क्या कांग्रेस की इज़्ज़त बच गई ?

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एक सवाल प्रशांत किशोर के संदर्भ में यह भी निकल कर आ रहा है कि प्रशांत की कंपनी आईपैक ने तेलंगाना मुख्यमंत्री केसीआर से चुनावी रणनीति बनाने के लिए समझौता कर लिया है !

Devendr Yadav 

Political Analyst

देश की सबसे पुरानी पार्टी और देश की सत्ता पर सबसे ज्यादा राज करने वाली पार्टी कॉन्ग्रेस के सामने इतना बड़ा संकट आ गया कि उसे एक राजनीतिक रणनीतिकार की जरूरत आन पड़ी ! एक ऐसा रणनीतिकार जिसने साल 2014 में केंद्र की सत्ता पर आसीन भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बनाई थी ! 2014 के बाद प्रशांत किशोर देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के लिए चुनावी रणनीति बनाते हुए नजर आए !

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति बनाने का प्रस्ताव प्रशांत किशोर ने दिया ! प्रशांत किशोर के प्रस्ताव पर कांग्रेस के भीतर कांग्रेस के कद्दावर नेताओं की मैराथन दौड़ और बैठक शुरू हुई लेकिन अंत यह हुआ कि प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल नहीं होंगे ? अब सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस की इज्जत बच गई ?
इज्जत इसलिए क्योंकि आजादी के बाद कांग्रेस ने बड़े बड़े राजनीतिक संकटों का सामना किया, और गांधी परिवार ने कांग्रेस को हमेशा संकटों से उभारा ! 1980 में श्रीमती इंदिरा गांधी हो या फिर 2004 मैं श्रीमती सोनिया गांधी हो !


कांग्रेस को हमेशा गांधी परिवार ने कांग्रेस को एकजुट रखकर संकट से उभारा और देश में कांग्रेस की सरकार बनवाई ! कॉन्ग्रेस देश की सत्ता पर लगातार इसलिए भी का बीज रही क्योंकि कांग्रेस के पास हमेशा चुनावी रणनीतिकारों की एक लंबी फेहरिस्त थी और गांधी परिवार का देश की जनता के बीच अपना एक प्रभाव था !

ऐसे में यदि प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होकर कांग्रेस के लिए रणनीति बनाते और कांग्रेस प्रशांत किशोर की रणनीतियों पर चलती तो शायद कांग्रेस के रणनीतिकारों और गांधी परिवार की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता ? कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति यह नकारात्मक मैसेज जाता कि कांग्रेस के पास अब मजबूत राजनैतिक और चुनावी रणनीतिकार नहीं बचे और ना ही गांधी परिवार की देश की जनता के बीच कोई खास छवि बची !

क्योंकि प्रशांत किशोर के द्वारा बनाए गए कांग्रेस के लिए प्लान की खबरें कुछ इस तरह की आ रही थी की कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष गांधी परिवार से अलग हटकर हो, मतलब साफ था कि कांग्रेस को गांधी परिवार के चेहरे पर अब देश में वोट नहीं मिल रहा है ! इस प्लान के कारण गांधी परिवार की छवि पर राजनीतिक रूप से स्थाई प्रश्नचिन्ह लग जाता! जो देश के भविष्य के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के लिए ठीक संकेत नहीं था !

प्रशांत के कांग्रेस में आने की खबर जितनी तेजी से चली थी उतनी तेजी से इस खबर पर विराम भी लग गया ? एक सवाल प्रशांत किशोर के संदर्भ में यह भी निकल कर आ रहा है कि प्रशांत की कंपनी आईपैक ने तेलंगाना मुख्यमंत्री केसीआर से चुनावी रणनीति बनाने के लिए समझौता कर लिया है !

एक तरफ तो प्रशांत किशोर कांग्रेस से बात कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ केसीआर से बात हो रही थी, अब सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर को पता था कि उनकी कांग्रेस से बात नहीं बनेगी और इसीलिए प्रशांत किशोर की कंपनी ने केसीआर से चुनावी रणनीति बनाने का करार करना ही उचित समझा ?बात जो भी हो लेकिन सवाल यही है क्या कांग्रेस की इज्जत बच गई?

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