अदालत ने दिया डाबरी कर्बला स्थित कब्रों की सुरक्षा का आदेश

प्रेस विज्ञप्ति

अदालत ने डाबरी कर्बला स्थित कब्रों की सुरक्षा का आदेश दिया, आवाम में राहत की लहर

अधिवक्ता रईस अहमद, शिव कुमार चौहान और उनकी टीम ने कोर्ट से त्वरित सुनवाई की प्रार्थना कर बहस की और अंतरिम आदेश प्राप्त किया

नई दिल्ली — डाबरी स्थित ऐतिहासिक मुस्लिम कब्रिस्तान और कर्बला भूमि (खसरा संख्या 27/19, पॉकेट 20-डी, द्वारका) के संबंध में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, दिल्ली की माननीय द्वारका कोर्ट ने कब्रों की सुरक्षा के लिए अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली वक्फ बोर्ड को भूमि के स्वामित्व और सीमांकन (Demarcation) से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि इस मामले में अदालत ने 2 सितंबर 2026 को याचिका स्वीकार करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए थे। हालांकि, नोटिस जारी होने के बाद स्थानीय निवासियों का आरोप है कि डीडीए ने निर्माण कार्य पूरा किए बिना ही कर्बला की जमीन पर आनन-फानन में एक गेट स्थापित कर दिया और निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया।

गेट लगाए जाने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। आक्रोशित निवासियों ने कब्रिस्तान व कर्बला स्थल पर एकत्र होकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए वादी पक्ष के वकील तुरंत अदालत पहुंचे, लेकिन उस दिन सेकेंड हाफ में न्यायाधीश महोदया उपलब्ध नहीं थीं।

इसके बाद, अधिवक्ता शिव कुमार चौहान, अधिवक्ता रईस अहमद और अधिवक्ता असलम अहमद (एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट) अपनी कानूनी टीम (अधिवक्ता जयंत तिवारी और शीला कौशिक) के साथ 5 सितंबर 2026 को पुनः माननीय अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और मामले की अत्यधिक तात्कालिकता को देखते हुए त्वरित सुनवाई (Early Hearing) की प्रार्थना की।

अदालत ने दिया डाबरी कर्बला स्थित कब्रों की सुरक्षा का आदेश

माननीय अदालत ने मामले की तात्कालिकता और गंभीरता को समझते हुए आवेदन स्वीकार किया और मामले की सुनवाई की। याचिका में अनधिकृत हस्तक्षेप, मलबा फेंकने, भारी वाहनों की पार्किंग, और पवित्र स्थल पर मौजूद कब्रों व पुराने ट्यूबवेल को नुकसान पहुंचाने वाली खुदाई व निर्माण गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई गई थी।

सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश डॉ. नूपुर गुप्ता ने 2019 के दिल्ली वक्फ बोर्ड के पत्र के तहत वादी समिति द्वारा प्रबंधित मान्यता प्राप्त कब्रिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार किया। यह स्वीकार करते हुए कि कब्रों को नुकसान पहुँचाने या हटाने से अपूरणीय क्षति होगी, अदालत ने सीमित अंतरिम राहत प्रदान करते हुए मौजूदा कब्रों पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का सख्त आदेश जारी किया।

अदालत ने डीडीए, दिल्ली वक्फ बोर्ड, एमसीडी और स्थानीय पुलिस सहित सभी नामित प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे खसरा संख्या 27/19, ग्राम डाबरी में स्थित किसी भी मौजूदा कब्र की खुदाई न करें, उन्हें न हटाएं, न कोई नुकसान पहुंचाएं और न ही किसी तरह की बाधा डालें, तथा अगली सुनवाई तक स्थिति को यथावत बनाए रखें।

माननीय अदालत ने सभी पक्षों को अपना जवाब और सरकारी रिकॉर्ड दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 17 सितंबर 2026 तय की है।

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