त्रिपुर में लेनिन ,केरल के वेल्लूर में ‘पेरियार’ अब उत्तर प्रदेश के मेरठ में तोड़ी गई बाबा भीमराव की मूर्ति

देश में मूर्ती ढाने का सिलसिला उत्तर पूर्व त्रिपुरा से चलकर केरल होता हुआ उत्तर प्रदेश आ पहुंचा है , याद रहे NORTH EAST के तीन राज्यों के विधान सभा चुनाव में हाल ही में बीजेपी की जीत के साथ ही मूर्ती ढाने का सिलसिला शुरू होगया है .

मंगलवार देर रात मेरठ में संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी गई.
मवाना इलाके में घटी इस घटना के बाद लोगों में आक्रोश फ़ैल गया. जिसके बाद पुलिस ने अंबेडकर की मूर्ति बदलने का आश्वासन देने के साथ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. इस मामले में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस प्रकार के मूर्ति कांड पर नाराजगी जाहिर की है.

बता दें कि बीजेपी समर्थकों ने त्रिपुरा में रूसी क्रांति के कम्युनिस्ट नायक व्लादिमिर लेनिन की प्रतिमा पर बुलडोजर चड़ा दिया गया था. वहीँ तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में समाज सुधारक ईवीआर रामास्वामी ‘पेरियार’ की प्रतिमा में भी तोड़फोड़ की गई. ये तोड़फोड़ भी बीजेपी समर्थको द्वारा की गयी बताया जारहा .

मूर्ती काण्ड के इस सिलसिले की कड़ी आज बुधवार सुबह कोलकाता में जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भी नाम जुड़ गया ,दक्षिण कोलकाता में कुछ अज्ञात लोगों ने इस काम को अंजाम दिया . पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आगे बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चेहरे पर कालिख भी पोती गई. यहां से एक पोस्टर भी मिला है जिस पर ‘ “कट्टरपंथी” लिखा है.

देखना यह है की यह मूर्ती ढाये जाने का यह क्रम देश की राजनीती को किस मोड़ पे लेजाता है साथ ही कम्युनिस्ट व् अम्बेडकरवादी विचार धरा के प्रति संघ के विरोधी रुख को क्या दिशा देता है , क्या मूर्ती काण्ड की इस राजनीती में वैचारिक तथा जातीय आधार पर देश में कोई नई सियासी समीकरण बनने के आसार निकल सकते हैं ?

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