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महान स्वतंत्रता सेनानी अब्बास तैयबजी को याद किया गया

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1919 में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने उन्हें अपनी तरफ़ से जलियांवाला हत्याकांड के तथ्य इकट्ठा करने वाली कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया. इस दौरान उन्होंने इस वीभत्सता के शिकार कई लोगों से बात की. जनरल डायर के वहशीपन ने अब्बास तैयबजी को अंदर तक हिलाकर रख दिया. यहीं से वे गांधी अनुयाई बन गए. उन्होंने ही नहीं, उनके परिवार ने भी गांधीवाद को पूरी तरह से अपना लिया. परिवार खादी पहनता, पैरों में जूते की जगह चप्पल आ गई और रेल का सफर पहले दर्जे से तीसरे दर्जे का हो गया. उनकी बेटी रिहाना तैयबजी द्वारा एक अख़बार को दिए इंटरव्यू के मुताबिक़ तैयबजी परिवार ने गांधी की आवाज़ पर अपने तमाम कीमती कपड़े स्वदेशी आंदोलन में आग के हवाले कर दिए थे.


स्वतंत्रता संग्राम के शुआती दौर में अग्रणी भूमिका अदा करने वाले अब्बास तैयबजी की याद में आज 01 फरवरी २०२१ को उनके जन्म दिवस पर श्रद्धांजिल सभा का आयोजन किया गया। एक फरवरी 1854 में बड़ौदा के एक उदारविचारधारा वाले परिवार में जन्म लेने वाले तैयबजी 1930 में नमक कानून का विरोध करते गिरफ्तार हुए। उसी दौरान उन्हें भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था।


जन्म दिवस समारोह में हिमालया ड्रग्स कंपनी के निदेशक डॉ एस फारूक ने बताया कि अब्बास तैयबजी एजुकेशनल एण्ड चेरिटेबल ट्रस्ट ने तैयबजी के भूले बिसरे मकबरे की मरम्मत और उसकी देखभाल का बीड़ा उठाया है। उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें पहाड़ी की ढलान के नीचे मसूरी के Landore बाजार के पास दफनाया गया था।

उसके बाद उन्हें भुला दिया गया , कुछ समय पहले जानकारी मिली कि उनके मकबरे को भुला दिया गया है। उनके साथ आजादी की लड़ाई की सुनहरी यादें जुड़ी हुई हैं। उनके योगदान को याद रखने के लिए यह प्रयास जरूरी है।और यह भी ज़रूरी है की उन तमाम भूले बिसरे स्वतंत्रता संग्रामियों की यादों को ताज़ा किया जाए , जिन्होंने अपनी जानों की क़ुरबानी देकर हमें गोर अंग्रेज़ों से आज़ादी दिलाई .

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डॉ एस एम आसिफ (इन दिनों के संपादक) ने कहा कि उनको याद कर दिल को एक सुकून का अहसास होता है, डा आसिफ ने बताया कि उन्होंने 34 वर्षो तक बड़ौदा स्टेट सर्विस में अपनी सेवा दी और 1913 में मुख्यन्यायधीश बनने के बाद तैयबजी सेवा निवृत हुए। जिस तरह से उन्होंने न्यायिक सेवा में कीर्तीमान स्थापित किए ठीक उसी तरह से आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले और जेल गए । उन्होंने कहा कि गांधी जी ने अपने संकलित ग्रंथों में अनेक मौकों पर उनका उल्लेख किया है। मगर अफसोस की बात है कि कांग्रेस और दीगर पार्टियां उन्हें और उनके कीर्तिमानों को भुलाए बैठी है।

अब्बास तय्यबजी को याद किये जाने के मौके पर न्यायाधीश टंडन साहेब ने कहा कि बैयबजी ने अपनी न्यायिक सेवा के दौरान भी अनेक निर्णय ऐसे किए जिसकी रोशनी में आज भी अदालते अपने फैसले सुनाती हैं। उन्होंने कहा कि वे देश के लिए ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें भुलाया जाना खुद से बेईमानी होगी। अब्बास तैयबजी एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने धरोहर को संरक्षित करने का एक बीड़ा उठाया है जो देश की सेवा का काम है। देश विदेश में तैयबजी हमेशा प्रेरणा के स्त्रोत बने रहेंगे। एक फरवरी को उनकी याद में हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में अनेका अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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