स्टॉक मार्केट में जिंदल सुप्रीम की मजबूत शुरुआत, प्रीमियम लिस्टिंग के बाद लगा अपर सर्किट

नई दिल्ली, 23 सितंबर । इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए स्टील के पाइप, ट्यूब और दूसरे प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी जिंदल सुप्रीम (इंडिया) के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में मजबूती के साथ एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 93 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 31.08 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 121.90 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग 29.03 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 120 रुपये के स्तर पर हुई।

प्रीमियम लिस्टिंग के बाद खरीदारों ने लिवाली शुरू कर दी, जिससे इस शेयर की स्थिति में सुधार होने लगा। लगातार हो रही खरीदीरी के सपोर्ट से ये शेयर उछल कर 126 रुपये के अपर सर्किट लेवल तक पहुंच गया। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 33 रुपये यानी 35.48 प्रतिशत का फायदा हो गया।

इस कंपनी का 124.88 करोड़ रुपये का आईपीओ 16 से 18 सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से जोरदार रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 177.03 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 126.41 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 326.84 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 141.75 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 1,34,28,000 शेयर जारी किए गए हैं। इनमें लगभग 100 करोड़ रुपये के 1,07,41,149 नए शेयर जारी किए गए हैं। इसी तरह लगभग 25 करोड़ रुपये के 26,86,851 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

जिंदल सुप्रीम की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत मामूली उतार चढ़ाव के बावजूद लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 12.87 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 24.27 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 22.53 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 8.28 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 650.88 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 604.74 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 675.94 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 191.09 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 104.92 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 95.84 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ बढ़ कर 119.87 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ कम होकर 92.46 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा हुआ था।

कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी इस अवधि में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 47.90 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 72.17 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में कम होकर 56.28 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 64.56 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 50.31 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 74.64 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 96.82 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी का नेटवर्थ 105.02 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 21.11 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 25.92 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 41.63 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी का ईबीआईटीडीए 13.76 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

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