मुस्लिम नेताओं को इस दलित नेता से सबक़ लेना चाहिए

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Ali Aadil Khan Editor’s Desk

रावणों की बस्ती में प्यार बेसहारा है
मंदिर और मस्जिद का रिश्ता कितना प्यारा है
आई जो मुसीबत तो दोनों को पुकारा है
राम भी हमारा और रहीम भी हमारा है … मेरे गीत

कौशांबी के ग्राम लोहंदा में दलित नाबालिग से दुष्कर्म मामले में अखिल भारतीय पाल महासभा ने विरोध प्रदर्शन किया। महोबा में युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष रामप्रकाश पाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र के इसोटा गाँव के दलित युवा की हत्या के बाद शव को जलाने का अपराध ठाकुर समाज के लोगों ने किया था. इस हादसे के प्रतिरोध में वहां दलित समाज के लोगों ने आंबेडकर जयंती नहीं मनाई .

इन दोनों बड़ी घटनाओं के बाद परिवार को सांत्वना देने और और उसको इन्साफ दिलाने के लिए भीम आर्मी चीफ और नगीना लोकसभा से सांसद चंद्रशेखर रावण प्रयागराज पहुंचे.जहाँ उनको प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार के लोगों से मिलने से रोक दिया गया.

हालाँकि पहले उनको परिवारजनों से मिलने का आश्वासन प्रशासन द्वारा दिया गया था. योगी सरकार के इस विश्वासघात से दलित समाज का ग़ुस्सा फूट पड़ा था और तभी गुस्से भीड़ ने पुलिस वाहन को आग लगा दी .

Dalit neta

ये समाचार 5 दिन पुराना है लेकिन हम आज इसका ज़िक्र क्यों कर रहे हैं. तो याद रहे समाज में कुछ हादसे सिर्फ खबर नहीं होते बल्कि एक सबक़ होते हैं.

और जब ज़ुल्म के खिलाफ कोई समाज या कुछ नेता खड़े होते हैं तो शासन और प्रशासन पर भी इसका असर पड़ता है .जो सोई हुई मज़लूम क़ौमों को ललकारता है, और सुधारता है प्रशासन और शासन में मौजूद संकीर्ण मानसिकता के अधिकारीयों और नेताओं को.

कई घटनाओं को देखते हुए हमें लगता है मुस्लिम नेताओं को इस दलित नेता से सबक़ लेना चाहिए. अक्सर वो समाज के मुद्दों पर मैदान में लड़ता दिखाई देता है .

आपको याद हो तो कुछ दिन पहले ही ऐसी एक घटना क़ुरैश बरादरी के नौजवानों के साथ घटित हुई थी . सरेआम तथकथित हिन्दू संस्था के आतंकियों ने बुरी तरह 4 मुस्लिम निहत्थे युवकों पर हमला किया था .

आरोप था की ये गाडी में गोमांस लेकर जा रहे हैं . जबकि Lab रिपोर्ट में इसका पता चला की यह प्रतिबंधित मीट नहीं था.और इस तरह का यह कोई पहला वाक़िया नहीं था,, सैकड़ों घटनाएं अब तक गोकशी , गोमांस और गोतस्करी के नाम पर देश में हो चुकी हैं जिसमें दर्जनों बेगुनाहों का क़त्ल हो चुका है .

और यह बात सरकार भी जानती हैं और अवाम भी समझती है. यह पूरा एक Nexas है एक श्रंखला है जिसको सियासी संरक्षण प्राप्त है . यह काम सिर्फ पैसे कमाने और साथ में नफरत फैलाने के लिए किया जाता है .

इस प्रकार की घटनाओं से नफ़रती पार्टी को लाभ मिलता है इसलिए उन्मादियों को खुल्ला छूट दी गई होती है. हालांकि PM मोदी गोरक्षा के नाम पर लोगों की जान लेने को लेकर कड़े शब्दों में अपनी नाराज़गी का इज़हार कर चुके हैं.

अब एक और ग्रुप है जो पवित्र कांवड़ के नाम पर जमकर सड़कों पर तांडव मचाने के लिए उतर आया है .और एक पूरे समुदाय को बदनाम करता है .

अलीगढ मीट कारोबारियों के साथ हुए हादसे के बाद कुछ लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में अलीगढ अस्पताल पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी हिम्मत बंधाई . लोकल नेताओं ने प्रशासन पर इन्साफ के लिए दबाव बनाया.

SP अलीगढ की इस मामले में भूमिका काफी सराहनीये रही और आरोपी गिरफ्तार हुए,उन्मादियों के होंसले टूटे. हालाँकि उनके समर्थन में भी धरना हुआ और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई.

इस मामले में SP अलीगढ संजीव सुमन की ततपरता, निष्ठा ,निष्पक्षता और अपने फ़र्ज़ के प्रति वफादारी ने हालात को संवारा और सांप्रदायिक माहौल को भी बनाया. हालांकि तथाकथित हिंदूवादी संगठनों की तरफ़ से इस घटना का राजनितिक लाभ उठाने और साम्प्रदायिकता फैलाने की पूरी कोशिश की गयी थी .

हालांकि हम किसी भी प्रकार कि हिंसा के हमेशा खिलाफ रहे हैं. और क़ानून को हाथ में लिए जाने का कठोर विरोध करते रहे हैं.

लेकिन अगर कुछ सरकारें जो संविधान और जनविरोधी नीतियों पर काम करती हों और ऐसे समाज विरोधी वर्ग और संस्थाएं जो आपराधिक कृत्य करने को अपना अधिकार समझने लगें तो उनके विरुद्ध आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को लाज़िम क़रार देते हैं .

कहने का मतलब है अगर ज़ुल्म के खिलाफ चंद लोग भी खड़े होकर आवाज़ उठायें तो काफी फ़र्क़ पड़ता है . और यह ज़िम्मेदारी मुस्लिम समाज को उठानी चाहिए थी . या कम से कम मुस्लिम नेताओं को उठानी चाहिए थी.

मगर अफ़सोस यह समाज ज़ुल्म सहते सहते इतना कमज़ोर और बुज़दिल हो गया की अब खुद अपने लिए भी आवाज़ उठाने की सकत इसमें न रही . नेता वोटों की सियासत करने लगे , अवाम खुद को बचाकर दूसरों के ऊपर यह ज़िम्मेदारी डालने लगी .

नतीजा यह निकला कि अब कोई भी कहीं भी बस शुरू हो जाता है तांडव करने के लिए . हालाँकि Law and Order की ज़िम्मेदारी पुलिस को ही निभानी चाहिए जिसका हर तरफ़ अभाव नज़र आता है.

जो काम भीम आर्मी और उसके Chief अपने समाज की रक्षा और सम्मान और इन्साफ के लिए कर रही है , और कभी कभी भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर मुस्लिम पीड़ितों के पक्ष में भी अपना बयान दर्ज करा देते हैं यह उनका सराहनीये क़दम है.

हमारा मानना है देश में अम्न व् शान्ति के लिए और देश के विकास के लिए मुस्लिम समाज और उसके नेताओं को अग्रिम पंक्ति में रहकर यह काम करने की ज़रुरत थी . क्योंकि यह उनकी सियासी नहीं बल्कि मज़बहि ज़िम्मेदारी भी है. जो समाज मज़लूमों के अधिकारों और इन्साफ के लिए आवाज़ उठाएगा वो ज़ुल्म से मेहफ़ूज़ रहेगा.

आज दुनिया में 2 ही क़ौमें हैं एक ज़ालिम और दूसरी मज़लूम. ऐसे में हमको ज़ालिम का विरोध करना है चाहे वो अपना भाई हो बाप हो और मज़लूम का समर्थन करना है चाहे वो किसी भी मज़हब या जाती से ताल्लुक़ रखता हो..

आप किसके साथ हैं ज़ालिम के या मज़लूम के ?comment box में जाकर अपनी राये ज़रूर दें. यदि आप मज़लूम का समर्थन करके देश के निर्माण में अपना योगदान देना चाहते हैं तो TimesofPedia के साथ जुड़ें. Help The Victims Help The Nation and Nation First .इन्साफ और इंसानियत के लिए आगे आएं और मुल्को मिल्लत के वफादार रहें .शुक्रिया

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