श्री परशुराम ज्ञानपीठ के दिव्य प्रतीक का हुआ अनावरण

जयपुर, 06 सितंबर । श्री परशुराम ज्ञानपीठ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर रविवार को ज्ञानपीठ के दिव्य प्रतीक का विधिवत अनावरण किया गया। प्रतीक में भारतीय ज्ञान-परंपरा, अनुसंधान और मानवीय उत्कर्ष की संकल्पना को दृश्य रूप में दर्शाया गया है।

दिव्य प्रतीक का अनावरण ज्ञानपीठ के कार्यकारी अध्यक्ष हरि प्रसाद शर्मा, वीकेके के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बसोतिया, विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विमलेश शर्मा, परमेश्वर शर्मा और नरेंद्र हर्ष ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर विप्र फाउंडेशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं ज्ञानपीठ संचालन समिति के सचिव सतीश शर्मा, राष्ट्रीय सचिव अजय पारीक, राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष पुष्पेंद्र शर्मा, सोशल मीडिया राष्ट्रीय प्रभारी राहुल पांडे, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण अवतार त्रिवेदी, जोन के प्रदेश महामंत्री गजेंद्र ज्ञानपुरिया, सुशील शर्मा पीरनगर, जयपुर शहर अध्यक्ष महेंद्र शर्मा, बसंत शर्मा सहित विप्र फाउंडेशन से जुड़े अनेक पदाधिकारी और ज्ञानपीठ छात्रावास की बालिकाएं मौजूद रहीं।

सतीश शर्मा ने बताया कि दिव्य प्रतीक में खुले ग्रंथ से प्रवाहित होती ज्ञान-रेखाएं निरंतर ज्ञान-सृजन का संदेश देती हैं। वहीं उदीयमान सूर्य की आभा तप, संस्कार, ऊर्जा और अनंत संभावनाओं का प्रतीक है। प्रतीक में दर्शाया गया ज्ञान-चक्षु जाग्रत चेतना, अंतर्दृष्टि और विवेक का बोध कराता है। यह जिज्ञासा से ज्ञान, ज्ञान से विवेक और विवेक से प्रज्ञा की आरोहण यात्रा को दर्शाता है।

प्रतीक चिन्ह पर अंकित “तेजस्वि नावधीतमस्तु” का भाव है कि हमारा अध्ययन किया हुआ ज्ञान तेजस्वी और दीप्तिमान हो। यही श्री परशुराम ज्ञानपीठ का मूल संकल्प है।

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