TIME Magazine का बड़ा खुलासा, फेसबुक इंडिया के डायरेक्टर ने BJP के लिए के लिए किया काम

Date:

नई दिल्ली। Face Book India (FB India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर के भाजपा के साथ रिश्तों की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि Facebook India की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टरअंखी दास से पहले फेसबुक इंडिया के पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर के भी भाजपा IT Cell और BJP आलाकमान के साथ Special Relations रहे .

बताया गया है की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर ने 2014 के लोकसभा चुनावो के दौरान पार्टी समर्थक एक वेबसाइट चलाई थी। टाइम मैगजीन की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जुलाई 2019 में फेसबुक के भारत और साउथ एशिया में पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर शिवनाथ ठकराल थे। उस समय हेट स्पीच पोस्ट्स पर नजर रखने वाली संस्था ‘आवाज’ ने 180 ऐसी पोस्ट के बारे में फेसबुक को बताया था, जो उनकी पॉलिसी का उल्लंघन करते थे। इन पोस्ट में से एक असम से बीजेपी नेता शिलादित्य देव का नाम था। इसमें देव ने एक मुस्लिम शख्स के एक लड़की के साथ बलात्कार करने की खबर को ‘हेट स्पीच’ के साथ शेयर किया था।

Facebook ने मानी अपनी ग़लती

टाइम मैगज़ीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक ने ये पोस्ट एक साल तक नहीं हटाई। जब 21 अगस्त को टाइम मैगज़ीन ने फेसबुक से इस बाबत जवाब मांगा तो कंपनी ने कहा , ‘जब ‘Awaz’ ने इसके बारे में बताया था तो इस पोस्ट को देखा गया था। हमारे रिकॉर्ड बताते हैं कि हमने इसे हेट स्पीच उल्लंघन के मामले में रखा था। शुरुआती रिव्यू के बाद हम इसे नहीं हटा पाए, जो कि हमारी गलती थी।

‘ टाइम की रिपोर्ट का कहना है कि इस पूरे प्रकरण के समय पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर शिवनाथ ठकराल थे और उनका एक काम ‘भारतीय सरकार के लिए लॉबिंग करना भी था।’ टाइम को फेसबुक के पूर्व कर्मचरियों ने बताया कि शिवनाथ ठकराल उन सभी Meetings में भी शामिल होते थे, जिनमें ये तय किया जाता था कि नेताओं के ‘हेट स्पीच’ टैग किए गए पोस्ट पर क्या एक्शन लेना है। रिपोर्ट के मुताबिक, ठकराल ने 2014 लोकसभा चुनावों के समय बीजेपी के प्रचार में मदद की थी।

FB पॉलिसी डायरेक्टर शिवनाथ ठकराल के फेसबुक लाइक्स में ‘I Support Narendra Modi’ नाम का पेज भी है। टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व फेसबुक कर्मचारियों का मानना है कि ठकराल को 2017 में रखने के पीछे मुख्य कारण उनके बीजेपी से संबंध होना है। लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में ठकराल ने बीजेपी-समर्थक वेबसाइट ‘मेरा भरोसा’ और फेसबुक पेज चलाया था। 2014 के शुरुआत में वेबसाइट का नाम ‘मोदी भरोसा’ कर दिया गया था।

शिवनाथ ठकराल ने भी माना
फेसबुक ने भी शिवनाथ ठकराल के इस वेबसाइट के लिए काम करने की बात मानी है। अब ठकराल को फेसबुक ने और बड़ी जिम्मेदारी दी है। मार्च 2020 में शिवनाथ ठकराल का Promotion कर दिया गया और उन्हें WhatsApp इंडिया का पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर बना दिया गया । बता दें कि फेसबुक इंडिया पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास पर हाल ही में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की हेट स्पीच और पोस्ट न हटाने देने का आरोप लगा है। इसको लेकर वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

रिपोर्ट में दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अनखी दास ने स्‍टाफ से कहा कि ‘बीजेपी नेताओं की पोस्‍ट्स हटाने से देश में कंपनी के कारोबार पर असर पड़ेगा।’ फेसबुक के लिए यूजर्स के लिहाज से भारत सबसे बड़ा बाजार है। रिपोर्ट में टी राजा सिंह की एक पोस्‍ट का हवाला दिया गया था जिसमें कथित रूप से अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ हिंसा की वकालत की गई थी। WSJ रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक के इंटरनल स्‍टाफ ने तय किया था कि ‘खतरनाक व्‍यक्तियों और संस्‍थाओं’ वाली पॉलिसी के तहत राजा को बैन कर देना चाहिए।

Congress twits

Randeep Singh Surjewala
@rssurjewala
·
Aug 16
भक्त टीवी चैनल-प्रिंट मीडिया के बाद फ़ेसबुक और वट्सएप की मोदी सरकार से साँठगाँठ का पर्दाफ़ाश।

क्या फ़ेसबुक के माध्यम से ‘फ़ेक न्यूज़’ और ‘भोंडे प्रचार’ को फैलाया जा रहा है?

फ़ेसबुक इंडिया के मुखियाओं का भाजपा से क्या रिश्ता है?

क्या इस षड्यंत्र की जे.पी.सी से जाँच होनी चाहिए?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

Israel, Jewish Diversity and the Myth of Sectarian Determinism

Najmuddin A Farooqi In contemporary political discourse, religion and sectarian...

सोमनाथ: इतिहास या सियासी मंच?

धार्मिक स्थल कोई भी हो, या किसी भी मज़हब...

Understanding the Position of Indian Muslims

Citizenship Concerns and Documentation Reality: Understanding the Position of...

चुनावी शोर के बाद संकट का दौर!

ईरान युद्ध और वैश्विक तेल संकट की आशंकाओं के...