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क्या यूनिफार्म सिविल कोड 25000 उपजातियों के लिए मान्य ?

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Ali Aadil khan
Ali Aadil Khan Editor's Desk
Ali Aadil Khan Editor’s Desk 

देश में UCC यानी यूनिफार्म सिविल कोड के बारे में सत्तापक्ष की ओर से दावा पेश किया जा रहा है यह क़ानून मुस्लिम औरतों को उनके अधिकार दिलाने में मदद करेगा . और इसी सोच के मद्देनज़र अक्सर नेशनल चैनल्स पर UCC पर चर्चा या खबर के दौरान बुर्क़े वाली मुस्लिम महिलाएं और टोपी वाले मुसलमान और मुस्लिम मोहल्लों के बाज़ारों को दिखाया जा रहा होता है .

और इसके ज़रिये ऐसा नैरेटिव set किया जा रहा होता है जिससे लगे की यह क़ानून मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को उनके वो अधिकार दिलाने के लिए बनाया जाएगा जिनको उनकी मज़हबी तंज़ीमें नहीं दिला पा रही हैं ….

जबकि वाक़िया यह है कि इस सोच के पीछे भी लव जिहाद , UPSC जिहाद , चूड़ी जिहाद ,सब्ज़ी जिहाद और कोरोना जिहाद जैसी विचारधारा और तुच्छ व् घटिया सोच नज़र आती है . जो सोच हिजाब और लव जिहाद के भेड़िये से डराकर मुस्लिम महिलाओं और बच्चियों को तालीम से दूर करना चाहती है वही सोच Actually मुस्लिम महिलाओं की हितेषी क्योंकर हो सकती है ?

अफ़सोस की बात यह है कि इन सब नकारात्मक और नासूर जैसे मुद्दों को समाज पर थोपने के लिए TV Cahnnels , News Papers और सोशल मीडिया और IT Cells दिनों रात काम कर रहे होते हैं . TV Debates में बेहूदा , फ़ुज़ूल और Immatured सवालात पूछे जा रहे होते हैं . जैसे बहु विवाह , हलाला , इद्दत , जैसे उत्पीड़न के क़ानून इस्लाम के हिसाब से ख़त्म होने चाहिए या नहीं ?

बुनयादी तौर पर सवाल ही गलत है , इस्लाम के क़ानून ख़त्म होने के लिए नहीं बल्कि क़यामत तक लागु होने केलिए बने हैं.अब चाहे कोई इसको follow करे या न करे . और एक ऐसा इम्प्रैशन देने की भी कोशिश की जा रही है कि शरीअत के क़ानून मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के लिए मानो एक श्राप हैं .जबकि इस्लामी शरीयाः में ही महिलाओं के अधिकारों की सबसे ज़्यादा सुरक्षा की गई है . क्योंकि यह Divine Religion है .

अब हर तरफ बस uniform civil code की ही चर्चा है .मानो पूरा देश इस्लाममय होने जा रहा है . यह बात इसलिए कह रहा हूँ , क्योंकि Uniformity और बराबरी का concept इस्लाम का आधार माना जाता है , जिसके तहत ख़लीफ़ा गुलाम कि बारी आने पर उसको सवारी पर बिठा देता है और खुद जानवर कि नकेल पकड़ कर पैदल चलने लगता है …. …जिस समाज में क़त्ल , रेप , ग़बन , भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा से सम्बंधित मामलों में धर्म , जाती और पार्टी देखकर फैसले होते हों .वहां बराबरी और और सामान नागरिक अधिकार की बात खामो ख्याल है .

ऐसे में यहाँ Uniform Civil Code जैसे क़ानून का अमल में आ पाना Absolute Impossible है . जो समाज भाई बहिन के अधिकारों में पक्षपात रखता हो वो भारत में बसने वाले 10 धर्मों , 3000 जातियों और 25000 उपजातियों के साथ इन्साफ कर पायेगा और सामान नागरिकता क़ानून उनपर लागू कर पायेगा यह न तो मुमकिन है और न ही मुनासिब है .और यही बात देश के नयायधीश भी कह चुके हैं .

जिन सियासी पार्टियों का मक़सद किसी भी क़ानून या अध्यादेश को लाने के पीछे वोट धुर्वीकरण हो उसमें समानता या इंसाफ़ हो ही नहीं सकता . 2019 के आम चुनाव में तीन तलाक़ बिल लाकर मुस्लिम औरतों के प्रति अपनी हमदर्दी का लाभ बीजेपी उठाते हुए 9 % मुस्लिम महिलाओं का वोट हासिल कर चुकी है .

निरक्षर और मज़हब से दूर समाज की महिलाओं को झूठे वादे और वक़्ती लाभ के प्रलोभन से प्रभवित कर लेना आसान काम है . और फिर जिन महिलाओं को शोहर , शादी , बच्चे पहले ही एक बोझ और liability लगते हों उसको आज़ादी दिलाने का वादा ही काफ़ी है . और ऐसी महिलाएं और पुरुष हर समाज और समुदाय में मौजूद हैं जो अपनी मज़हबी और समाजी ज़िम्मेदारियों से भागते हैं .

जबकि यह बात भी सही है कि मुस्लिम तंज़ीमें और मज़हबी रहनुमा भी अपने समुदाय की औरतों के अधिकारों और इंसाफ के बारे में बहुत मुख्लिस और प्रयत्नशील नहीं रहे हैं .

लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि सरकार को हिन्दू महिलाओं से क्या दुश्मनी है ? उनकी सुरक्षा की बात क्यों नहीं कर रही है मोदी सरकार ,आये दिन हिन्दू माँ बहनों के साथ ना इंसाफ़ी और ज़ुल्म के पहाड़ टूट रहे हैं , देश में 38 % हिन्दू महिलाएं उनके पति , भाई या बेटों द्वारा नशे की हालत में प्रताड़ित और ज़ख़्मी की जाती हैं .

ऐसी महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई Uniform Deffence Code बिल क्यों नहीं लाया जाता है . इसलिए कि नीयत इंसाफ़ और बराबरी की नहीं बल्कि भारतीय समाज को बांटने और सत्ता पर क़ाबिज़ रहने की है . और इससे कोई भी सियासी जमात अछूती नहीं है .

अब आगामी लोकसभा चुनाव से पहले वोट धुर्वीकरण के लिए एक और तजुर्बे के तौर पर UCC को इस्तेमाल किया जाएगा?और साथ ही पुलवामा या बालाकोट जैसे किसी बड़े हादसे की भी दुर्भाग्यपूर्ण सम्भावना जताई जा रही है .

याद रखें जो कोई पार्टी या नेता नफ़रती और भड़काव भाषण दे रहा हो या ब्यान बाज़ी कर रहा हो समझ लो वो देश के दुश्मन का एजेंट है . देश की जनता को सतर्क रहने की ज़रुरत है .देश को विकसित और समृद्ध बनाने के लिए सच्चे देश प्रेम , एकता ,अखंडता और सांप्रदायिक सद्भाव की ज़रुरत है . हम यह बात जानते हैं कि अमन के दुश्मन अमन की बात करने वालों के भी दुश्मन होते हैं . लेकिन आँधियों के डर से दिए जलाने नहीं छोड़े जाते . आओ नफ़रत और साम्प्रदायिकता के अंधेरों को दूर करें , अपनी और आने वाली नस्लों की ज़िंदगियों को रौशन बनायें .

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