पूर्व चुनाव आयुक्त क़ुरैशी ने एग्ज़िट पोल को बताया ग़ैर क़ानूनी

नई दिल्ली । 14 दिसंबर 2017 को गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न हो गया। अंतिम चरण में क़रीब 69 फ़ीसदी मतदान हुआ। जो पीछले मतदान के मुक़ाबले तीन फ़ीसदी कम है। उधर राजनितिक चुनावी घमासान ख़त्म हुआ और ज़्यादातर टीवी न्यूज़ चैनल सबसे सटीक एग्ज़िट पोल को लेकर घमासान में जुट गए । प्रत्येक चैनल अपने एग्जिट पोल की सटीकता के झंडे गाड़ने लगा ,और शुरू होगया दावों का दौर ।

चौकाने वाली बात यह है की न्यूज़ 24-चाणक्य को छोड़ कर बाक़ी सभी चैनलों ने शाम के 6 बजे तक एग्ज़िट पोल के परिणाम सामने रखते हुए भाजपा को बहुमत है । हमारे रिपोर्टर्स के अनुसार 5 बजे के बाद भी बड़ी संख्या में लोग बूथ पर वोट डालने का की क़तार में खड़े दिखाई दिए ।

ऐसे में इस बात का पूरा इमकान है की एग्ज़िट पोल के नतीजों से मतदाता प्रभावित हुए होंगे । चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार चुनाव सम्पन्न होने से पहले एग्ज़िट पोल प्रसारित करना ग़ैर क़ानूनी है इसके बावजूद ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों ने इस नियम की अनदेखी करते हुए सत्ता पक्ष के साथ वफादारी का सुबूत पेश किया , जबकि क़ानून को तोड़ दिया ।

इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र बनाये पूर्व चुनाव आयुक्त डॉक्टर एस वाई कुरेशी ने अपने ट्वीट में एग्ज़िट पोल को ही ग़ैर क़ानूनी क़रार दिया। उन्होंने लिखा आप  कैसे किसी को पहले स्थान पर दिखा सकते है।उन्होंने लिखा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक्जिट पोल के ‘प्रचार और प्रसार पर ‘प्रतिबंध लगा दिया गया है। कैसे किसी को पहली जगह पर दिखाया जा सकता है।

अपने दूसरे ट्वीट में वो लिखते है,’ आरपी अधिनियम की धारा 126 को संसद के द्वारा 2008 में संशोधित किया गया था (न की चुनाव आयोग के द्वारा)। इसके अनुसार एग्ज़िट पोल के प्रचार और प्रसार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। आख़िर ये एग्ज़िट पोल कब आयोजित किए जाते है? जब वोटर वोट डालकर अपने बूथ से बाहर निकलता है, जब मतदान अपने पूरे ज़ोरों पर होता है। इस क़िस्म की चुनाव प्रकिर्या  देश के लोकतान्त्रिक ढाँचे को ध्वस्त करने जैसा है जिसके गंभीर परिणाम होसकते हैं .टॉप ब्यूरो

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