यूनिफार्म सिविल कोड हिन्दू महासभा को नहीं था क़ुबूल

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Ali Aadil Khan

Editor’s Desk

एक बात तो है अगर UCC ईमानदारी से लागू होजाये तो कॉर्पोरेट घराने आपके साथ चाय पीते दिखाई देंगे , क्योंकि फिर तो सामाजिक , राजनितिक , धार्मिक और आर्थिक हर प्रकार की बराबरी हो जाएगी

आप Uniform Civil Code (UCC) से क्या समझते हैं ? क्या सब नागरिक एक जैसे दिखाई देने लगेंगे . क्या सबकी वेश भूषा एक होजायेगी ? क्या सब यहाँ संस्कृत बोलते दिखाई देंगे . क्या सभी मज़हबी इमारतों का stucture एक जैसा होगा ? नहीं ऐसा नहीं होगा ,,,लेकिन जो होगा उसको समझने की भी ज़रुरत है … पूरा वीडियो देखेंगे तो सारे doubts clear होजाएंगे .और फ़िज़ूल बकवास करने वालों को आप समझा भी सकेंगे ….

अगर देश में uniformity यानी बराबरी और इंसाफ़ क़ायम होजाये तो देश में शांति ,समृद्धि और खुशहाली आएगी । मगर……. अमीरी और ग़रीबी के बीच की खाई मुस्तक़िल बढ़ रही है . और इसको पाटने की दिशा में कोई काम भी नहीं हो रहा है . में तो कहता हूँ देश में पहले Economic Uniform code लाया जाए .

जिस देश में क़ातिल , चोर , आतंकी , उग्रवादी , बैंक लुटेरे , कुकर्मी और रेपिस्ट आज़ाद घूम रहे हों। जबकि इन सबके ख़िलाफ़ सख़्त सज़ाओं का प्रावधान हमारे क़ानून में मौजूद है । दूसरी तरफ़ बेगुनाह और मासूमों को अपराधी बनाकर जेलों में डाला जा रहा हो . १० दस साल तक कोई सुनवाई उनकी इसलिए न होरही हो की उनकी पैरवी करने वाला नहीं है . ज़रा सोचें ऐसे में UCC यानी Uniform Civil Code को संसद के पटल पर लाना या उसपर बहस कितना उचित है ।

सवाल यह है कि क्या UCC देश में एक खास मज़हब के लोगों को ठिकाने लगाने का एक टूल है ? जवाब है नहीं । क्योंकि एक देश एक विधान नारे के तहत कश्मीर से 370 हटायी गई क्या वहां एक विधान को अपनाया जा रहा है ? क्या वहां सब Normal होगया है ?

दूसरी बात , अभी तो सिर्फ कश्मीर से 370 हटा तो उस दौरान क्या तमाशे हुए आपके सामने हैं ,कश्मीर के हालात को लेकर पूरी दुनिया में मानवाधिकारों के हनन को लेकर हम पहले ही बदनाम हैं . जब UCC आएगा तो देश के 10 राज्यों से 371 हटाना पड़ेगा । उस वक़्त देश के क्या हालात होंगे आप सोच नहीं सकते .

Article 44 के तहत हिन्दू लॉ Reforms के लिए 1941 में Hindu Law Experts की Committee बनाई गयी 1948 में Hindu Code Bill लाया गया ,लेकिन सबसे पहले राइट विंग और हिन्दू महासभा ने इसका विरोध किया . खुद तत्कालीन राष्ट्रपति Dr राजिंद्र प्रसाद ने कहा मेरे पास बिल sign होने आएगा मैं उसपर sign नहीं करूँगा .

2018 में Law Commision की रिपोर्ट का इंतज़ार था कि UCC को हरी झंडी मिल जयेगी . लेकिन Law Commision के चेयरमैन जस्टिस चौहान ने कहा Uniform Civil Code neither Desirable Nor Feasible .यानी UCC की न तो ज़रुरत है और न ही यह क़ाबिल ए अमल है

गोवा राज्ये हमारे सामने UCC का एक मॉडल मौजूद है .वहां Portuguese Civil Code का निज़ाम है . लेकिन हिन्दू शादी प्रथा , और ईसाई शादी प्रथा अलग अलग हैं . इसी तरह गोवा में अगर किसी हिन्दू जोड़े को बेटा पैदा नहीं हुआ तो उसको इख़्तयार है की वो दूसरी शादी कर ले .

अगर UCC किसी ख़ास मज़हब में दख़ल अंदाज़ी के लिए बनाया जा रहा है तो वो भी मुमकिन नहीं है । क्योंकि हमारे देश में सिर्फ हिन्दू और मुस्लिम ही नहीं बल्कि यहां 7 बड़े धर्मों के मानने वाले करोड़ों नागरिक रहते हैं । और ये सब सदियों से यहां रहते चले आ रहे हैं ।सबके अपने पर्सनल laws हैं . शादी , तलाक़ , जायदाद के क़ानून हैं . अपने अपने Rituals और परम्पराएं हैं . फिर within the Religion जातियों के भाषाओँ और क्षेत्रों के अपने अपने रीत रिवाज हैं , उनका क्या होगा .

ऐसे में UCC का Basic Structure क्या होगा , क्या इसका कोई draft तैयार हो चूका है अगर हाँ तो उसको सार्वजानिक किया जाना चाहिए . UCC का Blue Print पहले तैयार हो , इसमें सभी Personal Laws के experts को रखा जाये . फिर देश के सामने उसको रखा जाये .

सहमति बन जाने के बाद इस बिल को सदन के पटल पर लाया जाए तब इसकी मान्यता बनेगी . अन्यथा किसान बिल की तरह इसको वापस लेना पड़ेगा .रहा सवाल एक देश एक विधान का तो देश आज भी एक है और देश का संविधान भी एक ही है .

आपको बता दें , अमेरीका जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली लोकतान्त्रिक देश है वहाँ 50 States हैं ,वहां आम क़ानून की तो बात ही छोड़ दीजिये हर एक state का अपना संविधान है । UCC को किसान bill के आईने से भी एक बार ज़रूर देख लीजिये ,क्योंकि किसान बिल को वापस लिया गया था ।

सदन में bill पास करने का अगर सिर्फ रिकार्ड बना है तो वो तो वर्तमान सरकार के ही पक्ष में जायेगा । चीन के द्वारा भारत पर लगातार जबरन अतिक्रमण करने की घटनायें लाल आंख करने वालों की सरकार में सबसे ज़्यादा हुई। इसपर देश को यूनीफॉर्म होने की ज़रुरत है ।

मँहगाई को क़ाबू करने के लिए यूनीफॉर्म होने की ज़रुरत है। बेरोजगारी दूर करने , वातावरण को नियंत्रित करने , देश में खाद्य पदार्थों की क्वालिटी ठीक करने के लिए uniformity की ज़रुरत है । यहां 77 % नागरिकों का धन 1 % लोगों के पास है इसमें यूनीफॉर्म होने की ज़रुरत है ।

भारत की ख़ूबसूरती विविधताओं में एकता से है . और पूरी दुनिया में यह हमारी पहचान है . भारत देश विविधताओं का देश है जो इस देश की धरोहर है . विविधताओं को रफ्ता रफ्ता ख़त्म करने की सोच किसी दुश्मन मुल्क की साज़िश नज़र आती है .

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