SC से खेड़ा को राहत, लेकिन बिस्वा क्यों झपटे सिंघवी पर?

नई दिल्ली। SC में कानूनी दलीलों की लड़ाई भले ही अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हो, लेकिन राजनीतिक मंच पर टकराव अभी और तेज होता दिख रहा है। एक ओर वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी प्रभावशाली पैरवी के जरिए पवन खेड़ा को राहत दिलाई.

दूसरी ओर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस पूरे मामले को केवल अदालत तक सीमित नहीं रहने दिया। मामला अब एक महिला की गरिमा, कथित फर्जी दस्तावेजों और राजनीतिक नैतिकता की बड़ी बहस में बदलता नजर आ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर मजबूत कानूनी दलीलें पेश कीं, जिसके बाद उन्हें अंतरिम राहत मिली। इसे कानूनी रूप से बड़ी सफलता माना जा रहा है। लेकिन इस राहत के तुरंत बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें खासकर अभिषेक मनु सिंघवी से लोकतंत्र, शालीनता या नैतिकता का पाठ सीखने की आवश्यकता नहीं है।

सीएम सरमा ने स्पष्ट कहा कि असली मुद्दा राजनीति नहीं, बल्कि एक महिला के चरित्र हनन का है। उनका आरोप है कि विदेशी फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक महिला को राष्ट्रीय टेलीविजन पर बदनाम किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि झूठे दस्तावेजों के जरिए चुनावी परिणामों को प्रभावित करने और किसी महिला की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की कोशिश गंभीर अपराध है, जिसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।

हिमंता बिस्वा सरमा ने सिंघवी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे मंच पर बोलना आसान होता है, जहां सामने वाला जवाब देने के लिए मौजूद न हो। उनके अनुसार यह स्वस्थ बहस नहीं, बल्कि निष्पक्ष संवाद से बचने का तरीका है।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं, और ‘सत्यमेव जयते’ लिखकर संकेत दिया कि आने वाले दिनों में यह कानूनी और राजनीतिक संघर्ष और भी तेज हो सकता है।

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