प्रधानमंत्री प्रचंड विश्वासमत हार गए , नए PM नियुक्त

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के पी शर्मा ओली फिर बने नेपाल के प्रधानमंत्री, तीसरी बार हुई ताजपोशी

ओली को माना जाता है चीन समर्थक , इनके काल में भारत के साथ तनावपूर्ण रहे हैं सम्बन्ध

नेपाल में के पी शर्मा ओली को तीसरी बार प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। वे पुष्प कमल दहल प्रचंड का स्थान लेंगे। प्रचंड शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हार गए थे जिस कारण नई सरकार का गठन किया गया।

राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने के पी शर्मा ओली को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल यूनिफाइड मार्क्सवादी लेनिनवादी- नेपाली कांग्रेस गठबंधन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

नेपाल में पुष्प कमल प्रचंड की सरकार गिरने के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सीपीएन-यूएमएल पार्टी के अध्यक्ष के.पी.शर्मा ओली को नयी गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने के लिए रविवार को चौथी बार देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।

ओली को चीन समर्थक माना जाता है। बता दें कि ओली (72) ने पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ की जगह ली है, जो शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हार गए थे। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार नयी सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। अब ओली 15 जुलाई (सोमवार) को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

शेर बहादुर देउबा को मिला साथ
पिछले हफ्ते की शुरुआत में, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली ने नयी गठबंधन सरकार बनाने के लिए सात सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि प्रधानमंत्री का शेष कार्यकाल बारी-बारी से उनके बीच साझा किया जाएगा। समझौते के मुताबिक, पहले चरण में ओली 18 महीने तक प्रधानमंत्री बनेंगे। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ओली सोमवार को एक छोटी मंत्रिपरिषद का गठन करेंगे।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, जनता समाजवादी पार्टी नेपाल, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी, जनमत पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों के भी सरकार में शामिल होने की संभावना है।

ओली के सत्ताकाल में तनावपूर्ण रहे हैं भारत के संबंध
ओली ने 11 अक्टूबर 2015 से तीन अगस्त 2016 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान नयी दिल्ली के साथ काठमांडू के संबंध तनावपूर्ण रहे। इसके बाद वह पांच फरवरी 2018 से 13 मई 2021 तक फिर प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद भी वह तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी की वजह से 13 मई 2021 से 13 जुलाई 2021 तक पद पर बने रहे। बाद में उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि ओली का प्रधानमंत्री पद पर बने रहना असंवैधानिक है।

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