[]
Home » News » National News » बाबासाहेब के जन्मदिन पर हमें जाति व्यवस्था से मिली आज़ादी
बाबासाहेब के जन्मदिन पर हमें जाति व्यवस्था से मिली आज़ादी

बाबासाहेब के जन्मदिन पर हमें जाति व्यवस्था से मिली आज़ादी

बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद राजा वेमुला ने एक बयान जारी किया है.

”जय भीम

आज से मैं और मेरी मां हमेशा याद रखेंगे कि बाबासाहेब के जन्मदिन पर हमें जाति व्यवस्था से आज़ादी मिली थी.

मेरा भाई चाहता था कि हम गौतम बुद्ध के दिखाए रास्ते पर चलें. पिछले साल नवंबर में जब मेरा भाई अपने सबसे करीबी दोस्त रियाज़ की शादी में शामिल होने आया था तो उसने सफ़ेद कपड़े पहन रखे थे.

अगर मेरा भाई रोहित जिंदा होता तो उसे हमारे आज के फ़ैसले पर गर्व होता. आज से मेरी मां राधिका वेमुला और मैं वैसा जीवन शुरू करने जा रहे हैं जिसका रोहित ने हमेशा सपना देखा था.

वैसा जीवन जैसा बाबासाहेब आंबेडकर चाहते थे कि हम जिएं. बिना अंधविश्वास का जीवन. एक जीवन जिसमें आस्था मानवता के प्रति हो, न कि एक अज्ञात भगवान के प्रति. जीवन जो दूसरे मनुष्यों के लिए करुणा और सम्मान पर आधारित हो. गरिमा और आत्मसम्मान से भरा जीवन. हिंदू जाति व्यवस्था से परे जीवन.

आज से मेरी मां और मैं पूरी तरह मुक्त हैं. शर्मिंदगी से मुक्त, रोज़ के अपमान से मुक्त. उस ईश्वर से मुक्त जिसके नाम पर हमारे लोगों पर सदियों से अत्याचार होते रहे.

जब मेरी मां ने उससे उसके कपड़ों के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो गौतम बुद्ध से बहुत प्रभावित है, इसी वजह से उसने बौद्धों की तरह सफ़ेद कपड़े पहन रखे हैं.

रोहित ने विस्तार से बताया कि 1956 में कैसे बाबासाहेब ने बौद्ध धर्म अपनाया था. उसने हमें इस बात का मतलब समझाया कि बाबासाहेब ने क्यों कहा था कि वे भले ही हिंदू पैदा हुए हों, हिंदू के रूप में नहीं मरना चाहते.

उस वक़्त हमें अपने भाई की बात की अहमियत समझ में नहीं आई, मगर उसकी मौत ने हमारी आंखें खोल दी हैं. मैं एक बहुत ही साधारण आदमी हूं, मैं आपके सामने इसलिए खड़ा हूं क्योंकि मेरे भाई रोहित वेमुला ने बहुत बड़ा बलिदान दिया है.

अब जब मैं आपके सामने हूं, मैं उन लोगों को चेतावनी देना चाहता हूँ जो मेरे भाई की मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं, मैं अपनी अंतिम सांस तक लड़ता रहूंगा. और मैं अकेला नहीं हूं, एक पूरी पीढ़ी और पूरा देश रोहित की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए उठ खड़ा हुआ है.

सब लोग जो मेरे भाई को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, वे मिलकर एक सीधा सवाल पूछ रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति अप्पा राव के बारे में एक शब्द भी क्यों नहीं कहा?

वे मेरे भाई के नाम पर आंसू बहा सकते हैं, लेकिन उसकी मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बारे में एक ठीक-सा बयान क्यों नहीं दे सकते.

हमारी मांग बहुत साधारण है, हम चाहते हैं कि अप्पा राव को पद से हटाया जाए, उनकी गिरफ़्तारी हो. हम चाहते हैं कि तेलंगाना सरकार का विशेष जांच दल रोहित की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करे.

मोदी सरकार ने जो एक सदस्यीय आयोग गठित किया है उसमें हमारा कोई विश्वास नहीं है.

हमें उम्मीद है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रोहित की मौत के सच को जानने की कोशिश में शामिल होंगे. राजनीतिक तौर पर असली ज़िम्मेदार वेंकैया नायडू, स्मृति ईरानी और प्रधानमंत्री ख़ुद हैं.

हम जानते हैं कि ये लड़ाई लंबी और कठिन होगी, लेकिन हम मज़बूत और आशावादी हैं क्योंकि आंबेडकर, बुद्ध और मेरे भाई रोहित की शक्ति हमारे साथ है.

मगर एक सवाल अभी बाक़ी की क्या रोहित वेमुला को मोक्ष और उसके घर वालों को इन्साफ बोध धर्म दिल पाएगा ?

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

14 + 8 =

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Scroll To Top
error

Enjoy our portal? Please spread the word :)