मुस्लिम धर्म गुरुओं की योगी से मुलाक़ात , क्या है राज़

मुख्यमंत्री योगी से मिले मुस्लिम धर्मगुरु, योगी ने शांति बनाये रखने के लिए उलेमा को दी मुबारकबाद

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिया व सुन्नी धर्मगुरुओं का कोई प्रतिनिधिमंडल मिलने पहुंचा। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर शनिवार (9 नवंबर) को SC का तारीखी फैसला आ चुका है। अयोध्या में यह विवाद सदियों से चला आ रहा था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन का मालिक रामलला विराजमान को माना है। जबकि सुन्नी वफ्फ बोर्ड को कोर्ट ने अयोध्या में ही अलग जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।इस पूरे फैसले में एक और हम बात यह रही है इस फैसले में 5 जज्जों की पीठ के किसी एक जज्ज ने भी इस तारीखी फैसले की कॉपी पर अपना सिग्नेचर नहीं किया है ।इसके क्या राजनितिक परिणाम होसकते हैं रब ही जाने ।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिया व सुन्नी धर्मगुरुओं का एक प्रतिनिधिमंडल मिलने पहुंचा था । इस प्रतिनिधिमंडल को सीएम योगी ने दावत दी थी या उनकी यह मुलाक़ात किसी और ने प्लान की इसका अभी पता नहीं लग सका , किन्तु इस दौरान धर्म गुरुओं से मुखमंत्री की सौहाद्रपूर्ण माहौल में बात हुई और इस वफद ने अपनी कुछ मांगे भी रखीं जिसमें मस्जिद की जगह पर इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाये जाने में UP सरकार की भूमिका पर भी बात हुई ।

जानकारी के मुताबिक मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सरकार से अयोध्या में मस्जिद के लिए ऐसी जगह जमीन मांगी है, जहां इस्लामिक यूनिवर्सिटी भी बन सके। इसके साथ ही इस प्रतिनिधिमंडल ने अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएम को बधाई भी दी।

जबकि मुख्यमंत्री ने भी मुस्लिम धर्मगुरुओं को शांति की अपील व आपसी सौहार्द बनाने में सहयोग के लिए बधाई दी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बात का भी आश्वासन दिया कि सरकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी।प्रतिनिधिमंडल में मौलाना हमीदुल हसन, मौलाना सलमान हुसैन नदवी, मौलाना फरीदुल हसन, मौलाना यूसुफ हुसैनी भी शामिल थे , अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा भी उस बैठक में शामिल थे।

 

उत्तर प्रदेश के कई इलाके संवेदनशील हैं जहाँ हमेशा सांप्रदायिक माहौल के बिगड़ने का हमेशा खतरा बना रहता है ।आपको बता दें इससे पहले NSA डोभाल के घर भी मुस्लिम धर्मगुरुओं की एक बैठक हो चुकी है ।इस बैठक में हिंदू पक्ष की ओर से बाबा रामदेव, स्वामी परमात्मानंद, अवधेशानंद गिरी मौजूद थे। जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से जमीयत-ए-उलेमा हिंद के महा सचिव पूर्व राज्य सभा सदस्य महमूद मदनी, शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद शामिल थे । इनके अलावा कई दूसरे धर्मों के प्रतिनिधि भी यहां मौजूद रहे।

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