड़े सवाल उठा रहे हैं । बहुत wisely और अक्सर एडुकेटेड behaviour के साथ उठा रहे हैं .
लेकिन अगर यह सिर्फ़ व्यंग्य और सरकार-विरोध तक सीमित रही, तो धीरे-धीरे “इंटरनेट ट्रेंड” बनकर ख़त्म हो सकती , या खत्म की जा सकती है ।
और तीसरा Point है , क्या सत्ता-विरोधी वोट और विपक्ष को CJP अपने साथ जोड़ पाएगी? हालांकि दिलचस्प बात यह है कि CJP सिर्फ़ सत्ता पक्ष के लिए चुनौती नहीं है। यह विपक्ष को भी expose करती नज़र आ रही है। क्योंकि युवा पूछ रहे हैं:
“सिर्फ़ सरकार बदलने से क्या होगा?”
“सिस्टम क्यों नहीं बदलता?”
“हर पार्टी सिर्फ वादों तक ही क्यों सीमित रहती है?” नेता ईमानदारी से अपने फ़र्ज़ को पूरा क्यों नहीं करते हैं ??
यानी CJP anti-establishment mood को दर्शाती है — सिर्फ anti-government mood को नहीं.
इसी बीच कुछ चापलूस और अंधभक्त पत्रकार CJP के करोड़ों Followers कि मंशा में बेईमानी बता रहे हैं , और यह चाटुकार महानुभाव यहीं तक सीमित नहीं रहे हैं बल्कि वो आगे कह रहे हैं कि भारत के युवा मनोरंजन, करतब और बल प्रदर्शन के लिए CJP से जुड़ रहे हैं सुनिए इन महाशय को … सुदीर की video चलेगी
अब यहाँ एक बहुत गंभीर सियासी पहली को समझना ज़रूरी है !!! अगर विपक्षी दल इसे अप्रत्यक्ष समर्थन यानी indirect support देते हैं, तो यह शहरी और पढ़े लिखे युवाओं को मज़ीद विश्वास में ले सकती है । लेकिन इससे CJP की “independence” खतरे में आने कि संभावना भी बढ़ सकती है।
इसी बीच इस Movement को सरकार द्वारा GENZ के मूड को समझने के लिए Mock Drill भी कहा जा रहा है , लेकिन Posts पर जो Comments आ रहे हैं वो युवा वर्ग के सरकार की योजनाओं , Policies और Actions के खिलाफ वर्तमान Governing सिस्टम को बदलने की तरफ इशारा कर रहा है .
इसके बावजूद इस धोखे की दुनिया में कुछ भी गारंटी के साथ नहीं कहा जा सकता!!
राजनीतिक तौर पर हमारा आकलन यह है, Short Term में अगर देखें तो CJP का एक limited टाइम तक सोशल मीडिया पर बहुत शोर सुनाई देगा । Medium Term में देखें तो अगर छात्र, बेरोज़गार युवा और डिजिटल Activist इससे जुड़े रहे तो यह देश का एक प्रभावी दबाव समूह यानी Pressure Group बन सकता है । और Long टर्म में अगर इस पूरे आंदोलन को देखा जाए तो मज़बूत राजनितिक संगठन के रूप में भी उभर सकता है ,,, लेकिन Dedicated , ज़मीनी, निडर, और क्रांतिकारी leadership और वास्तविक चुनावी रणनीति के बिना इसका Future temporary Movement हो सकता है ।
आपको याद दिला दें ,,,,,भारत में पिछले 15 सालों में कई आंदोलन हुए जो सोशल मीडिया पर बहुत बड़े दिखाई दिए, लाखों पोस्ट और ट्रेंड बने, लेकिन समय के साथ उनका प्रभाव कम हो गया या वे बिखर गए। हालांकि कुछ आंदोलनों ने राजनीतिक असर छोड़ा, किसान विरोधी कानून वापस भी कराये, और कुछ सिर्फ़ डिजिटल शोर बनकर रह गए।
मिसाल के तौर पर आप देखें कि ….
1. India Against Corruption (Anna Hazare Movement)
2011 में यह आंदोलन ज़मीनी होने के साथ साथ सोशल मीडिया और टीवी दोनों पर तूफान बन गया था। “जनलोकपाल” की मांग को लेकर देशभर में भारी समर्थन दिखा। इसने सत्ता परिवर्तन किया लेकिन System परिवर्तन नहीं हुआ। हालांकि इसने Aam Aadmi Party जैसी राजनीतिक दल को जन्म दिया, जिसने दिल्ली में सभी पार्टियों का सफ़ाया कर दिया.
2. Shaheen Bagh और Anti-CAA आंदोलन
2019-20 में यह आंदोलन सोशल मीडिया पर वैश्विक चर्चा का विषय बना । लाखों लोग Physicaly इससे जुड़े, लाइव स्ट्रीम, ट्विटर ट्रेंड और अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिला। लेकिन सरकारी कार्रवाई के बाद आंदोलन धीरे-धीरे समाप्त हो गया, जिसमें Manmade Covid महामारी ने सहयोग किया । और CAA जिसको काला क़ानून कहा गया वो वापस न हो सका ।
3. 2015 में गैर-नेट (Non-NET) फेलोशिप को समाप्त करने के सरकारी निर्णय के खिलाफ (Occupy UGC) नामी आंदोलन हुआ एक ऐतिहासिक छात्र आंदोलन बना 。 नई दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी (UGC) कार्यालय के बाहर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देशभर के विश्वविद्यालयों में फैल गया, जो उच्च शिक्षा के अधिकार और वित्तीय सहायता की मांग का प्रतीक भी बन गया। लेकिन संगठित राष्ट्रीय नेतृत्व और लंबी रणनीति के अभाव में यह आंदोलन धीरे-धीरे कमजोर पड़ गया ।
4. 2020–2021 किसान आंदोलन :
यह आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसने बड़ी सफलता हासिल करते हुए सरकार को कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर किया।लेकिन सोशल मीडिया पर जो वैश्विक डिजिटल लहर बनी थी वह बाद में धीमी पड़ गई। आंदोलन की राजनीतिक सहयोग कि दिशा यहाँ भी बिखरती दिखाई दी ।
5. “MeToo India” Movement : 2018 में बड़े ज़ोरों से चला , सोशल मीडिया पर बड़े खुलासे हुए। कई बड़े नामों पर आरोप लगे। और कई पर गाज भी गिरी , लेकिन समय के साथ आंदोलन की तीव्रता कम हो गई और कानूनी परिणाम सीमित रहे।
50 साल पुराने जय पी आंदोलन की बात करें तो यह भी सत्ता परिवर्तन ही कर पाया सिस्टम को यह आंदोलन भी नहीं बदल सका था .
और आज जो Cock ## Roach आंदोलन शुरू हुआ है यह सिस्टम की तब्दीली की मांग कर रहा है, जनविरोधी सरकारी नीति और नीयत दोनों को बदलने की बात कर रहा है. और इसकी ख़ास बात यह है की इसमें हालिया वर्षों में पडोसी देशों के GENZ मूवमेंट से देश का युवा काफी प्रेरित दिखाई देता है. इस मूवमेंट का युवा सियासत को सिर्फ सेवा के ऐनक से देख रहा है और नेताओं की सुविधाओं को लिमिटेड करने और उनकी और उनके करीबियों की सम्पत्तियों पर नज़र रखने की भी बात भी कर रहा है. साथ ही इसका निशाना विपक्षी पार्टियां भी हैं …..
असल में भारत में सोशल मीडिया आंदोलन अक्सर तीन कारणों से कमजोर पड़ते हैं: जैसे डिजिटल भीड़ ज़मीन पर संगठन में नहीं बदलती , नेतृत्व और स्पष्ट अजेंडे का अभाव रहता है , और मीडिया ट्रेंड बदलते ही जन-ध्यान कम हो जाता है और movement धीमा पढ़कर ख़त्म हो जाता है
फिर भी CJP आंदोलन ने एक बात साफ़ कर दी है—देश का युवा वर्ग वर्तमान राजनितिक और लोकतांत्रिक सिस्टम से ऊब चूका है और अब वो जनहित में और राष्ट्रहित में वास्तविक लोकतांत्रिक सिस्टम , यानी actual democratic system को धरातल पर देखना चाहता है …….