यहाँ रावण नहीं मरता और वहाँ शैतान

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अगर रब के उपासक और राम के भक्त अपने यक़ीन और कर्म ठीक कर लें तो …..

है , राम के वजूद पर …….हिन्दोस्ताँ को नाज़

Ali Aadil Khan

Editor’s Desk

हमने उधर भी रमी करने यानी शैतान को कंकरियां मारने वालों को देखा और इधर भी रावण जलाने वालों को देखा , बड़ी तब्दीली कहीं नज़र नहीं आई . 5114 ईसा पूर्व में पैदा हुए पुरषोत्तम राम के दौर के हालात को आज जिस परिपेक्ष में याद किया जाता है वो अपने में विचित्र तो है |

शैतान को कंकरियां मारते लोग

हालाँकि यहाँ मज़हबी तक़ाबुल मक़सद नहीं है , बल्कि निजी अमल के नतीजों पर ग़ौर करना है .यानी हर साल मुसलामानों में से लाखों लोग मक्काः जाकर शैतान को कंकरियां मारकर आते हैं , और वापस फिर शैतान की कमर में हाथ डालकर घूमते रहते हैं . शैतान की टोली में शामिल होजाते हैं , शैतान को खुश करने वाले काम करते रहते हैं .

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रावण को जलाने वाली जमात के लोग भी रावण वाली  प्रवर्ती में रहकर जीवन बिताने को अपनी सफलता का आधार मानते हैं , क्योंकि यदि राम से मोहब्बत होती उनके सिद्धांतों और उपदेशों को अपनाया जाता , यानी देश में शान्ति के लिए सत्ता को अपनाने नहीं त्यागने की होड़ होनी चाहिए थी यहाँ मामला उलट है …

रावण को जलाते हुए लोग

ख़ैर ………..

रावण को जलाये जाने की हकीकत सब जानते ही हैं लेकिन याद दहानी के लिए एक वाक़िया बता दें कि 

मर्यादा पुरषोत्तम राम ने लक्ष्मण को Death Bed पर पड़े रावण के पास राजधर्म का रहस्य जानने के लिए भेजा था।

तब रावण ने कहा ‘मैंने जिंदगी में बहुत बड़ी भूल की है , “मैं पुण्य के कामों को टालता रहा जबकि बुराई के काम को करने में जल्दी की “।इस जुमले से रावण के पश्चाताप और परमपिता से माफ़ी का पता मिलता है .हालांकि यह बहस आध्यात्मिक है ….. 

रावण ने कहा था मेरी तीन योजनाएं थीं- स्वर्ग तक सीढ़ी बनाना,यानी स्वर्ग के रास्ते पर चलते जाना जबतक स्वर्ग पहुँच न जाऊं .दूसरे समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाना ताकि लोगों के लिए पीने के पानी की दिक़्क़त न रहे

और तीसरे सोने में सुगंध डालना ताकि लोग उसको सोने की वजह से नहीं बल्कि सुगंध की वजह से इस्तेमाल करें .

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रावण का कहना था कि मैं इन तीनों भलाई के कामों को कल पर टालता रहा और सीता के अपहरण जैसा बुरे काम को अंजाम देने में जल्दी कर दी ।यह मेरे जीवन की बड़ी भूल थी , जिसका मुझे पछतावा है | और इसी कारण से जैन मान्यता के अनुसार रावण का जीव आने वाली परम्परा में जैन तीर्थंकर होकर मोक्ष प्राप्त करेगा .

तीर्थंकर उस व्यक्ति को कहते हैं जिसने पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा, आदि पर विजय प्राप्त कर ली  हो ।

ब्राह्मण समाज का कहना है कि इसमें किसी को शक नहीं है कि रावण एक ब्राह्मण था। रावण बहुत ज्ञानी होने के साथ पराक्रमी था। जोधपुर के गोदा गौत्र के श्रीमाली ब्राह्मणों ने जोधपुर में बाकायदा रावण का मंदिर बनवा रखा है और नियमित रूप से उसकी पूजा अर्चना होती है ।

” कुछ हिंदूवादी ब्रह्मणों का मानना है कि रावण का चरित्र भी तारीफ के काबिल है। उसने सीताजी के साथ दुर्व्यवहार या किसी प्रकार का यौन-शोषण नहीं किया ” . इसके विपरीत आज गली-मोहल्लों में बलात्कार की  जघन्य घटनाएं आम बात हो गयी है ।

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ऐसे में पुतला रावण का नहीं बल्कि ऐसे अपराधियों और उनके सहयोगियों का फूंकना चाहिए जो नफरत , नस्लवाद , सामंतवाद , पूँजीवाद और द्वेष की सियासत को बढ़ावा दे रहे हैं . इसी के कारण अधिकतर बेकसूर लोगों को जेल की सलाखों के पीछे डाला जा रहा है .

देश की बेगुनाह और मासूम महिलाओं के साथ कुकर्म किये जा रहे हैं  . बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है।और अपराधियों का सर्कार मैं बैठे लोग फूल मालाओं से स्वागत कर रहे हैं  .

भ्रष्टाचारियों , अपराधियों और उनका संरक्षण करने वाले सफ़ेद खादीधारी नेताओं का पुतला जलाना चाहिए जो भारत की जड़ों को खोखला कर रहे हैं ।

क्योंकि बात रावण के दहन और दशहरे की हो रही है , और रावण का क़ुसूर सीता का अपहरण था जबकि बताया जाता है की उसने सीता को छुआ तक नहीं था बलात्कार तो बहुत दूर की बात है , ऐसे मैं हमको अपने बीच के रावणों को समझना ज़रूरी है .

तो एक नज़र देश में हर साल बलात्कारियों की सूची पर डाल लेते हैं .

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देश के अलग अलग  राज्यों में 2021 में होने वाले बलात्कार की घटनाओं की सूची कुछ इस प्रकार है , राजस्थान (6,337) मध्य प्रदेश (2,947), महाराष्ट्र (2,496) और उत्तर प्रदेश (2,845) पर था जबकि दिल्ली में 2021 में 1,250 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे।

राजस्थान के एक नेता का कहना था की दूसरे राज्यों में पुलिस पर दबाव बनाकर दुष्कर्म के reports को Cancel कराया जाता है जबकि राजस्थान में पुलिस पर Rape के Cases में दबाव नहीं बनाया गया है इसलिए यहाँ Rape Victims की संख्या ज़्यादा है .

पूरे भारत देश में अपराधों पर नवीनतम सरकारी रिपोर्ट की बात करें तो  2021 में बलात्कार के कुल 31,677 मामले दर्ज किये गए , जो  रोज़ाना के हिसाब से 86 मामले बनते हैं . जबकि महिलाओं के खिलाफ छेड़छाड़ तथा अन्य अपराध के लगभग 49 मामले हर एक घंटे दर्ज किए गए हैं ।

वहीँ 2020 में बलात्कार के मामलों की यह संख्या 28,046 थी, जबकि 2019 में यह 32,033 थी, जैसा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया 2021’ रिपोर्ट में दिखाया गया है। आपको बता दें NCRB गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

भारत देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ 2020 में विभिन्न अपराधों की संख्या 3,71,503 और 2019 में 4,05,326 थी।

अब आप ही इन्साफ से बताएं कि आज के रावणों को जलाया जाना चाहिए या पुरषोत्तम राम के दौर के रावणों को ?

…हालांकि अगर आज भी वास्तव में मर्यादा पुरषोत्तम राम के सिद्धांतों को अपना लिया जाए तो देश से भ्रष्टाचार , अपराध , द्वेष , नफ़रत ,ख़ौफ़ ,लालसा , अहंकार ,भेदभाव और स्वार्थी और सत्ता के भिकारी नेताओं का सर्वनाश हो सकता है .क्योंकि त्याग और तपस्या ही शान्ति और सुशासन की कुंजी है |

क्योंकि बक़ौल अल्लामा इक़बाल

 

है , राम के वजूद पर …….हिन्दोस्ताँ को नाज़ |

अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द || 

 

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