नफ़रतोँ के बीच पनपता प्रेम, एक वर्ग ने दुसरे वर्ग की इबादतगाह को बनवाने का लिया ज़िम्मा

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कासगंज । गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2018 के दिन उत्तर प्रदेश के कासगंज में अचानक नफरत की आंधी आई जो वहां के आपसी प्यार को सोहाद्र को पल में उड़ा लगाई । धर्म के नाम पर इंसानियत को पैरों तले कुचला गया। लोगों को उनका धर्म पूछकर पीटा गया, लोगों की सम्पत्तियों को आग लगा दी गयी। और रही सही कसर धार्मिक स्थलों को क्षतिग्रस्त करके पूरी की गयी।

 

उस दिन कासगंज से 20 किलोमीटर दूर अमांपुर गाँव में भी दंगाइयो ने तांडव मचाया। यहाँ स्थिति एक दरगाह की दीवार को तोड़ दिया गया। यही नही क़रीब तीन गुमटियों (खोकों ) को भी आग लगायी गयी। इस गाँव की आबादी क़रीब दस हज़ार है। यहाँ हिंदू और मुस्लिम हमेशा से भाईचारे और अमन के साथ रहते आए है। यही बात नफ़रत के सौदागरों को अच्छी नही लगी इसलिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गयी।

 

लेकिन मेरे वतन में अभी भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो नफ़रत पैदा करने वालों को आइना दिखाते रहते है।अमांपुर गाँव के हिंदुओ ने उन दंगाइयो को मुँहतोड़ जवाब दिया है।

उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा की हम इस घटना से शर्मिंदा है। यही नही यहाँ के हिंदुओ ने एक मिसाल क़ायम करते हुए ऐलान किया कि हम ईदगाह की क्षतिग्रस्त दीवार को बनवाने का ज़िम्मा ज़िम्मा लेते हैं । इसके बाद दोनों समुदायों में नफरत की दीवार ढह गयी और दोनो वर्गों ने अमन और शांति की बात करते हुए कहा की यह अमनपुर है, यहां दिलों में मुहब्बत है, नफरत के लिए कोई जगह नहीं।

 

मौक़े पर पहुँचे दोनो वर्गों के लोगों ने पुलिस अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि यहाँ कोई विवाद नही है। यह दंगाइयो की हरकत है जिससे गाँव का माहौल बिगड़ सके। न पहले यहाँ विवाद था और न आगे होगा। लखनऊ में एडीजी आनंद कुमार ने भी इस भाईचारे की तारीफ की है।और टाइम्स ऑफ़ पीडिया भी इस पहल की तारीफ करता है और सराहना करता है ।टॉप ब्यूरो

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