केसरिया रंग पर पूर्व कप्तानों ने जताई नाराज़गी

भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग केसरिया होने पर विवाद, पूर्व कप्तानों ने जताई नाराज़गी; नवीन पटनायक ने भी उठाए सवाल

नई दिल्ली/भुवनेश्वर, 31 जुलाई: भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की पारंपरिक नीली (ब्लू) जर्सी को बदलकर केसरिया (ऑरेंज/सैफ्रन) रंग की जर्सी अपनाने के फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। यह बदलाव आगामी 2026 एफआईएच हॉकी विश्व कप से पहले किया गया है। हॉकी इंडिया का कहना है कि यह फैसला खेल संबंधी व्यावहारिक कारणों से लिया गया है, जबकि कई पूर्व खिलाड़ी, खेल प्रेमी और राजनीतिक नेताओं ने इसे भारतीय हॉकी की पहचान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।

क्या है पूरा मामला?

हॉकी इंडिया ने घोषणा की कि भारतीय टीम अब पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की नई जर्सी पहनेगी। यह बदलाव लगभग एक सदी से भारतीय हॉकी की पहचान रही नीली जर्सी से अलग माना जा रहा है। नई किट राष्ट्रीय शिविर में खिलाड़ियों को भी उपलब्ध करा दी गई है और विश्व कप में इसके उपयोग की तैयारी है।

हॉकी इंडिया ने क्या दी सफाई?

हॉकी इंडिया के अनुसार, आधुनिक नीले सिंथेटिक टर्फ पर नीली जर्सी खिलाड़ियों के लिए एक-दूसरे को पहचानने में कठिनाई पैदा करती है। संस्था का दावा है कि केसरिया रंग मैदान पर अधिक स्पष्ट दिखाई देगा, जिससे खिलाड़ियों के बीच पासिंग और समन्वय बेहतर होगा। हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि दुनिया की कई टीमें समय-समय पर अपनी जर्सी के रंग बदलती रही हैं और इस निर्णय का किसी राजनीतिक विचारधारा से संबंध नहीं है।

पूर्व कप्तानों का कड़ा विरोध

भारतीय हॉकी के कई पूर्व कप्तानों और दिग्गज खिलाड़ियों ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

पूर्व कप्तान परगट सिंह ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा नीली जर्सी रही है और उसे बदलना उचित नहीं है। वहीं दिग्गज खिलाड़ी धनराज पिल्लै ने भी इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय भारतीय हॉकी की विरासत और पहचान से मेल नहीं खाता।

कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने इस बदलाव को “शर्मनाक” (Embarrassing) बताते हुए कहा कि जिस नीली जर्सी के साथ भारत ने दशकों तक विश्व स्तर पर पहचान बनाई, उसे अचानक बदलने की आवश्यकता समझ से परे है।

नवीन पटनायक ने क्या कहा?

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान नीली जर्सी रही है और इसे बदलना करोड़ों हॉकी प्रशंसकों की भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव में लिया गया प्रतीत होता है।

ओडिशा सरकार ने पिछले एक दशक में भारतीय हॉकी के विकास, विश्वस्तरीय स्टेडियमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन में महत्वपूर्ण निवेश किया है। इसी कारण राज्य में इस फैसले को लेकर विशेष संवेदनशीलता देखने को मिल रही है।

हॉकी इंडिया के भीतर भी सवाल

विवाद तब और बढ़ गया जब हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने बताया कि जर्सी बदलने का निर्णय उनकी पूर्व जानकारी के बिना लिया गया। उन्होंने इस विषय पर कार्यकारी बोर्ड को पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी जताई और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इससे यह संकेत मिला कि इस मुद्दे पर संगठन के भीतर भी मतभेद मौजूद हैं।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है। एक पक्ष का कहना है कि यदि बदलाव का उद्देश्य केवल खेल प्रदर्शन और दृश्यता बढ़ाना है तो इसे तकनीकी निर्णय माना जाना चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष इसे भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा विषय बताते हुए नीली जर्सी को बनाए रखने की मांग कर रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल हॉकी इंडिया ने अपने फैसले को वापस लेने का कोई संकेत नहीं दिया है। यदि कोई नया निर्णय नहीं होता, तो भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें आगामी एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में नई केसरिया जर्सी में उतर सकती हैं। हालांकि, खिलाड़ियों, पूर्व कप्तानों, प्रशंसकों और राजनीतिक वर्ग के विरोध के बीच यह विवाद अभी शांत होता नहीं दिख रहा है।

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