कर्नाटका चुनाव: कांग्रेस और बीजेपी दोनों की निगाहें लिंगायत वोटों पर टिकीं

कर्नाटका चुनाव: कांग्रेस और बीजेपी दोनों की निगाहें लिंगायत वोटों पर टिकीं

कर्नाटक चुनाव में अब समय नहीं बचा है इस बीच कांग्रेस और बीजेपी ने भी एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं. बीजेपी की कमान खुद प्रधानमंत्री ने संभाल रखी है तो राहुल भी पार्टी अध्यक्ष के नाते इसको अपने लिए एक चैलेंज मान रहे हैं . दोनों पार्टियों ने अपनी निगाहें लिंगायत वोट पर टिका रखी हैं. 17 फीसदी लिंगायत वोट सबसे अहम है.जो लगभग १०० सीटों पर निर्णायक माना जाता है . कर्नाटक जीतने के लिए बीजेपी ने इस वोट बैंक को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रखी है.और तमाम मुख़ालफ़तों के बावजूद येदियुरप्पा को अपना CM कैंडिडेट घोषित करदिया है

येदियुरप्पा खुद लिंगायत हैं इसलिए परंपरागत रूप से लिंगायत वोट बीजेपी को जाता रहा है, मगर पिछले चुनाव में कांग्रेस को कुल लिंगायत वोट में से 15 फीसदी वोट मिले थे. पार्टी इस बार इसे बढ़ाना चाहती है. यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष लिंगायत समुदाय के मठ में जाते हैं, मत्था टेकने के लिए. और तो और सबसे बड़ा दांव खेला मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जब उन्होंने लिंगायत को एक अलग धर्म का दर्जा देते हुए उसे अल्पसंख्यकों में शामिल करने की घोषणा कर दी. जबकि इसको कांग्रेस का एक तीर से दो शिकार भी कहा जारहा है .

यही नहीं सोनिया गांधी को भी इस कर्नाटक चुनाव में लाया गया है. पहले उनका चुनाव प्रचार करने का कोई प्रोगाम नहीं था. आपको याद होगा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बनारस में रोड शो के बाद उनकी तबियत बिगड़ गई थी और उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली लाकर अस्पताल में भर्ती किया गया था. मगर इस बार उन्होंने अपने प्रचार की शुरुआत की है उत्तरी कर्नाटक के विजयापुरा(बीजापुर) से. यह लिंगायत बहुल इलाका है. सोनिया गांधी का कर्नाटक से पुराना नाता है. बेल्लारी से वे चुनाव लड़ चुकी हैं. तब उन्होंने सुषमा स्वराज को शिकस्त दी थी.

आपको याद होगा इंदिरा गांधी भी चिकमंगलूर से चुनाव जीत चुकी हैं. यानि गांधी परिवार का कर्नाटक से खास रिश्ता है.

कांग्रेस ने एसआर पाटिल के नेतृत्व में एक समिति बनाई है जिसका काम केवल उत्तरी कर्नाटक पर फोकस करना है. कांग्रेस एमबी पाटिल,शरण पाटिल,बासवाराज रायारेड्डी जैसे नेताओं की बदौलत लिंगायत वोटों में सेंघ लगाने के चक्कर में है और अपने वोटों का प्रतिशत 15 से बढ़ाकर 20 के ऊपर ले जाना चाहती है. इसमें मुख्यमंत्री के लिंगायत को अल्पसंख्यकों का दर्जा देना एक बड़ा कदम बताया जा रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कर्नाटक के मंदिरों का चक्कर लगाने का सिलसिला लगातार जारी है. आपको याद होगा इसकी शुरुआत गुजरात में हुई थी. यानि राहुल गांधी कांग्रेस की अल्पसंख्यक सर्मथक की छवि को तोड़ना चाहते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी के नेताओं ने वोक्कालिगा के मठों के भी चक्कर लगाना शुरू कर दिए हैं. हालांकि वोक्कालिगा वोट पर देवगौडा बैठे हैं, जिनको एकमुश्त वोक्कालिगा वोट मिलता हैं क्योंकि गौडा भी वोक्कालिगा हैं. अब चुनौती सिद्धारमैया के लिए है कि वे बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे की तोड़ निकालते हैं.

बीजेपी ने इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को योगी आदित्यनाथ को उतार रखा है. बीजेपी को पता है कि यदि मुद्दा हिंदुत्व बना तो उसकी जीत पक्की है. अब देखना है कि सिद्धारमैया कैसे इससे निबटते हैं. यदि सिद्धारमैया अपनी नैया पार लगा लेते हैं तो रामकृष्ण हेगड़े के बाद दूसरे मुख्यमंत्री होंगे जो यह करिश्मा कर पाएंगे. हेगड़े 1988 में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.