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सरकार और किसान दोनों की ही बचेगी लाज , अगर यह होजाये

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किसान बिल पर SC की केंद्र सरकार को फटकार का किसको होगा लाभ ,किसान बिल प्रकरण दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा

” मरेंगे या जीतेंगे “, कृषि कानूनों पर केंद्र के टालमटोल रवैये के साथ किसान नेताओं और आंदोलनकारियों का रुख भी काफी कड़ा नज़र आने लगा है , पिछले 48 दिनों से जारी किसान आंदोलन को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच आठवें दौर की बातचीत बे नतीजा रही .

कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार भले ही थकाओ और भगाओ की योजना रखती होगी ,लेकिन किसानों ने साफ किया है कि वह अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे . किसानों की ओर से वार्ता में शामिल होने विज्ञानं भवन पहुंचे किसान नेता बलवंत सिंह बहरामके ने note Pad पर पंजाबी में बड़े अक्षरों में लिख रख था कि हम “मरेंगे या जीतेंगे”. किसान नेताओं का यह दृढ़ संकल्प दर्शाता है कि सरकार भले ही वार्ता को लंबा खींचकर उन्हें थकाने और आंदोलनकारियों को बांटने का प्रयास करे, लेकिन वे अपने मक़सद से एक क़दम पीछे हटने को तैयार नहीं हैं .

शुक्रवार को दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर बैठक शुरू हुई जिस में 40 किसान नेता भाग ले रहे थे . केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा रेल एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश बैठक में शामिल हुए.

बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि वो पूरे देश को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेंगे. वहीं किसान नेताओं ने दो टूक लहजे में कहा कि जब तक केंद्र सरकार कानून वापस नहीं लेती है, तब तक वो घर वापस नहीं जाएंगे.सर्कार का कहना है की आंदोलनकारियों में चंद किसान हैं बाक़ी विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्त्ता हैं ,इसपर किसान नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार क्या चाहती है पूरा देश सड़कों पर आजाये , ऐसा तो स्वतंत्रता संग्राम में भी नहीं हुआ . लेकिन अगर सर्कार का रवैया यही रहा तो वो दिन दूर नहीं की देश सड़कों पर आजायेगा .

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भारतीय किसान यूनियन (BKU Rajjewal) गुट के नेता बलबीर सिंह रजवाल ने तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने के सिवा किसी भी हाल में पीछे हटने से इंकार किया . उन्होंने दावा किया कि सरकार इस तरह से कृषि क्षेत्र में दखल नहीं दे सकती.उन्होंने कहा BJP सरकार के इस रवैये ने अँगरेज़ दौर की याद दिला दी है , किसान नेताओं ने कहा सरकार की बात चीत के अंदाज़ से लगता कि वह इस विवाद को सुलझाने के लिए Serious नहीं है.

किसानों और सरकार के बीच बात चीत से मायूस किसानों ने कहा अगर हमारी मांगे नहीं मानी गईं तो गणतंत्र दिवस पर राजधानी में किसान ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे जो अपने आप में एक तारीखी वाक़या हो सकता है .वहां मौजूद महिला किसान आंदोलनकारियों के होंसले भी काफी बुलंद दिखे और उन्होंने कहा की हम आर पार की लड़ाई के लिए भी तैयार हैं .

किसानों के साथ सरकार की अगले दौर की बैठक अब 15 जनवरी को होनी है . अभी तक इस पूरे प्रकरण की जो ख़ास बात है वो दोनों पक्षों की ओर से बात चीत के सिलसिले को लगातार जारी रखना है किन्तु किसान आंदोलनकारियों को सरकार की नीयत पर शक के आसार नज़र आने लगे हैं .

किसानो के इस आंदोलन को गोदी मीडिया की ओर से बदनाम करने की अलग अलग कोशिशों और उनकी नकारात्मक टिप्पणियों पर वहां मौजूद आंदोलनकारी ने गोदी मीडिया के साथ अम्बानी और अडानी Products की भी लगातार बहिष्कारके साथ जिसके दर्द और सच्चाई भरे जुमलों को सुनकर आप भी किसानो के दर्द के एहसास के समुन्द्र में ग़ोताज़न हो सकते हैं . विडिओ पसंद आये तो like share करदें और चैनल को सब्सक्राइब करने की मेहरबानी फरमाएं

किसान आंदोलन पर अलग अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आज सोमवार 11 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का संकेत दिया है कि वह कृषि बिल के अमल पर रोक लगा सकती है। SC के चीफ जस्टिस S A बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि उसने कृषि बिल के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन को सही तरह से हैंडल नहीं किया।

अदालत ने निराशा जताते हुए कहा कि वह इस बात को लेकर दुखी है कि केंद्र सरकार ने इस मामले को सक्षम तरीके से हैंडल नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में बातचीत के लिए कमिटी का गठन करेगी और कमिटी की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के रिटायर चीफ जस्टिस करेंगे।

यहाँ एक बात ध्यान देने की है , सुप्रीम कोर्ट जिस कमिटी के गठन की बात कर रहा है उसपर सरकार का कितना प्रभाव है , ऐसे में जबकि खुद माननीय सर्वोच्च न्यायालय पर ही सरकार के इशारों पर काम करने के आरोप लगते रहे हों तो SC द्वारा गठित कमिटी की क्या हैसीयत होगी .लेकिन भरोसा तो किसान नेताओं को भी करना ही पड़ेगा , और कमिटी के पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने या न होने का पता तो उसके ज़रिये लिए गए फैसलों से ही चलेगा .

सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को बज़ाहिर लगाई गयी फटकार से लगा की सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार के कामों से खुश नहीं है , ख़ास तौर से किसान बिल के मुद्दे पर आज जो रुख SC का रहा उसमें काफी नाराज़गी दिखाई दी . SC ने आज सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कहा कि हमारे धैर्य को लेकर हमें लेक्चर न दिया जाए।

चीफ जस्टिस S A बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने कहा हमने आपको काफी वक्त दिया ताकि समस्या का समाधान हो। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं वह कानून के अमल पर तब तक रोक लगा सकती है जब तक कि कमिटी के सामने दोनों पक्षों की बातचीत चलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही किसानों से कहा है कि वह वैकल्पिक जगह पर प्रदर्शन के बारे में सोचें ताकि अवाम को होने परेशानी से बचाया जा सके.

दरअसल किसी भी सरकार के लिए क़ानून वापस लेना मुश्किल काम होता है इसमें सरकार की किरकिरी होने के साथ जनता को भी हर क़ानून पर प्रदर्शन करने का रास्ता खुल जाता है , इसलिए सरकार और किसानो के लिए भी यह विकल्प माननीय होना चाहिए कि फिलहाल इस क़ानून के अमल पर रोक लगा दी जाये इससे किसान और सरकार दोनों कि लाज बच सकेगी .

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