कारवां बनता चलेगा खुद ही “हैरत”

Ghazal
सलाम हैरत

ग़ज़ल

 

मंज़िलो की आस रखिये और चलिए।
हौसला बिंदास रखिये और चलिए।।

खामियां भी जानना तो है ज़रूरी।
आइना इक पास रखिये और चलिए।।

ज़िन्दगी दे सकती है धौखा किसी पल।
मौत का एहसास रखिये और चलिए।।

लड़खड़ाते हैं वो जो कमज़ोर होते।
हर क़दम ही खास रखिये और चलिए।।

ज़िन्दगी दे डूबते जो हौसले को।
याद वो इतिहास रखिये और चलिए।।

नफ़रतों से तो उजड़ते हैं गुलिस्ताँ।
दूर ये बू बास रखिये और चलिए।।

ख्वाहिशें नफ्सानी बहकाती बहुत हैं।
खौफ़े रब का पास रखिये और चलिए।।

कारवां बनता चलेगा खुद ही “हैरत”।
दिल में बस इख़्लास रखिये और चलिए।।

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