डूंगरपुर का नवाचार बना पूरे राजस्थान की शान: युवा सीएलजी सदस्य योजना संपूर्ण प्रदेश में लागू, 75 हजार से अधिक युवा जुड़े

डूंगरपुर, 18 अगस्त । अपराध नियंत्रण और पुलिस-जन समन्वय के क्षेत्र में राजस्थान के डूंगरपुर जिले से शुरू हुआ एक अनूठा नवाचार अब पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में डूंगरपुर जिले में शुरू की गई ‘वागड़ वीर युवा सीएलजी सदस्य योजना’ की सफलता को देखते हुए इसे अब पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है। राज्य स्तर पर आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में पुलिस महानिदेशक राजस्थान राजीव कुमार शर्मा ने इस योजना की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। इस दूरदर्शी पहल के तहत अब तक महज एक वर्ष की अवधि में पूरे प्रदेश में 75 हजार से अधिक ऊर्जावान युवाओं को जोड़ा जा चुका है, और यह अभियान निरंतर जारी है।

कानून व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने और जमीनी स्तर पर पुलिस और जनता के बीच की दूरी को पाटने के उद्देश्य से जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने डूंगरपुर जिले में युवाओं को जोड़ने की इस विशेष योजना की रूपरेखा तैयार की थी। इसके तहत युवाओं को ‘वागड़ वीर’ के रूप में कम्युनिटी पुलिसिंग से जोड़ा गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक संदेश देना, युवाओं की ऊर्जा का रचनात्मक उपयोग करना तथा अपराधों के प्रभावी प्रबंधन व नियंत्रण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था।

विभिन्न रेंज स्तर की बैठकों के दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने इस अनूठे मॉडल की उपयोगिता को गहराई से समझा। डीजीपी के कुशल मार्गदर्शन और स्पष्ट निर्देशों के बाद इस योजना को न केवल डूंगरपुर जिले में बल्कि पूरे राज्य में विस्तार देने का निर्णय लिया गया। इस सफलता की गूंज राज्य मुख्यालय तक पहुंची, जहां माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष इस योजना की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री स्तर से इस पहल की अत्यधिक सराहना किए जाने के बाद इसे पूरे प्रदेश में आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया।

प्रदेशभर में लागू होने के बाद से ही इस योजना को युवाओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष के भीतर पूरे राजस्थान में 75,000 से अधिक युवा सीएलजी सदस्यों को जोड़ा जा चुका है। ये युवा विभिन्न गांवों, ढाणियों और शहरी वार्डों में पुलिस और आमजन के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने, अफवाहों को रोकने और किसी भी आपात स्थिति या अपराध की सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंचाने में ये युवा प्रहरी अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के जरिए पुलिसिंग का दायरा काफी व्यापक हो गया है। आज के दौर में जब अपराध के तरीके और तकनीक बदल रही है, ऐसे में युवाओं की तकनीकी समझ और उनकी मुखर उपस्थिति पुलिस के लिए एक बड़ा संबल बन रही है। डूंगरपुर से शुरू हुआ यह सफर आज पूरे राजस्थान के युवाओं के लिए सामाजिक बदलाव और सुरक्षा में अपनी हिस्सेदारी निभाने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है, जिसका यह सिलसिला लगातार जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.