[t4b-ticker]
Home » Editorial & Articles » जिन्ना का जिन्न कहाँ घुसा ?

जिन्ना का जिन्न कहाँ घुसा ?

Spread the love

आप जानते हैं आदरणीय मोदी जी का सियासी सूर्ये कैसे उदय हुआ ? अडवाणी जी जो कभी RSS और BJP  के चहीते होते थे , जिन्ना की मज़ार पर जाकर उनके क़सीदे पढ़ने के बाद से लॉबी की नज़र से गिरगाये , मानो मज़ार से निकले जिन्ना के जिन्न ने अडवाणी का सियासी क़िला ही मिस्मार करदिया  । आरएसएस को मोदी में पार्टी और नज़रिए को लागू करने का भविष्य नज़र आने लगा , आडवाणी जी ने रथ यात्रा निकालकर बाबरी मस्जिद शहीद कराने का श्रय प्राप्त किया तो मोदी जी भी गुजरात दंगों में मुस्लिम दुश्मनी का अपना करिश्मा दिखा चुके थे . जिसको मुस्लिम नरसंहार के नाम से याद किया जाता है ।हालांकि अटल जी इस हादसे से दुखी थे और उन्होंने कहा था कि मोदी ने दुनिया के सामने हमारा सर शर्म से झुका दिया है .और अब हम दुनिया को क्या मुंह दिखाएंगे .

 

जिन्नाह जिसको भारत का अधिकाँश नागरिक partition का ज़िम्मेदार मानता है , अडवाणी जी की कराची यात्रा के बाद से उनसे खफा होगया और उनका PM बनने का सपना धूमिल होगया , 2013 में मोदी को प्रधान मंत्री का उम्मीदवार घोषित किये जाने के बाद अडवाणी जी के तमाम सपनो पर पानी पड़ गया . नरेंद्र भाई मोदी जो कभी अडवाणी जी के शिष्य कहलाते थे अब सबसे बड़े सियासी दुश्मन होगये थे . जिन्ना के मज़ार से निकला जिन्न इससे पहले की बोतल में वापस जाता अडवाणी जी के सियासी क़िले को मिस्मार कर चुका था .

जिन्ना का यह जिन्न जो आरएसएस के लिए एक वरदान साबित हुआ उसने इसको संभालके बोतल में बंद कर लिया , और वक़्त का इंतज़ार किया , आज जब देश में मोदी सरकार को चौतरफा आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा है साथ ही 2019 का आम चुनाव भी सर पर है ऐसे में RSS ने जिन्ना के जिन्न को वापस बोतल से निकालकर अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छोड़ दिया है अब देखना यह है की यहाँ से यह जिन्न RSS और BJP को कोई अल्लादीन का चिराग दिलाता है या फिर अपने आक़ा को पटकनी मार कर किसी ओर की सेवा में चला जाता है .वैसे फिलहाल देश का मुसलमान और दलित बहुत कंफ्यूज है , ऐसे में इसको सही डायरेक्शन देने के लिए कोई सियासी रहनुमा भी नहीं है , फिलहाल इन क़ौमों को बहुत सूझ बूझ से आगे बढ़ना होगा और किसी भी आक्रोश या Provoking हादसे को अपनी कामयाबी में रुकावट समझकर संयम और बर्दाश्त से काम लेना होगा , वरना मुखालिफ अपने मिशन में कामयाब होजायेगा जो देश के विनाश का जरिया होगा . यानि नफरत और भय का माहौल बनाने वाले शायद कामयाब होजाएंगे ,,,

वैसे हम जानते हैं भारत में यह polarisation (ध्रुवीकरण) का समय  है हालांकि अब तो बारहों महीने ही कोई न कोई चुनाव रहता है जहाँ ध्रुवीकरण की ज़रूरत होती ही है , किन्तु 2019 आम लोक सभा चुनाव बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही के लिए करो या मरो नहीं मारो वाली स्तिथि है .क्योंकि मरना तो हर तरह से ग़रीब जनता को ही है न !अब चाहे वो किसी भी मज़हब या जाती की मानने वाली हो .

 

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्नाह की तस्वीर को लेकर किया गया बवाल कोई अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह फासीवादी सोच की प्रायोजित योजना का हिस्सा है , कहानी जिन्ना पर ख़त्म नहीं होती बल्कि यह उस फिल्म का एक करैक्टर है जिसका अंत  Ultimately विलन की पराजय पर ख़त्म होना है .यानी जीत सच और हक़ कि ही होनी है ,पिछले scene यदि हम लौटा कर देखें तो लव जिहाद , गोरक्षा ,तीन तलाक़ ,मोब लिंचिंग,और तिरंगा यात्रा , तारिक़ फतह , तथा शम्भू अपराधी सभी इस फिल्म के scene हैं .जो आगे अलग अलग नामों से आते रहेंगे .

लेकिन इस बीच में देश कितना पीछे चला जाएगा , मानवता का कितना नुकसान होजायेगा , देश का विकास कितना पिछड़ जाएगा इसका अंदाजा फिल्म के डायरेक्टर या प्रोडूसर को भी नहीं है . बस वो तो अपने वक़्ती लाभ के लिए शूटिंग पे लगा हुआ है .

आज देश में जगह जगह नित नए हाद्से हमको अपनी नाकामी और विनाश का निशाँ देते हैं , यदि समय रहते देश का सभ्य , सेक्युलर वर्ग और सच्चे देश प्रेमी निकलकर इस नफरत कि आग को बुझा नहीं पाए तो वो दिन दूर नहीं जब देश बर्बादी और तबाही के तंदूर में जल कर राख होजायेगा और उस वक़्त का पछताना किसी काम न आएगा .

देश में नफरत की आंधी को रोकने का अभी भी माहौल है ,लेकिन जिस तेज़ी से देश को नफरत और खौफ के माहौल के साथ तबाही की तरफ धकेला जारहा है उसको देखते हुए समय बहुत कम बचा है , और हमारा सभ्य तथा बुद्धिजीवी समाज खरगोश कि नींद सोया हुआ है , कभी कभी बंद कमरों में या एयर कंडीशन हॉल्स में कुछ संगोष्ठियां और सेमिनार होजाते हैं जिसका कोई फायदा नहीं होता , बस self setisfaction होजाता है , ज़रुरत अम्न के आंदोलन की है

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Scroll To Top
error

Enjoy our portal? Please spread the word :)