सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली, 28 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले के 22 आरोपितों को बरी करने के बांबे उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया कि अमित शाह को बरी करने के उच्च न्यायालय के फैसले पर दोबारा कोई विचार नहीं किया जाएगा।

मनियर कल्पेश कुमार नामक याचिकाकर्ता ने बांबे उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके अमित शाह को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। बांबे उच्च न्यायालय ने मनियर की याचिका खारिज कर दी थी। इसी सवाल पर उच्चतम न्यायालय ने आज अपना रुख स्पष्ट किया है।

फिलहाल, 22 आरोपितों को बरी करने के बांबे उच्च न्यायालय के फैसले को सोहराबुद्दीन शेख के भाई नायबुद्दीन शेख ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। बांबे उच्च न्यायालय ने 7 मई को अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। इन साक्ष्यों में कई तथ्य ऐसे हैं, जो एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। बांबे उच्च न्यायालय में सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन और नायबुद्दीन ने याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

इस मामले पर मुंबई के स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दिसंबर, 2018 में सभी आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया था। इस मामले में 22 आरोपितों में 21 पुलिसकर्मी थे। ये 21 पुलिसकर्मी गुजरात और राजस्थान के थे। इन पर आरोप था कि उन्होंने साजिश रचकर सोहराबुद्दीन शेख का अपहरण किया और कथित रुप से एनकाउंटर में मार दिया। 22वां आरोपित गुजरात के फार्महाउस का मालिक था, जिसके बारे में बताया जाता है कि सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को मारने के पहले फार्महाउस में रखा गया था।

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