हाँ अब आप कुछ …कह सकते हैं,,मगर सब कुछ नहीं !…..

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क्या आपने मोबाइल कस्टूमर  की हैसियत से कभी किसी मोबाइल कंपनी के चेयरमैन से बात की है? शायद नहीं …और आप कर भी नहीं सकते.!हाँ अगर बात की है तो सब्ज़ी  ,फल , किराने का सामान , कपडा  या कुछ और घरेलू सामान बेचने वाले से .. बात ही नहीं ज़रुरत पड़ने पर लात भी जड़ी होगी !सामान अगर  पसंद नहीं आता तो बदलकर दूसरा आराम से भी ले आये होंगे आप !अच्छा …आप अँगरेज़ के दौर को देख चुके हैं ?शायद नहीं मगर कुछ लोग , जिन लोगों ने ब्रिटिश पीरियड  देखा है वो जानते हैं की अँगरेज़ कोतवाल से भी किसी अच्छे खान की बात करने की हिम्मत नहीं होती थी !आज आज़ाद भारत में अँग्रेज़ साम्राज्येवदिओं  की जगह हमारे कॉर्पोरेट सेक्टर ने लेली है! आप २० वर्षों से मोबाइल प्रयोग  कर रहे हैं मगर आजतक अपनी कोई भी कंप्लेंट मोबाइल कंपनी के चेयरमैन तो छोड़िये डायरेक्टर से भी नहीं कर पाये होंगे आप !आपको सिर्फ कस्टमर केयर अधिकारी से बात करने की इजाज़त है  मिस्टर !!!वो भी उसकी मर्ज़ी अगर आपकी बात सुन्ना चाहे तो…यह तो हाल सिर्फ  मोबाइल  कंपनी  का  था जो  बहुत  कुछ  बाक़ी  था  ब्यान  करने  के  लिए ,,,मगर  यह  मोबाइल  कंस्यूमर  खूब  जानता  है !रोज़  ही  पाला  पड़ता  है बेचारे  का….हाहाहाहा ..मगर  इस  ज़ुल्म  के  खिलाफ  चाहकर  भी  कुछ  नहीं  करना  चाहता ,,,क्योंकि  मेहबूबा  जो  छूट  जायेगी … मोबाइल ….बस चुस्की चूसने में मस्त है ये बेचारा …और मैं भी !

 

अगर आप ख़ुदा न खुआस्ता बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में अपना या किसी परिवार के व्यक्ति  का इलाज कराने पहुंचे हों तो आपको इस बात का अंदाजा होगा की आप अपनी कोई भी बात फाइनल अथॉरिटी तक नहीं पहुंचा सके होंगे मैं कहता हूँ हॉस्पिटल के किसी बड़े अधिकारी तक भी नहीं पहुँच पाये होंगे श्रीमान ! आपकी कोई भी शिकायत सुनने के लिए कस्टमर केयर या कॅश  काउंटर  तक ही कुछ हसीनाओं से पाला पड़ा होगा  ,या साफ़ सुथरे दिखने वाले लालची नौकरों से जो आपकी बात को सिर्फ अपने मक़सद को हल करने  के लिए सुनते हैं.  या आपको सर सर कहकर,अपनी मार्केटिंग की बोली बोलकर HIPNOTIZE करने में मसरूफ  रहते  हैं ये गुर्गे!जैसे ही उन हसीनाओं  या गुर्गों को ग़ुस्से में आकर आप सच्ची बात करने लगे होंगे या अपनी शिकयत रखने की कोशिश की होगी तो  उन्होंने कहा होगा sir  mind your language ,यानि होश में रहे और ज़बान सम्भालकर बोलें !यानि आप उनसे भी बात अपने काम की नहीं कर सकते  , चेयरमैन साहब से बात रखने का तो सोच भी नहीं सकते !इन कफ़न चोरों से तो रब हर इंसान को बचाता रखे या कम से कम उनको जिनका मेडिकल इन्सुरेंस नहीं है!

 

कहने का तात्पर्ये है की यदि आपका वास्ता किसी कॉर्पोरेट सेक्टर में पड़ा है तो आपको झुंझलाहट और इर्रिटेशन तथा शोषण के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा होगा अगर कुछ अच्छा हुआ होगा तो वो आपका मुक़द्दर !आजका कॉर्पोरेट सेक्टर अँग्रेज़ दौर  के  साम्राज्येवाद  की  याद दिलाता है !..जिसमें  सहूलत  के  नाम  पर आम आदमी  का  खून  चूसकर  पैसा  और  दौलत  इकठा  करने  की  हविस  होती  थी  , जो  हविस  सबको  निगल  भी गयी.. अगर  आपको  वाक़ई  एक  ज़िम्मेदार  और  बा  इज़्ज़त  नागरिक  की  हैसियत  से  जीना  है  तो  इन्साफ  की  आवाज़  हमारे  साथ  मिलकर  लगाएं ,,,हाँ अब आप कुछ …कह सकते हैं ,, मगर सब कुछ नहीं !………….

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