6 करोड़ बचाये जा सकते हैं हर साल अगर यह करलिया जाए

कोटा में सामूहिक निकाह का आयोजन,90 लाख रूपये की बचत का दावा

10 जोड़ों ने ली एक दुसरे के साथ जीने मरने की शपथ ,4000 लोग शरीक हुए दावत में ,दूल्हा दुल्हन को नवाज़ा दुआओं से

कोटा:03 /11 /19 :कोटा राजस्थान यूँ तो education hub के लिए देश भर में जाना जाता है,जिसके चलते लगभग साढ़े तीन लाख दुसरे राज्यों के students कोचिंग ले रहे हैं , मेडिकल और इंजीनियरिंग के रिजल्ट्स भी काफी अच्छे रहे हैं , साथ ही कोटा शहर कोटा स्टोन के लिए भी काफी प्रसिद्द है .

हालिया कुछ वर्षों में शहर के कुछ समझदार लोगों ने शादियों पर होने वाले बे जा खर्च का अंदाजा लगाया तो पता चला यदि शादियों पर होने वाले खर्च को ख़तम कर दिया जाए तो एक साल में औसतन 300 निकाह होते हैं यदि 2 लाख रुपया एक निकाह पर बचाया गया तो 300 निकाह पर 6 करोड़ रुपया बचाया जा सकता है .

इस प्रकार 5 वर्षों में बचाये गए 30 करोड़ रूपये से एक यूनिवर्सिटी के लिए ज़मीन खरीदी जा सकती है .और अगले 3 वर्षों में बचाये गए पैसों से भवन निर्माण का काम आसानी से होसकता है . जो क़ौम पिछले 70 वर्षों से शादियों पर बे हिसाब खर्च कर रही है आज उसकी वर्तमान नस्ल highly qualified होती और देश का एसेट बनती देश की तरक़्क़ी में उसका बड़ा योगदान होता किन्तु आज liability बानी हुई है .

कोटा के सामूहिक निकाह में शहर क़ाज़ी के भाषण के मुख्य अंश

सामूहिक निकाह में मौजूद 10 जोड़ों का निकाह पढ़ाने के बाद हज़ारों उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए शहर क़ाज़ी अनवार अहमद साहब ने कहा की निकाह इंसानी ज़रूरत का सामान है जिसपर खर्च करना मूर्खता है , उन्होंने निकाह को समाज में फैलने वाली बुराइयों से बचने का बेहतरीन ज़रिया बताया .उन्होंने कहा निकाह के बाद परिवार में सामंजस्य बनाने के लिए ज़रूरी है कि लड़का लड़की दोनों ही एक दुसरे के अधिकारों का ख्याल रखें साथ ही परिवारों के साथ भी अच्छा बर्ताव करें तो जीवन सुखमय रहेगा .

क़ाज़ी अनवार अहमद ने कहा कि हमको चाहिए कि हम बहैसियत मुसलमान तमाम इंसानो के हुक़ूक़ और जज़्बात का ख्याल रखें और उनके साथ सहष्णुता और सहनशीलता बनाये रखें तो समाज में सामंजस्य बनेगा जिससे सद्भाव आएगा और समाज और देश विकसित होगा .

क़ाज़ी साहब ने आगे कहा इस्लाम किसी एक क़ौम का नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए ज़ाब्ता ए हयात है.क़ाज़ी साहब ने अम्न ओ इंसानियत को बढ़ावा देने पर तरजीह दी और कहा जो लोग रब से डरने वाले हैं वही ज़मीन पर आफ़ियत और अम्न से रहेंगे और मरने के बाद हमेशा के ऐश में रहेंगे .

इस सामूहिक निकाह सम्मलेन कि एक ख़ास बात यह रही की इसमें एक कश्मीरी दूल्हा भी आया राजस्थान की दुल्हन लेने , जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जो सबसे पहला कश्मीर वादी और राजस्थान के बीच रिश्तों के जुड़ने का वाक़या सामने आया वो कोटा शहर के इसी सामूहिक विवाह सम्मलेन का ही है .कश्मीर से आया दूल्हा का परिवार इस सामूहिक निकाह आयोजन से बेहद खुश था .

और इस प्रकार की प्रथा इन्होने कश्मीर वैली में भी शुरू करने का इरादा ज़ाहिर किया .साथ ही उन्होंने कश्मीर के हालात पर चर्चा करने से मना किया और कहा अभी तो हम निकाह की ख़ुशी में मग्न हैं और फ़िलहाल हम वहां की चर्चा करके अपने मज़े को ख़राब नहीं करना चाहते .इस परिवार ने भले वहां के हालात की चर्चा न की हो किन्तु हमारे प्रधान मंत्री जी तो कहते हैं ,”सब चंगा सी” .मोदी जी के लिए वाक़ई चंगा ही चंगा है , देश के लिए भले अभी अच्छे दिनों का इंतज़ार बाक़ी है .

बहरहाल कश्मीर और राजस्थान के इन रिश्तों के मिलन पर टाइम्स ऑफ़ पीडिया ग्रुप अपनी पूरी टीम की तरफ से मुबारकबाद पेश करता है , और आशा करता है कि कश्मीर कि खुशीओं में देश के बाक़ी सूबे भी हिस्सेदार बनेंगे , लेकिन कश्मीर कि गोरी लड़कियों से शादी का खुआब देखने वाले भले उसकी ताबीर न देख पाए हों किन्तु कश्मीरी दिलवाले ज़रूर राजस्थान की दुल्हनिया को वादी ले गए . .

इस अवसर पर मौजूद आसफिया बरादरी के ज़िम्मेदारों और सरपरस्तों में इंजीनियर ख़लील अहमद ,हाफ़िज़ मुहम्मद मंज़ूर , ऐजाज़ अहमद , मेहफ़ूज़ अली ख़ान ने दूल्हा दुल्हन को अपनी खुसूसी दुआओं से नवाज़ा , आसफ़िया वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुर्रहमान कुरैशी उर्फ़ मुहम्मद उम्र,उपाध्यक्ष असलम आसफ़ी कार्यक्रम का संचालन मुहम्मद काशिफ़ ने किया .

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